फिल्म रिव्यूः स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 (Movie Review Of Student Of The Year 2)

कलाकारः टाइगर श्रॉफ, अनन्या पांडे, तारा सुतारिया, आदित्य सील, समीर सोनी
निर्देशकः पुनीत मल्होत्रा
स्टारः 2.5

अगर आपको पर्दे पर ढाई घंटे तक सुपरफिट, ख़ूबसूरत और डिज़ाइनर कपड़ों में सजे कुछ जवां और तरोताज़ा चेहरों को देखना है तो स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 (Student of the Year 2) आपके लिए ही बनी है. सेंट टेरेसा कॉलेज के मॉडल्स जैसे स्टूडेंट्स, जो किताबों के साथ कभी-कभार ही दिखते हैं और बात-बात पंच मारनेवाले लड़के जिनके जेल लगे हुए बाल कभी इधर से उधर नहीं होते. अब ऐसे कॉलेज की कल्पना तो सिर्फ करण जौहर ही कर सकते हैं. ऑरिजनल स्टूडेंट ऑफ द ईयर के फैन्स के लिए एक ख़ुशखबरी यह है कि यह फिल्म पहले एडिशन की तरह ही पिक्चर परफेक्ट है. हालांकि करण जौहर द्वारा निर्देशित पहली फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी, इसलिए इस फिल्म से दर्शकों की अपेक्षाएं ज़्यादा थीं, जिस पर पुनीत मल्होत्रा पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए हैं.

Student Of The Year 2 Reviews

कहानीः फिल्म की कहानी रोहन (टाइगर श्रॉफ) की है, जो देहरादून के सेंट टेरेसा कॉलेज में स्पोर्ट्स कोटा में एडमिशन लेता है. सेंट टेरेसा बहुत भव्य और आलिशान कॉलेज है. कॉलेज में रोहन का सामना मानव मेहरा (आदित्य सील) और उनकी बहन श्रेया ( अनन्या पांडे) से होता है. ये भाई-बहन कॉलेज के ट्रस्टी के बच्चे होने के साथ-साथ बहुत अमीर हैं. डांस कॉम्पिटिशन जीतने के लिए मानव न केवल रोहन से उसकी गर्लफ्रेंड मिया (तारा सुतारिया) को छीन लेता है बल्कि उसे कॉलेज से भी निकलवा देता है. आगे चलकर हालत ऐसे बनते हैं कि रोहन अंडरडॉग के रूप में अपने कॉलेज का प्रतिनिधत्व करते हुए सेंट टेरेसा और मानव की टीम के विरुद्ध खड़ा हो जाता है. इस बार मुकाबला है कबड्डी की ‘स्टूडेंट ऑफ द इयर’ की ट्रॉफी हासिल करके अपने खोए हुए गौरव को पाने का.

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एक्टिंगः फिल्म में टाइगर श्रॉफ ने अपनी डांस और फाइटिंग स्किल्स को बख़ूबी निभाया है, हालांकि वे स्टूडेंट के रोल में ख़ुद को पूरी तरह फिट नहीं हो पाए हैं. जबकि अनन्या और तारा यंग कॉलेज गोइंग स्टूडेंट के किरदार में पास हो जाती हैं. तारा सुतारिया के किरदार को ठीक से गढ़ा नहीं गया है, मगर अनन्या पांडे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रही हैं. ‘स्टूडेंट ऑफ द इयर’ में आलिया, वरुण और सिद्धार्थ की केमेस्ट्री असरकारक रही थी, मगर यहां रोमांस का का पहलू ठंडा नजर आता है. गुल पनाग, समीर सोनी जैसे अच्छे कलाकरों को जाया कर दिया गया है. अनन्या के देखकर एहसास होता है कि उनमें अपने पिता चंकी पांडे की तरह अच्छा कॉमिक सेंस है. फिल्म का मजबूत पक्ष है उसका डांस और ऐक्शन. एडिटिंग थोड़ी कसी हुए होती तो अच्छा था. सेकंड हाफ की शुरुआत बहुत धीमी है. क्लाइमैक्स के बारे में आपको पहले ही पता चल जाता है.

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