फिल्म समीक्षा- फोन बूथ, मिली, डब...

फिल्म समीक्षा- फोन बूथ, मिली, डबल एक्सएल… (Movie Review- Phone Bhoot, Mili, Double XL…)

एक वक़्त था कि जब बड़े स्टार और ख़ासकर यंग स्टार की फिल्में देखना लोग अधिक पसंद करते थे. इन्हें वे हाथों-हाथ लेते थे, लेकिन इस हफ़्ते रिलीज़ हुई तीन बड़ी फिल्में भी कोई ख़ास कमाल नहीं दिखा पाईं. जी हां, हम बात कर रहे हैं कैटरीना कैफ, सिद्धांत चतुर्वेदी और ईशान खट्टर की फोन बूथ, जाह्नवी कपूर, सनी कौशल की मिली और सोनाक्षी सिन्हा, हुमा कुरैशी की डबल एक्सएल की. तीनों ही फिल्मों का सब्जेक्ट अलग, मज़ेदार और दिलचस्पी पैदा करनेवाला था, इसके बावजूद तीनों ही फिल्में कोई ख़ास कमाल नहीं दिखा पाईं.


हम बात करे कैटरीना कैफ, ईशान खट्टर और सिद्धांत चतुर्वेदी की ‘फोन भूत’ फिल्म की तो इस फिल्म का ट्रेलर लोगों को बेहद पसंद आया था. वे इन तीनों कलाकारों से एक एंटरटेनमेंट कॉमेडी से भरपूर फिल्म की अपेक्षा कर रहे थे, लेकिन दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाए कलाकार और फिल्म चारों खाने चित हो गई. एक्सेल इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी फोन भूत में कैटरीना कैफ भूत की भूमिका में नज़र आईं, पर वह भी मनोरंजन करने और डर पैदा करने में असफल रहीं. वहीं यंग कलाकार ईशान खट्टर और सिद्धांत चतुर्वेदी भी अपने अजीबोगरीब हरकतों और सिचुएशन के हिसाब से की गई कॉमेडी में प्रभावशाली नहीं रहे. गुरमीत का निर्देशन भी औसत ही रहा.

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‘मिली’ फिल्म एक और हिट दक्षिण भारतीय फिल्मों की रीमेक का असफल परिणाम हिंदी में देखने मिला. इन दिनों बॉलीवुड में साउथ की फिल्मों का रीमेक बनाने का ट्रेंड ख़ूब ज़ोरों पर चल रहा है, लेकिन जहां वह फिल्में साउथ में सुपर-डुपर हिट रहीं, वहीं वे हिंदी में एक के बाद एक फ्लॉप साबित होती जा रही हैं. इसी कड़ी में जाह्नवी कपूर की मिली भी है. पहली बार अपने पिता बोनी कपूर के साथ इस फिल्म में काम कर रही जाह्नवी ने शायद ही उम्मीद की थी कि यह फिल्म लोगों को अधिक पसंद नहीं आएगी.

दरअसल यह मलयालम फिल्म हेलेन की रीमेक है, जिसका निर्देशन माथुकुट्टी जेवियर ने दिया था, लेकिन वह हिंदी में अपना कमाल नहीं दिखा पाया और निराश ही किय. वैसे फिल्म का कॉन्सेप्ट बढ़िया था कि मिली अपने संघर्ष कर रहे पिता की आर्थिक मदद करना चाहती है. वह कुछ बनकर उन्हें सहयोग देना चाहती है. इसके लिए वह एक मॉल के फूड जॉइंट में पार्ट टाइम काम करती है. वहीं एक बार वह कोल्ड स्टोरेज में फंस जाती है. वहीं से शुरू होता है मिली के वहां से कैसे बाहर निकलने का संघर्षपूर्ण सफ़र. पुलिस, मिली के बॉयफ्रेंड बने सनी कौशल, उनके पिता बने मनोज पाहवा सभी मिली को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि मिली फंसी हुई है कोल्ड स्टोरेज में. क्या मिली वहां से निकल पाती है?.. क्या होता है उसका अंजाम… इसे बड़े दिलचस्प तरीक़े से दिखाने की पूरी कोशिश की गई. लेकिन फिर भी शायद हिंदी बेस ऑडियंस को इतनी पसंद नहीं आई, जितनी साउथ के लोगों को यह फिल्म कमाल का लाजवाब लगी.

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‘डबल एक्सएल’ फिल्म का कॉन्सेप्ट बढ़िया और ज़बरदस्त है, इसके बावजूद सोनाक्षी सिन्हा और हुमा कुरैशी फिल्म में लोगों का भरपूर मनोरंजन नहीं कर पाईं. कैसे मोटापे की वजह से और प्लस साइज़ की औरतें अपनी इस कमी से उबरने के लिए संघर्ष करती हैं और लोगों को संदेश देती हैं, बढ़िया तरीके से फिल्म में बताया गया है. लेकिन फिर भी लोगों ने इसे नकार दिया.

इस तरह हम देख सकते हैं कि बड़े सितारों और मल्टीस्टारर फिल्में रिलीज़ होने के बावजूद दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई और तीनों ही फिल्में एवरेज रहीं और लोगों को ख़स पसंद नहीं आई.

Photo Courtesy: Social Media

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