बीएमआई से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई ( Myths And Facts Related To BMI)

बीएमआई (BMI) का अर्थ होता है बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index). इसका इस्तेमाल बॉडी फैट नापने के लिए किया जाता है. इसकी मदद से पता चलता है कि व्यक्ति का वज़न, उसकी क़द की तुलना में कम, ज़्यादा या फिर बराबर है. हाई बीएमआई इस बात को दर्शाता है कि व्यक्ति के शरीर में चर्बी अधिक है, वहीं लो बीएमआई का अर्थ है कि शरीर में फैट बहुत कम है. हाई बीएमआई वाले व्यक्तियों को दिल संबंधी बीमारियां, उच्च रक्तचाप और डायबिटीज़ होने का ख़तरा रहता है, लेकिन लो बीएमआई भी हेल्दी नहीं होता. ऐसे व्यक्तियों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो सकती है और उन्हें एनीमिया इत्यादि होने का ख़तरा रहता है. आइए, बीएमआई से जुड़े कुछ मिथकों की सच्चाई जानते हैं.

BMI, body mass index

मिथक1- लो बीएमआई का अर्थ है कि आप स्वस्थ हैं.
सच्चाई- शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा फैट होने पर हाई ब्लडप्रेशर, हाई ब्लडशुगर या हाई कोलेस्ट्रॉल होने का ख़तरा बढ़ जाता है, लेकिन लो बीएमआई होने का यह मतलब नहीं है कि आप इन सभी या अन्य बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित हैं. आपको बता दें कि लो बीएमआई वाले लोगों को हेल्दी वेट वालों की तुलना में इंफेक्शन होने का ख़तरा ज़्यादा होता है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अंडरवेट लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है. वर्ष 2006 में द न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ मेडिसिन में छपे अध्ययन के अनुसार, लो बीएमआई वाले कोरियन पुरुष व महिलाओं को सांस संबंधी बीमारियां जैसे फेफड़ों का रोग इत्यादि होने का ख़तरा ज़्यादा होता है. इसके अलावा सांस संबंधी बीमारियों से मरने का ख़तरा भी लो बीएमआई वालों को ज़्यादा होता है. पतले लोगों के शरीर के अंदरूनी हिस्सों में अनहेल्दी चर्बी हो सकती है, जिसके कारण उन्हें हार्ट डिज़ीज़, टाइप 2 डायबिटीज़ और कैंसर होने का ख़तरा बढ़ जाता है. इसलिए अगर आप पतले हैं और आपका बीएमआई कम है तो यह मानकर न चलें कि आप स्वस्थ्य ही हैं.

मिथक 2- हाई बीएमआई होने पर हार्ट अटैक होने का ख़तरा बढ़ जाता है.
सच्चाई- यह सच है कि बीएमआई ज़्यादा होने पर हार्ट डिज़ीज़ का ख़तरा ज़्यादा होता है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. दिल संबंधी बीमारियों के लिए शरीर में चर्बी की मात्रा सबसे ज़्यादा मायने रखती है. वर्ष 2016 में जेएएमए इंटरनल मेडिसिन में एक सर्वे रिर्पोट छपी थी. इस सर्वे में अलग-अलग बॉडी फैट वाले 4,046 जुंडवा लोगों पर अध्ययन किया गया. इस अध्ययन में पाया गया कि जुंडवा भाई-बहनों में से जिस भाई या बहन का बीएमआई ज़्यादा था, उन्हें किसी तरह की दिल की बीमारी नहीं थी. अध्ययन में पाया गया कि अधिक बीएमआई वालों को टाइप 2 डायबिटीज़ होने का ख़तरा ज़्यादा होता है.

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मिथक 3- अगर आप पौष्टिक खाना खाते हैं और एक्सरसाइज़ करते हैं तो आपका बीएमआई कम होगा.
सच्चाई- स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक खाना और नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी होता है, लेकिन अगर आप ऐसा करते हैं तो इसका यह अर्थ नहीं है कि आपका बीएमआई कम ही होगा. बीएमआई मसल्स और बॉडी फैट के बीच अंतर नहीं करता. एक बात ध्यान रखें कि मसल्स का वज़न फैट यानी चर्बी से ज़्यादा होता है. इसलिए जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करते हैं और पौष्टिक खाना खाते हैं वे भले ही पतले दिखें, लेकिन उनका बीएमआई अधिक हो सकता है. जो लोग एक्सरसाइज़ करके मसल्स गेन करते हैं, उनका वज़न ज़्यादा हो सकता है, लेकिन उन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं होती है. एक बात ध्यान रखें कि मोटे लोग भी स्वस्थ्य हो सकते हैं.

मिथक 4- अगर बीएमआई में आपका वज़न सामान्य दिखता है तो इसका अर्थ है कि आप स्वस्थ हैं.
सच्चाई- अगर आप वयस्क हैं और आपका बीएमआई 18.5 से 24.9 के बीच है तो इसका अर्थ यह हुआ कि आपका वज़न हेल्दी रेंज के बीच है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आप स्वस्थ हैं. वास्तविकता तो यह है कि पतले लोग मोटे लोगों से ज़्यादा स्वस्थ होते हैं, इस बात की कोई गारंटी नहीं होती. आपका स्वास्थ्य बहुत-सी चीज़ों, जैसे- जीन्स, जीवनशैली, जेंडर, डायट और अन्य चीज़ों पर निर्भर करता है. यदि एक सामान्य बीएमआई वाला व्यक्ति चेन स्मोकर है या फिर बहुत ज़्यादा शराब पीता है तो वह स्वस्थ कैसे हो सकता है? धूम्रपान करने व शराब पीनेवालों को कैंसर जैसी बहुत-सी बीमारियां होने का ख़तरा होता है. इसलिए नॉर्मल बीएमआई को अच्छे स्वास्थ्य की निशानी न समझें.

मिथक 5- बीएमआई अच्छी सेहत का संकेत है.
सच्चाई- एक बात ध्यान रखें कि बीएमाआई से हर किसी के लिए सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता, ख़ासतौर पर लंबे लोगों और खिलाड़ियों के लिए. इसलिए सेहत का सही अंदाज़ा लगाने के लिए कंप्लीट चेकअप कराएं.

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