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पैपराजी को कलाकारों की व्यक्तिगत पसंद को समझना होगा वरना जया बच्चन की तरह कई आवाज़ें उठ सकती हैं… (Paparazzi will have to understand the personal choices of the artists otherwise many voices like Jaya Bachchan may be raised…)

Paparazzi

फिल्म इंडस्ट्री में हर किसी की अपनी व्यक्तिगत ज़िंदगी होती है और इससे जुड़े हर व्यक्ति को इसे समझना होगा. लेकिन शायद ऐसा हो नहीं पाता.

मेरी सहेली के पॉडकास्ट में दो मशहूर पत्रकारों ने मीडिया कल्चर और कलाकारों के व्यवहार पर कई चौंकानेवाली बातें कीं. पूरा पॉडकास्ट देखने-सुनने के लिए लिंक पर क्लिक करें-

अक्सर ही मीडिया में, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कोई न कोई ट्रेंड चलता रहता है, जिससे फिल्म स्टार्स ही नहीं दूसरे लोग भी प्रभावित होते हैं फिर चाहे वो पत्रकार हो या फिल्मी फोटोग्राफर्स. इन दिनों पैपराजी कल्चर भी सवालों के घेरे में है. जब से जया बच्चने ने इन्हें लेकर आलोचनात्मक प्रतिक्रिया दी है, तब से इसके पक्ष और विपक्ष में कमेंट्स की बाढ़ सी आ गई है. हर कोई अपने पैमाने से इस मुद्दे को देख रहा है. किसी को यह सही लगता है, तो कोई इसे पैपराज़ी पर ज़ुल्म बता रहा है.

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एकबारगी यह भी सोचना होगा कि आख़िर क्या वजह रही होगी जो जया जी ने इस तरह की बातें कहीं. उनके व्यवहार और कपड़ों पर कमेंट्स किए. फिल्म स्टार्स की अपनी पसंद और पर्सनल लाइफ होती है जिस पर एक हद तक ही आप बोल-लिख सकते हैं. परंतु जर्नलिस्ट का तो यह मानना रहता है कि वे पब्लिक फीगर हैं और उन पर हमारा काफ़ी अधिकार भी है. किंतु कुछ भी हो,  हैं तो सभी इंसान ही ना!

यह ज़रूरी नहीं कि जो बात आपको अच्छी लग रही वो दूसरे को भी पसंद आए. यदि कोई कलाकार नहीं चाहता कि उसकी फोटो खींची जाए तो कम से कम इतनी स्वतंत्रता तो उसको होनी चाहिए. दरअसल, कुछ कलाकारों ने इस तरह की चलन की शुरुआत कर दी है कि इससे अन्य कलाकारों की छवि भी खलनायक की बनती जा रही है.

Jaya Bachchan

हमें समझना होगा कि स्टार्स और मीडिया दोनों ही एक दूसरे के लिए ज़रूरी है. बस, यहां पर ज़रूरत है दोनों को अपनी सीमाओं को समझने की, फिर वो शब्दों को लेकर हो, व्यवहार को लेकर हो या फिर अपेक्षाओं को लेकर.

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कोई भी जान-बझूकर नाराज़गी या ग़ुस्सा नहीं होता, कुछ तो ग़लत होता है जब इस तरह के रिएक्शन आते हैं. तब हर कोई बहती गंगा में हाथ धोना शुरू कर देता है. यह तो वो बात हो गई फलां ने कुछ कहा नहीं कि सभी को बातें बनाने का मौक़ा मिल गया. उस पर तुर्रा यह है कि यदि वह मशहूर है तब तो खैर नहीं, हां सेलेब्स होने की कई बार बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती ही है. कैसे? इसे जानने के लिए आपको फिल्म इंडस्ट्री और सेलेब्स से जुड़े मेरी सहेली के पॉडकास्ट देखने-सुनने होंगे. शेष फिर...

Photo Courtesy: Social Media

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