काव्य- कविता लिखने चला हूं… (Poe...

काव्य- कविता लिखने चला हूं… (Poem- Kavita Likhne Chala Hun…)

सुनो आज मुझे
मुझे बेहद ख़ूबसूरत शब्द देना
जैसे
गुलाब चेहरे के लिए
झील आंखों के लिए
हंस के पंख गालों के लिए
और होंठों के लिए
अंगूर या अनार
नैतिकता के बंधन न हों तो
आम, नींबू, स्ट्रॉबेरी
और रेड वाइन भी मांग लूं
आज मैं
तुम्हारे शरीर पर
कविता लिखने चला हूं…

शिखर प्रयाग

hindi kavita

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