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कुछ तो लोग कहेंगे… राजेश खन्ना उलझते-सुलझते रहे रिश्तों में ताउम्र… (Rajesh Khanna spent his entire life grappling with the complexities of relationships…)

कहते हैं फिल्मी सितारों की निजी ज़िंदगी भी धीरे-धीरे फिल्मों की तरह होती चली जाती है. अब यह समझ के परे की बात है कि उनकी पर्सनल लाइफ पर फिल्में हावी हो जाती हैं या फिल्मों में व्यक्तिगत जीवन की झलकियां दिखने लगती है. जब से फिल्म इंडस्ट्री बनी है तब से ये सिलसिला चलता ही रहा है. हर कलाकार पर संघर्ष, कामयाबी, असफलताएं, प्यार, दुश्मनी तो कभी-कभी ग़लत सोहबत भी हावी रहा ही है. लेकिन यहां पर हम बात कर रहे हैं हिंदी सिने जगत के पहले सुपरस्टार रहे राजेश खन्ना के बारे में.

Rajesh Khanna


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राजेश खन्ना जिन्हें प्यार से ‘काका’ भी कहते थे कि लड़कियों की दीवानगी और कारवां इस कदर था कि हर कोई देख-सुनकर हैरान रह जाता था. लेकिन यह भी उतना ही कड़वा सच है कि जब वे गुमनामी के अंधेरे में खोते चले गए तो एकदम अकेले रह गए.
भरपूरा घर-परिवार होने के बावजूद रिश्ते को लेकर उनका हाथ खाली ही रहा. ख़ूबसूरत डिंपल कपड़िया से शादी, दो बेटियां, दामाद, नाती-नतिनी, यार-दोस्त, गर्लफ्रेंड्स सब कुछ था, पर नहीं था तो सुकून जिसकी तलाश उन्हें अंतिम समय में भी रही.
काका की ज़िंदगी में अंजू महेंद्रू, डिंपल से लेकर टीना मुनीम, अनिता आडवाणी तक तमाम महिलाएं आईं, परंतु उनकी अंदर की तन्हाई को शायद ही कोई समझ पाया. सभी उनका स्टारडम, अभिनय, अंदाज़, गुरु कुर्ता आदि ही देखते रहे और फ़िदा रहे, पर उनके  ख़ामोश नज़रों के बोल को कोई सुन न पाया. रिश्ते को लेकर वे ठगे ही गए या फिर हो सकता वो संजीदगी नहीं बन पाई जो होनी चाहिए थी.
अर्श से लेकर फ़र्श पर की स्थिति बेहद दर्दनाक होती है, ख़ासकर फिल्मी दुनिया में. यही राजेश खन्ना के भी साथ हुआ. एक वक़्त था जब उनके पास नाम, दौलत, शौहरत, पत्नी-बच्चे सब कुछ था. हर कोई उनसे जुड़ने और रिश्ता बनाने के लिए बेचैन रहता था और काका उन्हें निराश भी नहीं करते थे. परंतु धीरे-धीरे परिस्थितियां बदलने लगी. वो दौर गुज़रने लगा और काका के कामयाबी का सूरज अस्त होता चला गया. उनकी नाराज़गी, ज़िद और ग़ुस्सा रिश्तों को बिखराता चला गया. पत्नी डिंपल अलग हुईं, बेटियां दूर हुईं, दोस्त जो साथ होने का दम भरते थे बिदकने लगे और प्रेमिकाओं के बारे में तो हर कोई अच्छी तरह से जानता है. यह कहानी केवल काका की ही नहीं है ऐसे न जाने कितने स्टार, सुपरस्टार हुए जिनके साथ पहले पूरा कुनबा था, पर अंतिम पड़ाव पर बहुत कुछ ख़ामोश होता चला गया, ठीक उनकी 'आनंद' फिल्म के गाने की तरह, ज़िंदगी का सफ़र है ये कैसा सफ़र कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं...

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सच, राजेश खन्ना की ऐसी कई यादगार फिल्में व गाने रहे जो आज भी गुनगुनाने पर मजबूर कर देते हैं और भावुक कर देते हैं. यदि उनकी अर्थपूर्ण फिल्मों के साथ सॉन्ग पर एक नज़र डालेंगे तो उसमें, कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना... उनकी प्रेम कहानियों पर बेहद सटीक बैठते हैं. इसी तरह, ज़िंदगी कैसी है पहेली कभी तो हंसाए कभी ये रुलाएं... मानो उनकी ही ज़िंदगी का फ़लसफ़ा बयां कर रहे हैं.

अपनी पर्सनल लाइफ में भले ही रिश्तों को लेकर राजेश खन्ना कभी उलझते तो कभी सुलझते रहे, परंतु अभिनय की दुनिया में वे हमेशा एक लाजवाब अभिनेता रहे. एक ऐसा स्टार जो अपनी मज़ेदार एक्टिंग से ‘बावर्ची’ में हंसाता भी था तो अपनी ग़मगीन संजीदगी से ‘आनंद’ की तरह रुलाता भी था. आख़िर कोई भला कैसे भूल सकता है बाबू मोशाय... संवाद के साथ रुला देने वाला अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना का वो इमोशनल सीन. कुछ कलाकार अपने बेमिसाल अभिनय और आवाज़ के कारण हमेशा ही हमारे दिलों में ज़िंदा रहते हैं, वैसे ही थे राजेश खन्ना भी. 

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Photo Courtesy: Social Media

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