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मां-बाप पाकिस्तान चले गए तो, रिश्तेदारों ने पाला, राजा बाबू की तरह हुई थी राजेश खन्ना की परवरिश, बेशुमार प्यार ने बचपन में बना दिया था ज़िद्दी, जानें काका के बचपन का किस्सा (Rajesh Khanna Was Secretly Adopted When His Parents Moved To Pakistan, He Was Brought Up Like A Pampered Prince, Know The The Story Of ‘Kaka’s’ Early Years)

इंडियन सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने अपने दौर में ऐसा स्टारडम देखा है, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. वो ऐसे सुपरस्टार थे जिन पर लड़कियां मरती थीं. उनकी तस्वीर से शादी कर लेती थीं. उनके गाड़ी के आगे लेट जाती थीं. उनके नाम का सिंदूर लगाती थीं. इतना बड़ा सुपरस्टार ना तो कभी हुआ है और ना ही कभी आगे होगा. हाल ही में मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli Podcast) में राजेश खन्ना की सीक्रेट पत्नी अनीता आडवाणी (Anita Advani) पहुंची थीं, जिन्होंने उनकी लाइफ के कई सीक्रेट राज बताए, उनके इंटरेस्टिंग किस्से सुनाए.

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राजेश खन्ना के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि वो अडॉप्टेड चाइल्ड (Rajesh Khanna Childhood story) थे और जब उन्हें इस बात का पता चला था तब उन्हें बहुत सदमा लगा था. वो अपनी लाइफ के इस चैप्टर का ज़िक्र कभी नहीं करना चाहते थे. इंटरव्यू में भी हमेशा वो इस सवाल को टाल देते थे और अपने बचपन के बारे में बात करना तक पसंद नहीं करते थे. 

इसके पीछे भी एक इमोशनल कहानी है. 29 दिसंबर 1942 में राजेश खन्ना का जन्म ब्रिटिश इंडिया के अमृतसर में लाला हीरानंद और चंद्रानी खन्ना के घर हुआ. उनका नाम रखा गया जतिन (Jatin Khanna). जब विभाजन में लाला हीरानंद ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया, तो उन्होंने बेटे जतिन को रिश्तेदारों चुन्निलाल और लीलावती खन्ना को गोद दे लिया, जो बॉम्बे में रहा करते थे. 

जतिन का बचपन रईसी में गुजरा और इकलौती संतान होने की वजह से घर में वो हर किसी के लाडले थे. उनकी हर डिमांड बोलते ही पूरी होती, चाहे मॉडर्न साइकिल हो, रेडियो हो. अपनी इस दूसरी मां लीलावती को चाई जी कहकर बुलाया करते थे. लीलावती ने जतिन को किसी राजकुमार की तरह पाला था. वो अक्सर कहा करती थीं कि ये तो बचपन से ही राजा जैसा है. राजेश खन्ना इतने लाड़ से पले थे कि उनकी हर फरमाइश पूरी की जाती. शायद इसी वजह से वो जिद्दी बन गए. उन्हें लगता था कि चाहे घर हो या स्कूल हर कोई बस उन्हें ही अटेंशन दे.

राजेश खन्ना के फैमिली के एक करीबी ने उनके बारे में एक बार किस्सा सुनाया था कि जब तक राजेश खन्ना की चाई जी उनका बस्ता लेने नीचे नहीं आती थीं तब तक वो ऊपर नहीं जाते थे. " जतिन जब स्कूल से लौटता था, तो कहता था चाई जो को नीचे गेट पर बुलाओ. वो मेरा बस्ता उठाएंगी तभी मैं घर जाऊंगा. तब बिल्डिंग में लिफ्ट नहीं थी और चाई जी सीढ़ियां उतरकर उन्हें ले जाने नीचे आती थीं. जतिन की हर जिद को पूरा करने के लिए चाई जी हमेशा तैयार रहतीं."

उन्होंने बताया कि हर फरमाइश पूरी होने की वजह से राजेश खन्ना इतने ज़िद्दी हो गए थे कि कोई ज़िद ने पूरी होने पर रोना शुरू कर देते और जब तब उनकी बात मान नहीं ली जाती, तब तक वो चुप नहीं होते. लेकिन बड़े होने पर इसी राजेश खन्ना ने अपने टैलेंट के बलबूते इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई और बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार बने. हालांकि उनके स्वभाव का वो अक्खड़पन और राजा बाबू वाला अंदाज़ आखिरी समय तक बना रहा और राजा की तरह जीनेवाले राजेश खन्ना ने इस दुनिया से विदा भी राजा बाबू की तरह ही लिया. 

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