रामनवमी पर विशेष- राम की प्रासंग...

रामनवमी पर विशेष- राम की प्रासंगिकता (Ramnavami Special- Ram Ki Prasangikta)

आज रामनवमी के दिन समझें उन रोचक तथ्यों को जो शायद अनजाने हैं. प्रासंगिक संदर्भों में इसकी एक-एक घटना का कारण जानना अति रोचक होगा, यकीन मानिए.

रामचरित मानस और रामायण कालजयी कृतियां हैं. ऐसा क्या है इन कहानियों में कि आज भी कोई ठंडी सांस लेकर जब किसी से अपना दर्द बयां करने को कहता है, तो कहता है सुनाओ अपनी राम कहानी. सच ये कहानी जितनी भावुक है, उतनी ही बौद्धिक भी, जितनी आदर्श लगती है, उतनी ही व्यावहारिक भी. आइए आज रामनवमी के दिन समझें उन रोचक तथ्यों को जो शायद अनजाने हैं. प्रासंगिक संदर्भों में इसकी एक-एक घटना का कारण जानना अति रोचक होगा, यकीन मानिए.
बच्चे अक्सर पूछते हैं कि यदि ये घटनाक्रम विष्णु भगवान ने ख़ुद लिखा था, तो इतना घुमावदार नाटक क्यों लिखा.
तो सुनिए-

पहला प्रसंग
जहां से कहानी शुरू होती है. विश्वामित्र द्वारा यज्ञ रक्षा के लिए राम को मांग कर ले जाना- संकेत है कि कोई भी शिक्षा व्यावहारिक ज्ञान के बिना जिसे आजकल हम ‘अप्रेंटिसशिप’ कहते हैं, अधूरी है.

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दूसरा और तीसरा प्रसंग
शादी करके सीता को एक पत्नीव्रत का वचन देना और सौतेली मां के षडयंत्र द्वारा वन गमन- संकेत है कि बहुविवाह समाज और परिवार के लिए कभी हितकारी नहीं हो सकते. पुरुष अगर इसे अपने विलास का साधन बनाएगा, तो इसका भयंकर दुष्परिणाम भी उसे भुगतना होगा.
वन में विभिन्न ऋषियों से मुलाक़ात और वंचित जनों का सहयोग और संगठन- बताता है कि व्यक्ति को अन्यायी से लड़ने योग्य दक्षता हासिल करने के लिए सुविधाओं का त्याग और तपश्चर्या में लंबा समय व्यतीत करना पड़ता है. संगठन बनने में समय लगता है.
मृग के मायाजाल में फंसना और सीता हरण- चेतावनी है कि सतर्कता कभी छोड़नी नहीं चाहिए. छोटी-सी असावधानी बड़े जोख़िम का कारण बनती है.
बालि का वध, सुग्रीव का साथ और सेतु द्वारा लंका पहुंचना- सिखाता है कि विपत्ति के समय धैर्य न खोकर व्यावहारिक दृष्टि से सोचना-समझना आवश्यक है. और यदि आवश्यक हो जाए, तो विषयांतर लगनेवाले संघर्ष को भी करना पड़ता है. मतलब अपना छोड़ दूसरे का दर्द समझ, उसके लिए सन्नद्ध होना पड़ता है, तभी वो संगठन जुड़ पाता है; जो दमनकारी शक्तियों के विनाश के लिए आवश्यक है.

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साधनहीन होकर साधन सम्पन्न रावण से युद्ध और जीत- बताती है कि लंबे समय तक अनवरत की गई तपश्चर्या एवं सात्विक जीवनयापन के साथ स्वयं को उन्नत करते रहने की कोशिशें सफलता का मूलमंत्र हैं.

– भावना प्रकाश

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Photo Courtesy: Freepik

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