Close

रंग तरंग- ‘मास्क’ है तो मुमकिन है… (Rang Tarang- Mask Hai To Mumkin Hai…)

कान के रास्ते अंदर जाने में कोरोना को क्या प्रॉब्लम है, इस पर रिसर्च की ज़रूरत है. मेरे ख़्याल से, नाक और मुंह के रास्ते में तमाम ख़तरे हैं. आदमी दाल-रोटी के साथ कोरोना को भी खा जाएगा. नाक में और भी ख़तरा है, आदमी ने छिनका, तो मलबा के साथ कोरोना की पूरी कॉलोनी दलदल में गाना गाती नज़र आएगी, "ये कहां आ गए हम, सरे राह चलते-चलते…" फिर भी कोरोना है कि मानता नहीं.

मेट्रो रेल बंद होने के बाद आज पहली बार मेट्रो का सफ़र किया, मज़ा आ गया. डीएमआरसी ने सीटों को कोरोना की सहूलियत के हिसाब से अरेंज किया है. एक सीट छोड़कर बैठने की व्यवस्था की गई है. (ताकि बीच में कोरोना के बैठने की सहूलियत रहे!) कोरोना चलने-फिरने में चूंकि लाचार होता है, इसलिए उसकी संख्या और विकलांगता को देखते हुए हर डिब्बे में उसकी सीटें सुरक्षित की गई हैं. डीएमआरसी हर स्टेशन के इंट्री गेट पर यात्री के हाथ का टेंप्रेचर जांच कर उसे कोरोन फ्री मान लेती है. अब अगर कोरोना यात्री के पीठ पर बैठकर अन्दर आ गया, तो ये कोरोना की ग़लती है, डीएमआरसी की नहीं.
अंदर मेट्रो ट्रेन ख़ाली सी लगी. मेट्रो के नए नियम और कोरोना के खौफ़ ने सूरत ही बदल रखा है. अगर सांसों के आवागमन से परेशान होकर किसी ने फेस मास्क उतार दिया, तो बगल बैठा यात्री घबरा जाता है. ऐसा लगता है गोया सारा कोरोना सिर्फ़ मुंह के रास्ते अंदर जाने का इंतज़ार कर रहा हो. (मुंह के अलावा और कहीं से जाना ही नहीं चाहता) फेस मास्क के बावजूद दोनों कान खुले होते हैं, मगर उधर से जाने के लिए कोरोना है कि मानता नहीं. कान के रास्ते अंदर जाने में कोरोना को क्या प्रॉब्लम है, इस पर रिसर्च की ज़रूरत है. मेरे ख़्याल से, नाक और मुंह के रास्ते में तमाम ख़तरे हैं. आदमी दाल-रोटी के साथ कोरोना को भी खा जाएगा. नाक में और भी ख़तरा है, आदमी ने छिनका, तो मलबा के साथ कोरोना की पूरी कॉलोनी दलदल में गाना गाती नज़र आएगी, "ये कहां आ गए हम, सरे राह चलते-चलते…" फिर भी कोरोना है कि मानता नहीं.
फेस मास्क की आड़ में पुलिसवाले आत्मनिर्भर होने में लगे हैं. जैसे-जैसे कोरोना का ग्राफ गिर रहा है, प्राइवेट अस्पताल और पुलिस की बैचैनी बढ़ रही है. ट्रैफिक पुलिस आपके स्वास्थ्य को लेकर कितनी चिंतित है, इसका पता मुझे कल चला, जब चलती कार के ठीक सामने आकर पुलिसवाले ने मेरे दोस्त की गाड़ी रोककर फेस मास्क चेक किया. सबके चेहरे पर मास्क पाकर उसके चेहरे पर जो निराशा मैंने देखी, तो ऐसा लगा गोया अभी-अभी उसका टाइटेनिक जहाज़ डूबा हो. जनता के स्वास्थ्य को लेकर पुलिस की इतनी चिंता और बेचैनी कभी देखी नहीं. फेस मास्क के बगैर चेहरा तुम्हारा.. वसूली हमारा.. मिले सुर मेरा तुम्हारा…
मुझे कोरोना के कैरेक्टर पर शुरू से ही डाउट रहा है, चीन से आए माल का क्या भरोसा. लगता है साले चीन ने कोरोना को सिखा-पढ़ाकर भेजा है कि फेस मास्क के बगैर मानना मत, कम्पनियों से हमारी डील हो चुकी है. फेस मास्क देखते ही पतली गली से निकल लेना, पापी पेट का सवाल है.. आजकल वैसे भी इंडियावाले हमारे पेट पर लात मार रहे हैं. दो लोगों के बीच की खाली सीट पर मरणासन्न अवस्था में लेटा कोरोना दो लोगों की बात सुनकर अपना बीपी बढ़ा रहा है, "ये साला मनहूस कब दफ़ा होगा इंडिया से?"
"बिहार का चुनाव हो जाने दो, फिर इसी का लिट्टी-चोखा खाएंगे. वैसे भी चाइनीज़ माल की होली तो जलानी तय है."
"इस वायरस का फेस मास्क से क्या लेना-देना है?"
"वो कहावत तो सुनी होगी, मुंह लगना. गंदे लोग हमेशा मुंह लगने के फ़िराक़ में रहते हैं, इसलिए हमने मुंह पर फेस मास्क लगा लिया है. वैसे, मैं तो चाहता हूं कि ये मरदूद एक बार घुसे तो सही मुंह के अंदर."
"फिर तो बहुत बुरा हाेगा."
"वही तो! रोटी-रोज़ी की तलाश में भटक रहे इन्सान के लिए दस रुपए का फेस मास्क भी भारी पड़ रहा है. भूख और ग़ुस्से की आग में उसकी आंतें नाग की तरह फनफना रही हैं. एक बार कोरोना अंदर गया कि भूखे इन्सान ने डकार मारी. कोरोना की पूरी कॉलोनी एक बार में 'स्वाहा '.. देख रहे हो कि पिछले दस दिन में कोरोना की आबादी कितनी घटी है?"
"हां, सर्दियों में भूख बहुत लगती है."
कोरोना अगले स्टेशन पर उतरकर अपनी फैमिली की गिनती करने लगा.

Sultan Bharti
सुल्तान भारती


यह भी पढ़ें: व्यंग्य- एक्ट ऑफ गॉड (Satire- Act Of God)

Mask Hai To Mumkin Hai

Share this article