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रंग-तरंग- बीवी के अपहरणकर्ताओं सावधान! (Satire- Biwi Ke Apaharankartaon Sawdhan!)

"क्यों जी, अभी तक मुझे लेने के लिए क्यों नहीं आए? तुम्हें मेरी कोई चिंता है या नहीं. कल एक तारीख है. वेतन मिल जाए तो संभाल कर रखना. लौटते ही हिसाब लूंगी. काम वाली बाई को ज़्यादा देर तक मत रोकना. पड़ोसन के यहां खाना खाने मत जाना. वह बड़ी चुड़ैल है. मेरी साड़ी ड्राईक्लीन में दे देना, मेरी सहेलियों से फोन पर ज़्यादा बातें मत करना. और हां, मुझे छुड़ाने के लिए रकम लाने की ज़रूरत नहीं. अपहरणकर्ता कुछ दिनों में ख़ुद ही पस्त हो जाएंगे.

शर्मा जी अपनी पत्नी के साथ साथ बाज़ार से लौट रहे थे. वे स्कूटर पर सवार थे. श्रीमती शर्मा के ख़रीदे गए सामानों से लदा स्कूटर चलता-फिरता बाज़ार नज़र आ रहा था. मिसेस शर्मा ख़ूब शॉपिंग करती थीं, जिसे देखकर लोगों को लगता था कि वे बहुत पैसे वाले हैं. शर्मा जी जैसे ही सुनसान चौराहे पर पहुंचे, कुछ अपहरणकर्ताओं (किडनैपर्स) ने  उन्हें घेर लिया. शर्मा जी को बिना नुक़सान पहुंचाए छोड़ दिया, लेकिन श्रीमती शर्मा को उन्होंने किडनैप कर लिया. शर्मा जी ने अपहरणकर्ताओं का ज़रा भी विरोध नहीं किया. विरोध करते भी क्यों? इतनी बड़ी बला जो सिर से टल रही थी. अपहरणकर्ता श्रीमती शर्मा को लेकर ठीक से भाग भी नहीं पाए थे, उससे पहले ही शर्मा जी स्कूटर से फरटि से निकल पड़े.

घर पहुंचने तक रात हो गई. शर्मा जी ने बढ़िया खाना खाया और चैन की नींद सो गए. रात को लगभग बारह बजे फोन की घंटी बजी, बरसों बाद वे निश्चिंत होकर चैन की नींद का आनंद ले रहे थे. फोन की घंटी सुनकर वे भांप गए कि ज़रूर अपहरणकर्ताओं का फोन होगा. जैसे ही उन्होंने फोन उठाया, उधर से अपहरणकर्ताओं की आवाज़ आई, "हेलो मि. शर्मा, हमने तुम्हारी बीवी को किडनैप कर लिया है. यदि आप उसे वापस चाहते हो, तो रात दो बजे दो लाख रुपए लेकर लाल बंगले के खंडहर के पीछे झाड़ी में आ जाना. लाल छड़ी में लाल रुमाल लगाकर हम संकेत देंगे तो रुपए भरा सूटकेस वहां छोड़ जाना. हां, एक बात ग़ौर से सुन लो, पुलिस को सूचना बिल्कुल मत देना, वरना तुम्हारी बीवी की गर्दन कलम कर दी जाएगी. यह जान लो कि हमारी पहचान लाल रंग से है. लाल बंगला, लाल छड़ी, लाल रुमाल और याद रखो खून का रंग भी लाल ही होता है."

शर्मा जी ने मज़ा लेते हुए कहा, "जियो मेरे लाल. अरे दो लाख क्या, मैं तीन लाख रुपया दूंगा तुम्हें, लेकिन प्लीज़, मेरी बीवी को मत लौटाना. मैं मुसीबतों से दूर ही रहना चाहता हूं. चाहे इसके लिए मुझे कितनी ही बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े."

अपहरणकर्ता लफड़े में पड़ गए किसी की बीवी का अपहरण करना कहीं उन्हें भारी न पड़ जाए. उन्होंने शर्मा जी को द्रवित करने के लिए श्रीमती की आवाज़ सुनाते हुए कहा, "शर्मा जी अपनी बीवी की आवाज़ सुन लो. वह बहुत तकलीफ़ में है. अगर तुमने रकम नहीं दी तो उसकी जान भी जा सकती है."

मिसेज शर्मा ने लपककर रिसीवर पकड़ा और शर्मा जी पर बरस पड़ीं, "क्यों जी, अभी तक मुझे लेने के लिए क्यों नहीं आए? तुम्हें मेरी कोई चिंता है या नहीं. कल एक तारीख है. वेतन मिल जाए तो संभाल कर रखना. लौटते ही हिसाब लूंगी. काम वाली बाई को ज़्यादा देर तक मत रोकना. पड़ोसन के यहां खाना खाने मत जाना. वह बड़ी चुड़ैल है. मेरी साड़ी ड्राईक्लीन में दे देना, मेरी सहेलियों से फोन पर ज़्यादा बातें मत करना. और हां, मुझे छुड़ाने के लिए रकम लाने की ज़रूरत नहीं. अपहरणकर्ता कुछ दिनों में ख़ुद ही पस्त हो जाएंगे. मैं उनके छक्के छुड़ा दूंगी. कुछ समय ज़रूर लगेगा. लेकिन घबराना मत. मैं जल्दी ही लौट आऊंगी."

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श्रीमती शर्मा ने एक साथ इतनी सारी बातों की झड़ी लगा दी. शर्मा जी ने उनकी पूरी बात इस कान से सुनकर उस कान से निकाल दिया. अपहरणकर्ताओं की धमकी तथा बीवी की डांट का उन पर ज़रा भी असर नहीं हुआ, वे बेफ़िक्री से रहने लगे.

उधर अपहरणकर्ता परेशान थे. पूरे पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी शर्मा जी ने कोई खोज-ख़बर नहीं ली. अपहरणकर्ताओं ने मजबूरन पुनः फ़ोन लगाया. शर्मा जी एकदम बरस पड़े, "कैसे धोखेबाज हो तुम लोग? आज तक कोई पैसे लेने नहीं आया. मुझे तो हमेशा भय बना रहता है कि कहीं तुम लोग मेरी बीवी वापस न कर जाओ."

अपहरणकर्ता उधर उनकी बीवी से परेशान हो चुके थे. दिनभर उनके चाय, नाश्ते, खाने और तरह-तरह की फ़रमाइश पर उनके काफ़ी पैसे ख़र्च हो चुके थे. फ़रमाइश में कमी होने पर वह शोर मचाती थीं. पुलिस को बता देने की धमकी देती थीं. कुछ दिनों के बाद श्रीमती शर्मा ने उन्हें धमकी दी, "यदि शीघ्र तुम लोगों ने मुझे मेरे पति को नहीं लौटाया तो तुम चारों में से किसी एक के साथ जबरन शादी कर लूंगी."

इस धमकी से चारों अपहरणकर्ता चिंतित हो गए. उन्होंने शर्मा जी को फिर फोन लगाया, "मि. शर्मा, हमें नहीं चाहिए अब फिरौती की रकम. अब तुम अपनी पत्नी को मुफ़्त में ले जा सकते हो."

शर्मा जी उखड़ गए, "अरे लौटाना ही था तो लेकर क्यों गए थे? अब तुम लोग ही रखो उसे अपने पास."

अपहरणकर्ताओं को गहरा दुख हुआ. श्रीमती शर्मा से पिंड छुड़ाने का उन्हें कोई उपाय नहीं सूझ रहा था. एक सप्ताह और बीत गया. श्रीमती शर्मा के इंतज़ाम में उनका काफ़ी ख़र्च हो रहा था. अंततः श्रीमती शर्मा ने ही उन्हें एक तरक़ीब सुझाई, "अब एक ही उपाय है. शर्मा जी बड़े लालची आदमी हैं. फोकट में कोई बात नहीं मानते. मैं उनकी नस-नस पहचानती हूं. आप लोग उन्हें ४०-५० हज़ार रुपए का लालच दो तो वे मान जाएंगे. लौटने के बाद दस-पंद्रह हज़ार की मदद मैं भी कर दूंगी."

अपहरणकर्ताओं को उनकी सलाह अच्छी लगी. उन्होंने मि. शर्मा को फ़ोन लगाया, "हेलो मि. शर्मा, हम तुम्हें ५० हज़ार रुपए देने को तैयार हैं. तुम अपनी बीवी को वापस ले जाओ, वरना हम ख़ुद  ही पुलिस के सामने आत्म-समर्पण कर देंगे."

शर्मा जी ने कहा, "अच्छा मज़ाक करते हो. बीवी को वापस प्राप्त करना कोई हंसी-खेल है क्या? मुझे तुम लोगों ने इतना सस्ता बना लिया. मैं साफ़ कहता हूं कि एक लाख रुपए से एक कौड़ी भी कम नहीं लूंगा. ख़बरदार, जो तुम लोगों ने पुलिस में आत्मसमर्पण किया तो. तुम लोगों में से किसी एक को अपनी बीवी का पति साबित कर दूंगा. फिर ज़िंदगीभर तुम्हें पछताना पड़ेगा." अपहरणकर्ता एक लाख रुपए जुटाने की तैयारी करने लगे. उन्हें अपनी बीवी के गहने गिरवी रखने पड़े. बड़े परिश्रम से एक लाख रुपए की व्यवस्था हो पाई. एक किराए की टैक्सी में श्रीमती शर्मा और एक लाख रुपए लेकर वे शर्मा जी के घर पहुंचे. उनके घर पहुंचने पर जानकारी मिली कि शर्मा जी ने अपनी बीवी के लौट आने के डर से शहर छोड़ दिया है और किसी अज्ञात शहर में जाकर नया व्यवसाय शुरू कर लिया है. अपने पड़ोसियों को भी पता ठिकाना नहीं बताया.

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अपहरणकर्ता अड़ोस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ करने लगे. श्रीमती शर्मा के लौट आने की बात पूरी कॉलोनी में तुरंत फैल गई. उस कॉलोनी के सभी पति एकत्र हो गए. सभी पतिगण अपहरणकर्ताओं का स्वागत करने लगे और उनसे कानाफूसी करने लगे. उन्हें कोने में ले जाकर अपनी-अपनी बीवी का अपहरण करवाने का सौदा करने लगे. कोई दो लाख देने को तैयार था, कोई तीन लाख, कोई चार लाख, कोई पांच लाख बोली लगने लगी.

मछली बाज़ार की तरह शोरगुल होने लगा, लेकिन अपहरणकर्ता अब किसी पति की मुसीबत किसी भी क़ीमत पर अपने सिर नहीं लेना चाहते थे. वो चिल्लाने लगे, "बचाओ, बचाओ." आवाज़ सुनकर पुलिस पहुंच गई. उन्हें जब सारा माजरा पता लगा तो उन्होंने अपहरणकर्ताओं से कहा, "चुपचाप मेरी बीवी का अपहरण कर ले जाओ, वरना ऐसा केस बनाऊंगा कि ज़िंदगीभर जेल में सड़ते रह जाओगे." भयभीत अपहरणकर्ताओं को अंततः पुलिस की बीवी के अपहरण का सौदा मंज़ूर करना पड़ा. वे बड़बड़ाने लगे, "भ्रष्टाचार कितना बढ़ गया है! दस-बीस हज़ार लेकर मामला निपटा देते तो कोई बात नहीं. लेकिन इन पुलिसवालों ने उनके गले में अपनी बीवी का फंदा डालकर आजीवन क़ैद की सज़ा दिलवा दी. उससे तो जेल की चक्की पीस लेना ठीक था."

उन्हें बीवी का अपहरण करने के सौदे पर पछतावा होने लगा. प्रायः किसी के बच्चे, पति, माता-पिता का अपहरण किया जाता है, उन अपहरणकर्ताओं का सिर फिरा था, जो उन्होंने किसी की बीवी का अपहरण किया. इसलिए बीवी के अपहरणकर्ताओं सावधान!

- अरविंद मिश्र

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