ज़्यादा नमक खाने के साइड इफेक्ट्स ( Side Effects Of Consuming Too Much Salt)

कितना नमक है ज़रूरी?
एडल्ट के लिए रोज़ाना एक ग्राम नमक काफ़ी है और बच्चों को तो उससे भी कम नमक (Side Effects Of Salt) की ज़रूरत होती है. लेकिन रिसर्च के अनुसार हम 8.1 ग्राम नमक रोज़ खाते हैं, जो हमारी शरीर की ज़रूरत से बहुत ज़्यादा है. ज़्यादा नमक खाने की हमारी यही आदत हमें कई बीमारियों के रिस्क ज़ोन में पहुंचा देती है.

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नमक के साइड इफेक्ट्स
थोड़ी मात्रा में नमक का सेवन हमारी हेल्थ के लिए ज़रूरी है, लेकिन नमक का ज़्यादा सेवन कई बीमारियों(Side Effects Of Salt) की वजह भी बन सकता है.
ब्लड प्रेशरः हालांकि हाई ब्लड प्रेशर के कई और भी कारण होते हैं, जैसे- असंतुलित लाइफस्टाइल, मोटापा, एक्सरसाइज़ न करना, ग़लत खान-पान. पर ़ज़्यादा नमक का सेवन भी हाई ब्लड प्रेशर के लिए ज़िम्मेदार है.

नसों को भी होता है नुक़सानः ज़्यादा नमक के सेवन से नसों को भी नुक़सान होता है. ज़्यादा नमक से यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाता है, जिससे जोड़ों और नसों में दर्द बढ़ जाता है. इतना ही नहीं, यूरिक एसिड बढ़ने से यूरिन में एल्ब्यूमिन आने लगता है. अमेरिकन हार्ट जर्नल में छपी रिपोर्ट के अनुसार, जो जितना अधिक सोडियम का सेवन करता है, उसके यूरिक एसिड और एल्ब्यूमिन के बढ़ने की आशंका उतनी ही ज़्यादा होती है.

अस्थमाः अस्थमा एक आम तकलीफ़ है. हर 11 बच्चों में से एक बच्चा और 12 एडल्ट में से एक एडल्ट अस्थमा से पीड़ित है. हालांकि ज़्यादा नमक खाना अस्थमा की वजह नहीं है, लेकिन रिसर्च से साबित हो चुका है कि ज़्यादा नमक के सेवन से अस्थमा की तकलीफ़ बढ़ जाती है. अस्थमा के मरीज़ अगर नमक का सेवन कम कर दें, तो उन्हें राहत ज़रूर मिलेगी.

डायबिटीज़ः पिछले कुछ सालों में डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है. नमक का सेवन(Side Effects Of Salt) ब्लड प्रेशर बढ़ाकर डायबिटीज़ के रिस्क को बढ़ा सकता है. जिन लोगों को डायबिटीज़ है, वो खाने में नमक की मात्रा कम करके ब्लड प्रेशर को हेल्दी रेंज में रख सकते हैं, जिससे डायबिटीज़ के रिस्क को भी कम किया जा सकता है.

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हार्ट के लिए भी ख़तराः हार्ट एक्सपर्ट हमेशा से ही ये सलाह देते रहते हैं कि हेल्दी हार्ट के लिए खाने में नमक की मात्रा कम करें. अमेरिका में हुए शोध से पता चला है कि जो लोग रोज़ ज़रूरत से ज़्यादा नमक खाते हैं, उसका सीधा असर उनकी उम्र पर पड़ता है और उन्हें दिल की बीमारियां होने लगती हैं, शोध के अनुसार, अधिक नमक के सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा 200 प्रतिशत बढ़ जाता है.

स्ट्रोकः ब्रेन स्ट्रोक के लिए ब्लड प्रेशर सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है और नमक का सेवन ब्लड प्रेशर के रिस्क को बढ़ाता है. इस तरह नमक का सेवन अप्रत्यक्ष रूप से स्ट्रोक के लिए ज़िम्मेदार होता है. स्ट्रोक के ख़तरे से बचना है, तो एक्सरसाइज़ और हेल्दी ईटिंग हैबिट्स के साथ ही नमक खाना भी कम कर दें.

ऑस्टियोपोरोसिसः नमक और हाई ब्लड प्रेशर का गहरा संबंध है और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ के यूरिन से कैल्शियम ज़्यादा निकलता है, जिससे उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है. ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए कैल्यिशम और विटामिन डी की उचित मात्रा ज़रूरी है. ज़्यादा नमक खाने से कैल्शियम लॉस बहुत जल्दी होता है, जिससे हड्डी संबंधी प्रॉब्लम्स होने लगती हैं.

कोरोनरी हार्ट डिसीज़ः हाई ब्लड प्रेशर कोरोनरी हार्ट डिसीज़ का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है. चूंकि नमक से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, तो कोरोनरी हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. यानी नमक का सेवन(Side Effects Of Salt) कम करके आप कोरोनरी हार्ट डिसीज़ के ख़तरे को कम कर सकते हैं.

पेट का कैंसरः ज़्यादा नमक का सेवन पेट के कैंसर के रिस्क को बढ़ा देता है. एच पाइलोरी पेट के कैंसर का मुख्य रिस्क फैक्टर है. इससे पेट में इंफ्लेमेशन बढ़ता है, जिससे अल्सर और कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है. पेट में एच पाइलोरी की मौजूदगी पेट को नुक़सान नहीं पहुंचाती, लेकिन नमक का अधिक सेवन बैक्टीरियम के ग्रोथ को बढ़ा सकता है, जिससे कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है. यदि पेट के कैंसर से बचना चाहते हैं तो अन्य रिस्क फैक्टर्स के अलावा नमक से भी परहेज़ करें.

वॉटर रिटेंशनः नमक ज़्यादा खाने से वॉटर रिटेंशन की भी प्रॉब्लम हो जाती है. अगर आप भी ब्लॉटिंग महसूस कर रहे हैं, तो बस नमक खाना(Side Effects Of Salt) कम कर दें. आप तुरंत हल्का-फुल्का महसूस करने लगेंगे. इतना ही नहीं, वॉटर रिटेंशन कम होने से आपका वज़न भी कम होने लगेगा.

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अरविंद तिवारी