स्मार्टफोन आंखों के लिए है हानिकारक (Smartphone Overuse May Damage Your Eyes)

दिन-रात फोन से चिपके रहने की आदत भले ही आपको दूर-दराज़ बैठे लोगों से जोड़ रही हो, लेकिन ये आपकी आंखों की सेहत बड़ी तेज़ी से बिगाड़ रहा है. आंखों का एकटक मोबाइल फोन पर टिके रहना, उसकी सेहत को डैमेज कर रही है. आइए, हम आपको बताते हैं कि कैसे मोबाइल फोन बहुत स्मार्टली आपकी आंखों को ख़राब कर रहा है. स्मार्टफोन की स्क्रीन आंखों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है. स्मार्टफोन के आने से आंखों की परेशानी में इज़ाफ़ा हुआ है. नई-नई तरह की बीमारियां सुनने और देखने को मिल रही हैं.

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रेटिना पर अटैक

रात में जब आप अपना फोन यूज़ करते हैं, तो उससे निकलनेवाली लाइट सीधे रेटिना पर असर करती है. इससे आपकी आंखें जल्दी ख़राब होने लगती हैं. देखने की क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है.

ड्राईनेस

दिनभर काम करते रहने से आंखों को आराम नहीं मिलता, ऐसे में रात में भी सोने की बजाय फोन पर देर तक बिज़ी रहना आंखों को ड्राई कर देती है. इससे आंखों में खुजली और जलन होने लगती है. लगातार ऐसा करने से आंखों की अश्रु ग्रंथि पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

आईसाइट डैमेज

क्या आप जानते हैं कि स्मार्टफोन हमेशा के लिए आंखों की रोशनी छीन सकता है? जी हां, कई शोधों में ये बात साबित हो चुकी है. फोन से निकलनेवाली ब्लू लाइट (कएत श्रळसहीं) आंखों को पूरी तरह से डैमेज कर सकती है.

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आंखों से पानी गिरना

घंटों स्मार्टफोन से चिपके रहने से आंखों से पानी गिरने लगता है. ऐसा मोबाइल से निकलनेवाली किरणों के कारण होता है. लगातार मोबाइल पर देखते रहने से पलकों का झपकना लगभग कम हो जाता है. इससे आखों को आराम नहीं मिलता और आंखों से पानी गिरने लगता है.

चश्मा लगना

ये मोबाइल फोन आपको भले ही सोशल साइट्स से जोड़कर सुकून पहुंचाते हों, लेकिन आपकी आंखों पर जल्द ही चश्मा चढ़ा देते हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे आंखों का नंबर बढ़ने लगता है और पतला चश्मा मोटा होने लगता है. कुछ सालों के बाद आपको आंखों का ऑपरेशन तक करवाना पड़ सकता है.

पुतलियों का सिकुड़ना

स्मार्टफोन का अधिक उपयोग करने से न केवल पलक झपकाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, बल्कि आंखों की पुतलियां भी सिकुड़ने लगती हैं. आंखों की नसें सिकुड़ने लगती हैं. इससे आंखों की रोशनी के साथ सिरदर्द की समस्या भी होने लगती है.

आंखों का लाल होना

लगातार फोन की स्क्रीन पर देखते रहने से आंखों का स़फेद भाग लाल होने लगता है. आईड्रॉप डालने से भी ये समस्या कम नहीं होती. लाल होने के साथ ही आंखें हमेशा सूजी हुई भी लगती हैं.

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टेंपरेरी ब्लाइंडनेस

लगातार फोन की तरफ़ देखने से जब अचानक आप कहीं और देखते हैं, तो कुछ देर के लिए सब ब्लैक दिखता है. आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है. यह आपकी आंखों के लिए अच्छा संकेत नहीं है.

धुंधला दिखना

स्मार्टफोन का अधिक उपयोग आपको इतना नुक़सान पहुंचाता है कि आपको धुंधला दिखने लगता है. अंग्रेज़ी में इसे ब्लर्ड विज़न कहते हैं. यह प्रक्रिया आगे चलकर गंभीर हो जाती है और आपको दिखने में समस्या होने लगती है

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कैसे बचें?

अगर आप चाहते हैं कि आपकी आंखें ख़राब न हों, तो आप नीचे दिए गए सुझावों को अपनाएं.

दूरी मेंटेन करें

आप अचानक तो फोन का यूज़ करना बंद या कम नहीं कर सकते. ये सच भी है लेकिन फोन को आंखों से दूर रखकर कुछ हद तक आंखों को सेफ रख सकते हैं. जब भी फोन यूज़ करें इस बात का ज़रूर ध्यान रखें कि फोन आंखों के बेहद क़रीब न हो.

20 सेकंड का ब्रेक

दिनभर ऑफिस में कंप्यूटर पर काम करने के बाद वैसे ही आपकी आंखें थक जाती हैं. ऐसे में फोन की स्क्रीन से चिपके रहने पर आंखों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. जब भी फोन इस्तेमाल करें, तब हर 20 मिनट के बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें. यह ब्रेक आंखों को रिलैक्स करेगा.

नो नाइट वॉच

क्या आपको नहीं लगता कि रात सोने के लिए बनी है. दिनभर काम और रात को फोन पर चैटिंग, वीडियो वॉचिंग आदि आपको कितना थका देता है. ख़ुद ही एक लिमिट तय करें. रात में एक समय के बाद फोन यूज़ न करें. देर रात तक फोन यूज़ करने से नींद ख़राब होती है और बाद में ये आदत-सी हो जाती है. इससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल, पफनेस आदि होने के साथ आईसाइट पर भी बुरा असर होता है.

लाइट कम करें

शुरुआत में फोन की लत से बचना बहुत मुश्किल है. हां, धीरे-धीरे इस आदत को आप कम कर सकते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि फोन यूज़ करते समय फोन की ब्राइटनेस कम करें. इससे आंखों पर प्रेशर कम पड़ेगा.

– श्‍वेता सिंह

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