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सब्जी बेची, कड़िया का काम किया, कई दिनों तक भूखे सोए, चाय की दुकान पर मजदूरी की… मेरी सहेली पॉडकास्ट में सुनील पाल ने याद किया स्ट्रगल के दिन (Sold vegetables, slept on footpath, working as a labourer at a tea stall… Sunil Pal remembers his struggle days in the Meri Saheli podcast)

कॉमेडियन सुनील पाल (Sunil Pal) ने फ़िल्म इंडस्ट्री और टीवी पर खूब काम किया है. द ग्रेट इंडिया लाफ्टर चैलेंज (The great indian laughter challenge) के विनर रह चुके सुनील पाल ने अपनी कॉमेडी से लोगों को खूब हंसाया है और कॉमेडी की दुनिया में अपना एक मकाम बनाया है, लेकिन यहां तक की उनकी जर्नी इतनी आसान नहीं रही है. उन्हें बहुत स्ट्रगल करना पड़ा है. हाल ही में मेरी सहेली पॉडकास्ट (Meri Saheli podcast) में बतौर गेस्ट पहुंचे सुनील पाल ने पहली बार अपने बचपन के बारे में बात (Sunil Pal remembers his struggle days) की और बताया कि पिता के शराबी होने की वजह से उनका बचपन किस तरह बेहद मुश्किलों में बीता.

Sunil Pal

पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

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शराबी थे पिता, मां को और हमें बहुत पीटते थे

Sunil Pal

सुनील पाल (Sunil Pal) ने बताया, "मेरी पिताजी रेलवे में थे, लेकिन बहुत ज़्यादा शराब पीते थे. शराब पीकर हमें बहुत मारते थे. मां को भी बहुत पीटते थे. इसलिए बचपन बहुत मुश्किल में बीता. वो अपनी पूरी कमाई शराब में ही उड़ा देते थे. हम भूखे रहते थे, पढ़ाई के पैसे नहीं थे, पहनने को कपड़े नहीं थे. किसी ने खिला दिया, किसी ने कपड़े दे दिए. कहीं भी रह लिए. स्कूल में किसी को खाते देखता था तो उनसे मांगकर रोटी खा लेता था. बिल्कुल भिखारियों वाली ज़िंदगी जीनी पड़ती थी."

स्कूल में रोटी मांगकर खा लेता

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"मां को बाहर जाकर काम करने की परमिशन नहीं थी तो मुझे बचपन से काम करना शुरू करना पड़ा. कड़िया का काम करता था. सब्ज़ी मार्केट में लोगों के लिए काम कर देता था. वहां तो सब्ज़ियां बच जातीं वो घर लेकर जाता था. दाल मिल में भी काम किया. जब मुंबई आया तो यहां तो कोई सहारा था नहीं. तो एक चाय के दुकान पर नौकरी कर ली. फुटपाथ पर रहता था. तीन साल फुटपाथ पर ही रहा. फिर धीरे धीरे सब ठीक होता गया."

शिकायत नहीं ज़िंदगी से

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हालांकि सुनील पाल इसके लिए किसी को दोष नहीं देते. उनका कहना है, उनकी किस्मत में यही लिखा था और जो लिखा था वो मिला. उन्हें अपने पिता से भी कोई शिकायत नहीं. वो कहते हैं, 'उन्होंने जो भी किया, नशे में किया.' इनफैक्ट सुनील पाल को अफसोस है कि उनके पिता ज़्यादा दिनों तक उनके अच्छे दिनों का सुख नहीं देख पाए, क्योंकि लाफ्टर जीतने के दो साल बाद ही उनका निधन हो गया था.

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पॉडकास्ट में सुनील पाल ने अपनी लाइफ जर्नी, स्ट्रगल, करियर सहित और भी कई मुद्दों पर खुलकर बात की है.

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