ज़िंदगी में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिनसे हम डरते भी है, पर उत्सुकता भी बनी रहती है कि आख़िर यह कितना सच है?.. ऐसा ही रहा है आत्मा, भूत-प्रेत, चुड़ैल आदि से जुड़ी घटनाएं.
क्या आत्मा बातें करती हैं? वे तड़पती हैं.. किसी से प्रतिशोध लेती हैं... जैसी रोंगटे खड़ी कर देनेवाली बातों के बारे में जानेंगे मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में, जो हैरान करने के साथ दिलोदिमाग़ में सिहरन भी पैदा कर देती है. पूरा पॉडकास्ट देखने-सुनने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
हम सभी अपने बचपन से लेकर पूरी ज़िंदगी कई ऐसी बातों से दो-चार होते हैं, जो सुनने में मज़ेदार लगती हैं, पर अनुभूति होने पर पूरे अस्तित्व को हिलाकर रख देती है. जी हां, आत्माओं के बारे में बात कर रहे हैं. प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक इस हमेशा से ही ढेर सारी बातें होती रही हैं. कई ऐसे तथ्यों को भी उजागर किया गया कि हां, आत्मा होती है, बस वो आपके गहरे जुड़ाव व महसूस करने पर है. लेकिन इसमें कितनी सच्चाई और कितनी कहानियां हैं, इसके बारे में तो फिल्म इंडस्ट्री को मास्टरी हासिल है. हिंदी-अंग्रेज़ी ही नहीं तमामा दुनियाभर की भाषाओं में बनी फिल्मों में आत्माओं के बारे में बहुत कुछ कहा, देखा और सुना गया है. हर फिल्म अपने को अलग तरह से जस्टिफाई करती है, फिर चाहे वो आत्मा, कौन, काल, स्त्री, भुल-भुलैया, शैतान जैसी फिल्में हो या फिर रामसे ब्रदर्स की पुराना मंदिर, दरवाजा जैसी हॉरर मूवी. हर फिल्ममेकर ने कितने ही फिल्मों में आत्माओं को लेकर सवालिया निगाह के साथ अंत में प्रश्नचिह्न ज़रूर लगा दिया.
बच्चे, बड़े हों या बुज़ुर्ग आत्माओं, भूत-शैतान से जुड़ी फिल्म उन्हें भयभीत करने के साथ उत्साहित और रोमांचित ज़रूर करती हैं. यही वजह रही है कि हर दौर में इस तरह की ढेर सारी फिल्में बनीं. प्रोड्यूसर-डायरेक्टर को भी इस विषय पर जुआ खेलना पसंद भी है. क्यों न हो जब श्रद्धा कपूर-राजकुमार अभिनीत ‘स्त्री’ जैसी फिल्में सुपर-डुपर हिट हो जाती हैं तब अन्य निर्माताओं को भी हौसला मिल जाता है इस सब्जेक्ट पर फिल्म बनाने का. कुछ निर्देशक तो इस पर प्रयोग भी ख़ूब करते हैं. परी, तुम्बाड, बुलबुल, लुप्त, 13 बी, राज़, रागिनी एमएमएस जैसी फिल्में इसी में शुमार होती हैं.
आत्माओं से जुड़ी फिल्मों की ़फेहरिस्त तो बहुत लंबी है, लेकिन आज भी यह सवाल ज्यों का त्यों बरक़रार है कि आत्म से बातें करना कहां तक जायज़ है. ज्योतिष शास्त्र हो, टैरो रीडर हो या फिर मनोविज्ञान के जानकर हर किसी की अपनी-अपनी थ्योरी है इस पर. एक तबका इस बात को लेकर श्योर है कि यह अकाट्य सत्य है, बस ज़रूरत है आपका ऑरा उस लेवल का हो तब ही आप उस स्थिति तक पहुंच सकते हैं. लेकिन इसके ठीक विपरीत एक वर्ग ऐसा भी है जो इसे कोरी भावुकता कहता है या फिर आप कह सकते हैं इमोशनल ब्लैकमेल करना. अब इन सब कहानियों में कितना हक़ीक़त है और कितनी सुनी-सुनाई अनकही सच्चाइयां, यह तो शोध का विषय है, पर फिर भी आत्माओं से जुड़ी बातें जिज्ञासा और दिलचस्पी ज़रूर पैदा कर देती हैं. आपको इसी सफ़र पर ले चलता है मेरी सहेली का लेटेस्ट यह पॉडकास्ट जिसके बारे में शुरुआत में हमने ज़िक्र किया है. तो देर किस बात की कुछ अनकही-अनसुनी बातों से रू-ब-रू हुआ जाए मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में. आपकी प्रतिक्रियाओं का हमें इंतज़ार रहेगा. शेष फिर...
