बच्चे को डांटें नहीं हो जाएगा बीमार (Yelling On Your Child Can Make Him/Her Fall Sick)

Yelling On Your Child Can Make Him/Her Fall Sick

अगर पैरेंट्स चाहते हैं कि बच्चे की सेहत दुरुस्त रहे, तो उसे डांटें कतई मत. अगर आप बच्चे को डांटेंगे, तो उसकी सेहत ख़राब हो जाएगी और बड़ा होने पर भी वह बीमार रहेगा. यानी बच्चे को तंदुरुस्त देखने के अभिलाषी माता-पिता को उसके साथ बहुत अच्छा व्यवहार करना होगा. जब पैरेंट्स बच्चे के साथ हमेशा अच्छी तरह पेश आएंगे और उसके साथ मधुर संबंध कायम करेंगे, तो यक़ीन मानिए, बच्चा ख़ुश और तंदुरुस्त होगा.

बच्चों का स्वास्थ्य हर पैरेंट्स के लिए हमेशा से चिंता का विषय रहा है, इसीलिए हर कोई चाहता है और पूरी कोशिश करता है कि उसका बच्चा हरदम तंदुरुस्त रहे. इसके लिए बच्चे को खाने के लिए पौष्टिक भोजन और पीने के लिए टॉनिक दिया जाता है. लेकिन कभी-कभी बच्चा पौष्टिक भोजन और टॉनिक से भी स्वस्थ नहीं हो पाता. इससे अमूमन हर दंपति परेशान रहते हैं.

* बच्चों की सेहत से जुड़ी इस पहेली को सुलझाया है अमेरिका में हुए रिसर्च ने. अमेरिका के टेक्सास में बायलोर यूनिवर्सिटी में हुए रिसर्च में कहा गया है कि माता-पिता के व्यवहार का असर बच्चों की सेहत पर होता है. रिसर्च में शामिल लोगों ने कहा है कि अगर माता-पिता का व्यवहार बच्चे के साथ बहुत अच्छा है, तो बच्चा स्वस्थ रहता है और बड़ा होकर भी वह तंदुरुस्त ही रहता है.
* बायलोर यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर और रिसर्चर मैथ्यू एंडरसन ने कहा कि माता-पिता से बच्चों के अच्छे संबंध बच्चे के खाने, सोने और उसके दैनिक गतिविधि को प्रेरित करने के लिए ज़रूरी हो सकते हैं. इसलिए शोध में शामिल लोगों को सलाह दी गई है कि अपने बच्चे के साथ हमेशा बहुत बढ़िया संबंध बनाकर रखें.
* इस अध्ययन में पता चला है कि अगर माता-पिता से बच्चे का संबंध तनावपूर्ण अथवा अपमानजनक हैं, तो इसका प्रतिकूल असर बच्चे की खाने-पीने की आदतों पर पड़ता है और बच्चे का भोजन पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता.
* यहीं से बच्चे की सेहत ख़राब होनी शुरू हो जाती है. ऐसे में बच्चे पौष्टिक आहार लेने की बजाय ज़्यादा शुगर या ज़्यादा ऑयली डिश खाने लगते हैं और धीरे-धीरे अनहाइजेनिक फूड खाने की उनकी आदत पड़ जाती है.

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* ज़्यादा शुगर या तेल खानेवाले बच्चों की आदत ही ख़राब हो जाती है. इसके चलते उनकी रोज़मर्रा की दूसरी गतिविधियां भी अनियमित हो जाती हैं.
* बच्चों में स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक, भावनात्मक विकास का होना उसकी लंबी आयु के लिए बहुत ज़रूरी है.
* आर्थिक रूप से कमज़ोर घरों में माता-पिता बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर पाते. माता-पिता और बच्चे के बीच इस तरह के व्यवहार का असर बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है.
* अंततः इसका असर बच्चे की बढ़ती उम्र के साथ उसके सामाजिक-आर्थिक स्तर पर दिखता है और बच्चा बीमार और नकारात्मक प्रवृत्ति का हो जाता है.
* इसी तरह कम शिक्षित और कमज़ोर आर्थिक स्थितिवाले माता-पिता बच्चों को धमकी देने या ज़बरदस्ती आज्ञा मनवाने की बजाय रचनात्मक बातचीत की सहायता लेते हैं, इससे उनके रिश्तों में गर्माहट बढ़ती है.
* अच्छे घर में और अच्छे माता-पिता के बच्चे बड़े होने का असर उसके शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद होता है.
* रिसर्च में यह भी कहा गया है कि अगर पैरेंट्स का अपने बच्चे से संबंध अच्छा नहीं है, तो इसका असर बच्चे की सेहत पर पड़ता है. इतना ही नहीं, ऐसे माहौल में पलनेवाले बच्चे का स्वास्थ्य बड़े होने पर भी ठीक नहीं रहता है.

– अटलजी

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