क्या अब सब कुछ रूक जाएगा? बाल, स्किन, शरीर, स्वभाव... सब कुछ बदल रहा है. क्या मैं फिर कभी अपने पुराने कपड़ों में फिट हो पाऊंगी, क्या पहले जैसी दिख पाऊंगी? मेनोपॉज़ अर्थात रजोनिवृत्ति स्त्रियों को अक्सर कई सवालों के भंवर में झोंक देती है और अधिकतर स्त्रियां इस भंवर से बाहर नहीं आ पातीं और मानसिक व शारीरिक रूप से गर्त में चली जाती हैं.
मेनोपॉज़ में स्त्री के आसपास का बुनियादी ढांचा अर्थात परिवार, समाज, स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत महत्वपूर्ण होती हैं. स्त्रियों को मेनोपॉज़ के बारे में खुलकर बात करनी होगी, यह कोई समस्या या शर्म की बात नहीं है, यह एक प्रक्रिया है. जब इसके बारे में चर्चा होगी तब समस्या... समस्या ना रहकर समाधान बन जाएगी. यह पॉज़ नहीं है, बल्कि एक ख़ूबसूरत और सकारात्मक बदलाव का समय है, जिसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए.
क्या है मेनोपॉज़?
स्त्रियों के शरीर में पुरुषों की अपेक्षा एक तंत्र अधिक होता है, ’प्रजनन तंत्र’. इस तंत्र के कारण मेंस्ट्रुअल (मासिक धर्म) साइकल शुरू होने के साथ कई हार्मोंस का स्राव शुरू हो जाता है. मनोपॉज़ के समय इन्हीं हार्मोंस का सिक्रीशन (स्राव) होना बंद हो जाता है.

डॉ. अर्पणा एस. मुधोलकर
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पणा एस. मुधोलकर बताती हैं, मेनोपॉज़ में स्थायी रूप से स्त्रियों की पीरियड साइकल रूक जाती है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोंस में गिरावट आ जाती है. ये दोनों हार्मोंस स्त्रियों की शारीरिक और भावनात्मक सेहत पर सीधा असर डालते हैं. अगर किसी स्त्री को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आए हैं, तो क्लिनिकली उसे मेनोपॉज़ कहा जाता है.
क्या है पेरी मेनोपॉज़
डॉ. मुधोलकर बताती हैं, इस स्टेज में हार्मोंस ऊपर-नीचे होते हैं. पीरियड्स पूरी तरह रुकते नहीं हैं, पर अनियमित हो जाते हैं. यह मेनोपॉज़ के पहले की प्रक्रिया है. यह लगभग 5 से 7 साल चल सकती है.

मेनोपॉज़ के लक्षण
अचानक वज़न बढ़ना
मेनोपॉज़ में हार्मोंस में आए बदलाव के कारण मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, जिससे अचानक मोटापा बढ़ जाता है. डॉ. मुधोलकर बताती हैं, “ना सिर्फ़ मोटापा बढ़ता है, बल्कि मांसपेशियों का धनत्व कम हो जाता है. कमर के आसपास चर्बी जमा हो जाती है.”
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हॉट फ्लश
यह मेनोपॉज़ का सबसे आम लक्षण है. इसमें अचानक चेहरे के आसपास, गला, छाती में गर्म भाप सी निकलती है और कुछ समय में सब अपने आप ठीक हो जाता है. अक्सर रात में अचानक बहुत पसीना आने लगता है.
स्किन और बाल
स्किन और बालों में बदलाव आ सकते हैं. स्किन और बालों का रूखा होना, बालों का गिरना- टूटना या स्किन की अन्य समस्याएं.
हड्डियां
मेनोपॉज के दौरान हड्डियां कमज़ोर हो सकती हैं, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस भी कहा जाता है.
जेनिटो यूरिनरी सिस्टम
डॉ. अपर्णा बताती हैं, “मेनोपॉज़ में वजाइनल ड्राइनेस आम समस्या है, जिससे वजाइनल ट्रैक्ट या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो सकता है.
इमोशनल बदलाव
यह बहुत महत्वपूर्ण है. हार्मोंस में आए बदलावों के कारण एक स्त्री में मानसिक बदलाव आते हैं. उसके नर्वस सिस्टम में बदलाव आते हैं, जिससे स्त्री का रिएक्शन सिस्टम बदल जाता है.

डॉ. मुधोलकर कहती हैं, “इतने सालों से पीरियड ही स्त्रीत्व की पहचान होते हैं और जब अचानक वही बंद हो जाते हैं, तो स्त्री को लगता है कि जैसे उसकी आइडेंटी ही चली गई, पर असल में ऐसा नहीं होता.”
अन्य लक्षण
थकान, नींद ना आना, पैरों में दर्द, डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर, थायरॉइड, डिप्रेशन, एंजाइटी, ब्रेन फॉग.
क्या करें ताकि मेनोपॉज़ ना रोके आपका जीवन
पॉज़ का मतलब है अल्पविराम अर्थात मेनोपॉज़ में जो स्त्रियां हैं या जो इसकी ओर बढ़ रही हैं, उन्हें यह समझना होगा कि यह जीवन का एक मोड़ है. यहां कुछ देर रुककर थोड़ा अपने आपको तैयार करके आगे का सफ़र शुरू करना होगा. यह समझना और स्वीकार करना होगा कि अगर शरीर में बदलाव आए हैं, तो आप वापस पहले जैसी कैसे दिख पाएंगी. इस प्रक्रिया में आप कोकून से बाहर निकलकर तितली बनने जा रही हैं. ऐसे में आपको वापस कोकून में जाने की मंशा न रखते हुए तितली के पंखों सी उड़ान भरनी चाहिए.
मेनोपॉज़ के लिए स्त्रियों को ख़ुद को तैयार करना होगा. इस बारे में 'फ्रीडम फ्रॉम डायबिटीज़ और फ्रीडम फ्रॉम ओबेसिटी' के को फाउंडर और 'किलोबीटर्स' के डायरेक्टर डॉ. मल्हार गानला कहते हैं, “आज की जीवनशैली में स्त्रियों की ज़िम्मेदारियां बहुत बदल गई हैं. साथ ही उनका खानपान समय के साथ बदल गया है.

डॉ. मल्हार गानला
इसके बारे में 'फ्रीडम फ्रॉम डायबिटीज़ और फ्रीडम फ्रॉम ओबेसिटी' के को फाउंडर और 'किलोबीटर्स' के डायरेक्टर डॉ. मल्हार गानला कहते हैं, “आज की जीवनशैली में स्त्रियों की ज़िम्मेदारियां बहुत बदल गई हैं. साथ ही उनका खानपान समय के साथ बदल गया है. 40 या 45 की उम्र के बाद का मोटापा या शारीरिक और मानसिक समस्याओं से निपटने के कुछ बदलाव आवश्यक है. स्त्रियों को मेनोपॉज़ के समय स्ट्रेस कोपिंग सिस्टम में बदलाव लाने होंगे. अपने तनाव को खाने से जोड़ना आपको परेशानी में डाल सकता है. आज मुझे ऐसा लगता है कि समाज में स्त्रियों के लिए इन सभी तनावों और परेशानियों से लड़ने के लिए ऐसे रोल मॉडल्स की कमी है जिन्हें देखकर उन्हें एक सही रास्ता मिले, जिससे वह तनाव, मोटापा और अन्य परेशानियों से बाहर आ सकें. ऐसे में कुछ छोटी-छोटी चीज़ें करके महिलाएंं ख़ुश रह सकती हैं.”
आइए, उन महत्वपूर्ण बातों को जानें-
- वैलिडेशन के लिए कुछ मत करें. जो करना है अपनी ख़ुशी के लिए करें, दूसरों से तारीफ़ पाने के लिए कुछ ना करें. हमारे समाज, घर-परिवार में ऐसी कंडिशनिंग होती है कि स्त्रियां अमूमन सभी चीज़ें वैलिडेशन के लिए करती हैं. यह धीरे-धीरे कम करना होगा, जिससे तनाव का बोझ नहीं बढ़ेगा.
- ख़ुद को, अपने शरीर को एक्सेप्ट करिए. आपको किसी के जैसा बनने की, दिखने की आवश्यकता नहीं है.
- खाने को पोषण के लिए खाएं, एंटरटेनमेंट या तनाव कम करने के लिए ना खाएं.
- मेनोपॉज़ में जो वज़न बढ़ता है, अगर उसे कम करना है, तो यह ध्यान रखें कि कोई भी वज़न एक दिन में कम नहीं होता, तो प्रोसेस पर विश्वास रखें. एक और बात यह है कि साउथ एशियन बीएमआई थोड़ा अलग होता है, तो कोशिश यह होनी चाहिए कि आपकी एथलिट बॉडी बने, जिससे आप स्वस्थ रहें.
- कसरत बहुत महत्वपूर्ण है. जिम या योगा के अलावा लॉन्ग कार्डियो जैसे ट्रैकिंग, साइकलिंग ज़रूर करें.
- फास्टिंग गेम चेंजिंग हो सकता है. फास्टिंग ब्रेन फॉग, एंग्जायटी आदि को भी कम करती है. फास्टिंग किसी डॉक्टर की देखरेख में करें.
- विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स के सप्लीमेंट्स महत्वपूर्ण हैं. इसके साथ अपने आपको हाइड्रेट रखना अर्थात पानी पीना बहुत ज़रूरी है.
- सबसे महत्वपूर्ण है ख़ुद को ख़ुश रखना.
- इसके अलावा ध्यान और प्राणायाम भी बहुत लाभकारी होता है.
- मेनोपॉज़ के लक्षणों को कम करने के लिए कई हार्मोनल और नॉन हार्मोनल दवाइयां भी ली जा सकती हैं
- मेनोपॉज़ के दौरान शराब, सिगरेट आदि के सेवन से परहेज़ करें.
- अपना सोशल सपोर्ट सर्कल बनाएं, जिसमें आप अपनी बातों को शेयर कर सकें.
- कैल्शियम और विटामिन डी महत्वपूर्ण है.
- तले, भूने, मसालेदार खाने से परहेज़ करें.
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कुछ उपयोगी टिप्स
- दिन ढलते स्क्रीन का उपयोग कम कर दें, ताकि नींद अच्छी आए.
- नई हॉबीज़ बनाएं. कुछ नया सीखें.
- जिम में अपनी मसल्स पर काम करें.
- खुली हवा में वॉक करें..
- जर्नलिंग की आदत डालें.
- जब ज़रूरी लगे, एक्सपर्ट्स या डॉक्टर्स की मदद ज़रूर लें.
- अपने आपको नए सिरे से संवारने की कोशिश करें.
- विजया कठाले निबंधे

