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वुमन सेफ्टी लॉ- महिलाओं की सुरक्षा पर एक नज़र… (Women’s Safety Laws- A Look At Women’s Safety…)

हमारे देश में स्त्रियों की सुरक्षा व अधिकारों को लेकर कई उल्लेखनीय क़ानून बनाए गए हैं, जिनमें ख़ासतौर पर घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम, यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम हैं. इस तरह के क़ानून स्त्रियों का शारीरिक, आर्थिक व मानसिक शोषण से रक्षा करते हैं.

आज हम चाहे जितनी बड़ी-बड़ी बातें कर लें फिर भी भारत ही नहीं दुनियाभर में महिलाओं की सुरक्षा सवालों के घेरे में रही है. मेरी सहेली की इस पॉडकास्ट में जानी-मानी एडवोकेट आभा सिंह इसी से संबंधित कई पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारियां दे रही हैं. पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें-

क़ानून में महिलाओं के तमाम अधिकारों व सुरक्षा को लेकर संक्षेप में महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं उच्च न्यायालय इलाहाबाद (प्रयागराज) के एडवोकेट आशीष कुमार.

महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समानता भारत के संविधान तथा विभिन्न क़ानूनों का मूल उद्देश्य है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 महिलाओं को कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है. अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं के हित में विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देता है तथा अनुच्छेद 21 प्रत्येक महिला को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है.

महिलाओं को घरेलू हिंसा से सुरक्षा प्रदान करने के लिए घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 लागू किया गया है. इस अधिनियम की धारा 18 से 23 के अंतर्गत पीड़ित महिला को संरक्षण आदेश, निवास का अधिकार, आर्थिक सहायता तथा अन्य आवश्यक राहत प्रदान की जाती है. इसके अतिरिक्त दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 दहेज़ लेने या देने तथा धारा 4 दहेज़ मांगने को दंडनीय अपराध घोषित करती है.

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान हैं. धारा 63 एवं 64 बलात्कार तथा उसके लिए निर्धारित दंड का प्रावधान करती हैं. धारा 74 महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से किए गए हमले या आपराधिक बल के प्रयोग को अपराध मानती है. धारा 75 यौन उत्पीड़न, धारा 76 महिला को निर्वस्त्र करने के उद्देश्य से हमला, धारा 77 ताक-झांक (Voyeurism), धारा 78 पीछा करना (Stalking) तथा धारा 79 अशोभनीय शब्दों, इशारों या कृत्यों द्वारा महिला की मर्यादा का अपमान करने से संबंधित है. धारा 80 पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा महिला के साथ क्रूरता को दंडनीय अपराध बनाती है.

महिलाओं की वैवाहिक सुरक्षा के लिए BNS की धारा 85 और 86 भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. धारा 85 पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहित महिला के साथ क्रूरता (Cruelty) को दंडनीय अपराध बनाती है. इसमें शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न, दहेज की मांग के लिए प्रताड़ना तथा ऐसा व्यवहार शामिल है, जिससे महिला के जीवन, स्वास्थ्य या मानसिक स्थिति को ख़तरा हो. धारा 86 क्रूरता के कारण आत्महत्या या गंभीर उत्पीड़न से जुड़े मामलों में साक्ष्य और क़ानूनी संरक्षण को सुदृढ़ करती है तथा महिलाओं को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

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कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्‍चित करने के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) लागू किया गया है. इस क़ानून के तहत प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन आवश्यक है, ताकि महिलाओं को सुरक्षित काम करने के लिए सही माहौल मिल सके.

महिलाओं की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. महिला हेल्पलाइन 181 तथा आपातकालीन नंबर 112 के माध्यम से संकट में फंसी महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाती है. वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) हिंसा से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, क़ानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता एक ही स्थान पर प्रदान करते हैं. निर्भया फंड के माध्यम से महिला सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाती है. सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहरों में CCTV कैमरे, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और अन्य सुरक्षा उपाय विकसित किए गए हैं. बलात्कार और यौन अपराधों से संबंधित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (FTSC) स्थापित किए गए हैं.

इसके अतिरिक्त बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान, महिला शक्ति केंद्र योजना, महिला पुलिस स्वयंसेवक योजना, साइबर क्राइम पोर्टल तथा पुलिस थानों में स्थापित महिला सहायता डेस्क महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

अतः यह स्पष्ट है कि भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए संविधान, क़ानून और सरकारी योजनाओं का एक मज़बूत ढांचा मौजूद है. इन क़ानूनों और योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है.

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ज़रूरत होने पर तुरंत मदद के लिए महिलाओं के लिए ख़ासतौर पर वुमन हेल्पलाइन- 1091 भी है.
- ऊषा गुप्ता

Photo Courtesy: Freepik


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