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दहेज़ मृत्यु- क्या कहता है क़ानून… (Dowry Death – What The Law Says…)

दहेज़ के नाम पर मृत्यु का सिलसिला आख़िर कब तक चलता रहेगा? इस संदर्भ में क़ानूनी पहलुओं पर एक नज़र...

दहेज़ प्रथा भारतीय समाज की एक गंभीर सामाजिक बुराई है. विवाह के बाद यदि किसी महिला की मृत्यु जलने, शारीरिक चोट या असामान्य परिस्थितियों में होती है और यह सिद्ध हो कि उसे दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया गया था, तो इसे 'दहेज़ मृत्यु' (Dowry Death) कहा जाता है,

क़ानूनी प्रावधान

* भारतीय न्याय संहिता (BNS) / पूर्व IPC धारा 304-B

यदि विवाह के 7 वर्ष के भीतर महिला की असामान्य मृत्यु होती है और उसे दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया गया हो, तो पति या उसके रिश्तेदारों पर दहेज़ मृत्यु का मामला दर्ज़ होता है. इसमें कठोर सज़ा का प्रावधान है.

* दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम, 1961

दहेज़ लेना, देना या मांगना क़ानूनन अपराध है.

* घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005

महिला को शारीरिक, मानसिक या आर्थिक उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करता है.

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क़ानूनी उपचार (Legal Remedies)

- पुलिस थाने में FIR दर्ज कराना.

- मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करना.

- महिला आयोग या महिला हेल्पलाइन से सहायता लेना.

- पीड़िता के परिवार द्वारा मुआवजा एवं न्याय की मांग करना.

- उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील करना.

दहेज़ मृत्यु केवल एक क़ानूनी अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए कलंक है. क़ानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख़्त प्रावधान देता है, परंतु समाज को भी जागरूक होकर दहेज़ प्रथा का विरोध करना आवश्यक है.

- एडवोकेट आशीष कुमार

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Photo Courtesy: Freepik

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