Close

लघुकथा- शिव भक्त (Short Story- Shiv Bhakt)

भीतर पहुंचते ही सबने राहत की सांस ली.सिया के मुंह से अनायास निकला, "आज तो बाल-बाल बचे! सच्चे भक्त तो दाल में नमक जितने होंगे, बाकी तो…"

हम तीन अध्यापिकाएं रोज़ एक ही कार से कॉलेज आती-जाती थीं.

सावन का महीना था. लौटते समय सड़क पर सात-आठ कांवड़िए झूमते, नाचते, ऊंची आवाज़ में नारे लगाते पूरी सड़क घेरकर चल रहे थे. रिनी ने कार की रफ़्तार एकदम धीमी कर दी. हम तीनों की नज़रें उन पर थीं. किसी की एक लापरवाही बड़ी दुर्घटना में बदल सकती थी.

लगभग दस मिनट बाद कॉलोनी का मोड़ आ गया. भीतर पहुंचते ही सबने राहत की सांस ली.

यह भी पढ़ें: गाय के गोबर को क्यों पवित्र माना जाता है और क्यों श्रावण में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा है, जानें इन 7 हिंदू मान्यताओं के पीछे छिपे विज्ञान व स्वास्थ्य के कारणों को! (7 Scientific Reasons Behind Popular Hindu Traditions)

सिया के मुंह से अनायास निकला, "आज तो बाल-बाल बचे! सच्चे भक्त तो दाल में नमक जितने होंगे, बाकी तो…"

वह अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई थी कि तभी सड़क किनारे एक दुबला-पतला कांवड़िया दिखाई दिया. उसकी कांवड़ का बांस टूट गया था. वह चुपचाप टूटी कांवड़ बांधने की कोशिश कर रहा था.

तभी पीछे से एक वृद्ध रिक्शा-चालक उतरा. उसने अपनी रस्सी निकालकर कांवड़ बांधी. कांवड़िए ने झुककर उसके पैर छुए और बिना शोर, बिना नारे, धीरे-धीरे आगे बढ़ गया.

हम खिड़की से उसे देर तक जाते हुए देखती रहीं.

नील मणि

नील मणि

यह भी पढ़ें: क्या‌ आप जानते हैं शिवजी से‌ जुड़े इन बातों को… (Do you know these things related to Lord Shiva?)

अधिक कहानियां/शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए यहां क्लिक करें – SHORT STORIES

Photo Courtesy: Freepik

Share this article