Close

लघुकथा: अच्छे लोग-बुरे लोग (Short Story- Achche Log-Bure Log)

गुरू जी जब दूसरे दिन वहां से चलने लगे तो गांव वालों को उन्होंने आशीर्वाद दिया, "उजड़ जाओ!" गुरू जी के शिष्यों ने सुना तो अवाक रह गए.

एक बार गुरू नानक देव जी महाराज अपने शिष्यों के साथ भ्रमण पर थे. एक शाम जब वे एक गांव में पहुंचे तो वहां के निवासियों ने उनका स्वागत सत्कार बड़े उत्साह से किया. सभी गांव वाले उनसे बेहद ख़ुश थे. गांव वालों ने गुरू जी एवं शिष्यों की ख़ूब सेवा की और गुरू जी का उपदेश ध्यान से सुना.

गुरू जी जब दूसरे दिन वहां से चलने लगे तो गांव वालों को उन्होंने आशीर्वाद दिया, "उजड़ जाओ!" गुरू जी के शिष्यों ने सुना तो अवाक रह गए.

वे सोचने लगे कि गुरू जी ने ऐसा क्यों कहा? गुरूजी अपनी शिष्य मंडली के साथ चलते-चलते शाम को एक और गांव में पहुंचे. उस गांव के लोग बहत बुरे थे. गुरू जी के पहुंचते ही उन्होंने गुरू जी को आड़े हाथों लिया व उनके साथ गाली-गलौज करने लगे. एक बार तो गांव वाले मार-पीट पर भी उतारू हो गए. गुरु जी और शिष्य गांव वालों के व्यवहार से बहुत परेशान हुए.

यह भी पढ़ें: क्या आप भी करते हैं दूसरों की बुराई? (How To Avoid Gossiping)

जैसे-तैसे उन लोगों ने वहां रात बिताई. सुबह होते ही वेचलने लगे तो गुरू जी ने वहां उपस्थित सभी गांव वालों से कहा, "आबाद रहो!"

अब तो शिष्यों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा. वे सोचने लगे कि आजकल गुरू जी को क्या हो गया है? आख़िर शिष्यों से न रहा गया तो उन्होंने गुरू जी से कहा, "गुरू जी, यह आपको क्या हो गया है? जिन लोगों ने आपका स्वागत-सत्कार किया, उन्हें आपने उजड़ जाने का और जिन लोगों ने आपका अपमान किया, उन्हें आपने आबाद रहने का आशीर्वाद दिया. आख़िर इसका मतलब क्या है? कृपया इसे स्पष्ट कीजिए.

गुरू जी ने सभी शिष्यों पर स्नेह से नज़र डाली और बोले, "प्यारे बच्चों, जब सज्जन लोग उजड़ेंगेतो वह, जहां भी जाएंगे, वहां उचित वातावरण बनाएंगे और दुष्ट छेड़ कर वातावरण को ख़राब करेंगे. इसलिए अच्छे लोगों का उजड़ना और बुरे लोगों का एक ही स्थान पर बने रहना अच्छा है."

शिष्य ये सुनकर गुरू जी के आगे नतमस्तक हो गए.

- अयोध्या प्रसाद 'भारती'

यह भी पढ़ें: ज्ञानी होने का दावा (Gyani Hone Ka Dawa)

लघुकथा: अच्छे लोग-बुरे लोग

अधिक कहानियां/शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए यहां क्लिक करें – SHORT STORIES

Photo Courtesy: Freepik

Share this article