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लघुकथा- संस्कार (Short Story- Sanskar)

“आप कर दिया करें उनकी मालिश, आप तो अभी एकदम ठीक हैं.”

“शर्म नहीं आती तुम्हें जवाब देते हुए.  यही संस्कार दिए हैं तुम्हारी मां ने?”

“संस्कार! लेकिन वो आपने मांगा कहां था?..”

“बहू घर के काम निपटाने के बाद अम्मा जी और मेरे पैरों की मालिश कर दिया करो.”

“मम्मी जी मुझसे इतना काम नहीं हो पाएगा, बहुत थक जाती हूं.”

“अरे, अभी महीना भर हुआ नहीं तुम्हें आए हुए और तुम जवाब देने लगी हमें. अम्मा जी बुज़ुर्ग हैं, तुम उनके पैर की मालिश करने से मना कर रही हो.”

“आप कर दिया करें उनकी मालिश, आप तो अभी एकदम ठीक हैं.”

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“शर्म नहीं आती तुम्हें जवाब देते हुए.  यही संस्कार दिए हैं तुम्हारी मां ने?”

“संस्कार! लेकिन वो आपने मांगा कहां था?

शादी के पांच दिन पहले आपने जिन सामानों की लिस्ट भिजवाई थी उसमें संस्कार तो कहीं नहीं लिखा था.

आपकी मांग को पूरा करने के लिए जब मां ने अपने गहने और ज़मीन गिरवी रखे तो मैंने उनके दिए हुए संस्कार भी गिरवी रख दिए.”

– पल्लवी विनोद

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Photo Courtesy: Freepik

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