हम बरसों से सुनते आ रहे हैं कि बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड की ज़बर्दस्त दख़लअंदाज़ी रही है. कभी फिल्म में स्टार्स को लेकर तो कभी फिरौती के मामले में. एक व़क्त था जब अपराध जगत के सरगना फिल्म इंडस्ट्री को अपने इशारों पर नचाते थे.
मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में वरिष्ठ पत्रकार वाहिद अली खान ने ऐसे कई चौंकाने वाले व सनसनी भरे हक़ीक़त से रू-ब-रू करवाया, जो क्राइम वर्ल्ड का एक अलग ही चेहरा दिखाता है. पूरा पॉडकास्ट देखने-सुनने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
अपराधियों की ज़िंदगी को लेकर कई फिल्में बनीं या यूं कहें बहुत हद तक ज़ोर-ज़बर्दस्ती के साथ बनवाई भी जाती रही थीं. एक दौर था जब हीरोइनें तय करती थीं कि उन्हें अपनी फिल्म में किसे लेना है. आख़िर डॉन की माशूका होने का कुछ तो फ़ायदा होना ही चाहिए ना! तब तो ऐसा था कि स्टार कास्ट के बाद ही कहानी, पटकथा अन्य चीज़ें फाइनल होती थीं. आज की तरह नहीं कि पहले स्टोरी लाइन कंप्लीट होती है बाद में सब कुछ.
दरअसल, उन दिनों मूवी बनाने के लिए पैसों की किल्लत का भी सामना करना पड़ता था निर्माताओं को. तब पीछे से एंट्री होती है अंडरवर्ल्ड की. ये डॉन न केवल फिल्मों में पैसा लगाते थे, बल्कि अपने मनचाहे कलाकारों को लेने का दबाव भी बदस्तूर बनाए रखते थे. यही सबसे अधिक किया मोस्ट वान्टेड डॉन दाऊद इब्राहिम ने भी.
धीरे-धीरे अंडरवर्ल्ड और बॉलीवुड एक-दूसरे के पूरक बनने लगे. ये स्मार्ट गैंगस्टर पहले मूवी में पैसे लगाते बाद में प्रोडयूसर से अलग ढंग से वसूली भी करते थे. ये सिलसिला बरसों तक चलता रहा. एक दौर ऐसा भी आया कि जब उनकी लालच की भूख खूनी हिंसा को जन्म देने लगी. तब नाम, फेम, पैसा सब कुछ हासिल करने का ऐसा जुनून चढ़ा कि निर्माताओं को डराने, धमकाने, वसूली करने के साथ-साथ खून-ख़राबे भी होने लगे. फिल्म इंडस्ट्री में दहशत का माहौल बन गया. उन्होंने भी कभी सोचा नहीं था कि जिस जगमगाते अंडरवर्ल्ड की चकाचौंध को वे परोस रहे हैं, वही उनका जीना हराम कर देगी.
दिन दहाड़े टी सीरीज के गुलशन कुमार मर्डर ने तो मनोरंजन जगत को बुरी तरह से डरा ही दिया. बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का चोली-दामन का साथ, सांप-नेवले की स्थिति बन गया. कई नाम लाइमलाइट में आने लगे. मुंबई बॉम्ब ब्लास्ट के कर्ता-धर्ता दाऊद इब्राहिम ऐसे भागे कि आज तक कहे अनुसार पाकिस्तान के कराची में भी ख़ुद को मह़फूज़ नहीं रख पा रहे. कभी सुनने में आता कि नदीम श्रवण कांड करके देश छोड़कर ऐसे भगौड़े बने कि गिरफ़्तारी का डर उन्हें भारत आने नहीं देता.
मेरी सहेली के पॉडकास्ट में वाहिद जी ने बड़ी साफ़गोई से उन्हें खरी खरी सुनाते हुए कहा कि यदि वे बेकसूर हैं तो आए और अपनी स्थिति को स्पष्ट करें. उन्हें भारतीय क़ानूनी प्रणाली पर भरोसा करना होगा, वरना यूं ही भागते फिरते रहेंगे. सच भी है, भला ऐसा जीवन किस काम का, जिसे अपनी ही जन्म स्थली धरती पर पनाह न मिले.. रहने-आने से लेकर अपनों से मिलने का सुकून न मिले. ..
अली जी का तो कहना है कि “भाई-भाई” बोलकर ही बॉलीवुड ने अंडरवर्ल्ड को बनाया बड़ा!.. सच में, उन्होंने मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में ऐसी छोटी-छोटी कई बातों का खुलासा किया है, जैसे- संगीतकार नदीम श्रवण के मैटर में भी उन्होंने खुलकर कहा कि नदीम भाई बगुनाह हैं तो इंडिया क्यों नहीं आते? कोर्ट में आकर ट्रायल फेस करें!.. वे इस बात को भी कहने से नहीं चूकते कि बॉलीवुड ख़ुद अंडरवर्ल्ड के पास जाता था!.. एक तरह से उन्होंने अपराध की दुनिया के काले कारनामे जो फिल्मी दुनिया से जुड़े थे का पूरा सच दिलेरी के साथ बताने का साहस किया है.
जर्नलिस्ट वाहिद अली खान ने मुंबई पुलिस की भी जमकर तारीफ़ की. ख़ासतौर पर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर, प्रदीप शर्मा, दया नायक ऐसे तमाम लोगों की वजह से मुंबई में गैंगस्टर का सफाया होने लगा था. बकौल उनके आज की तारीख़ में मुंबई में अंडरवर्ल्ड की पूरी तरह से ख़त्म हो गया है, बस नाममात्र के कुछेक हैं.
लॉरेंस विश्नोई को लेकर भी उन्होंने अपनी बेबाक़ राय रखी और कहा कि उसे गुंडा, मवाली कह सकते हैं, पर वो देशद्रोही यानी आतंकवादी नहीं है, जैसा दाऊद इब्राहिम का काला इतिहास रहा है… दाऊद के इसी देशद्रोह के कारण उनका क़रीबी छोटा राजन उनसे अलग हो गया था.
बॉलीवुड के अंडरवर्ल्ड कनेक्शन को लेकर और भी तमाम दिलचस्प बातें वरिष्ठ पत्रकार वाहिद अली खान ने मेरी सहेली के लेटेस्ट पॉडकास्ट में कही हैं, जिन्हें सुनना और जानना आपके लिए किसी तिलिस्म से कम न होगा. शेष फिर…

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