टीनू आनंद एक मंजे हुए कलाकार और निर्देशक होने के साथ-साथ एक बेहतरीन इंसान भी हैं. जानें टीनू आनंद से जुड़े दिलचस्प बातों को मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में. पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें –
कई फिल्मों में अपने मज़ेदार डायलॉग डिलीवरी से टीनू आनंद ने कई बार हंसाया तो ग़मगीन भी किया है. भला कौन भूल सकता है फिल्म ‘दयावान’ का उनका छोटा सा रोल, जिसमें वे अपने ख़ास अंदाज़ में कहते हैं- मेरा बाप मर गया… नमी भरी मुस्कुराहट ले आता है.

टीनू आनंद के करियर में अमिताभ बच्चन की ख़ास भूमिका रही है, क्योंकि उनके निर्देशन में अमिताभ बच्चन की कालिया, शहंशाह, मैं आज़ाद हूं, मेजर साब जैसी फिल्में न केवल सफल रहीं, बल्कि इनके गीत, संगीत और संवाद को भी लोगों ने बेहद पसंद किया. आज भी ‘शहंशाह’ फिल्म का डायलॉग इस कदर मशहूर है कि कोई कॉमेडी शो हो या प्ले जहां पर अमिताभ की कॉमिक अंदाज़ में यह डायलॉग ज़रूर मारा जाता है- रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह…
फिल्म का यह संवाद हर किसी को इस कदर पसंद आया था कि अस्सी के दशक में यह डायलॉग बच्चे-बुज़ुर्ग हर किसी के जुबां पर था.
हम जहां खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है… अमिताभ पर ही फिल्माया गया यह संवाद टीनू आनंद के निर्देशन में ही नया रुप दिया था.
यह संयोग भी है कि जहां अमिताभ बच्चन का जन्मदिन 11 अक्टूबर को है तो वहीं टीनू आनंद 12 अक्टूबर के जन्मे हैं. इनका कुछ ना कुछ रिश्ता कहें या साथ, जो अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से चलता आ रहा है.

टीनू आनंद के पिता इंदर राज आनंद एक बेहतरीन पटकथा लेखक थे. वहीं उनके भतीजे सिद्धार्थ आनंद लाजवाब निर्देशक हैं. बहुत कम लोग जानते हैं कि टीनू आनंद का असली नाम वीरेंद्र राज आनंद है. निर्देशक बनने से पहले वे लंबे समय तक फिल्ममेकर सत्यजीत रे के असिस्टेंट डायरेक्टर रहें.
Photo Courtesy: Social Media
