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शुभफल प्राप्ति के लिए ऐसे मनाएं दीपावली (Celebrate Diwali in this way to attain auspicious results)

आप भी चाहते हैं कि दीपावली आपके लिए शुभ और सौभाग्यवर्द्धक हो, दीयों की रोशनी आपके घर-आंगन को भी रोशन करे, आपके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बरसे, तो ज्योतिषाचार्य और वास्तु विशेषज्ञ ऋचा पाठक से जानें दीपावली के हर दिन की विधिविधान से पूजा विधि और मनाएं शुभ दीपावली!

ऋचा  पाठक
ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ, ज्योतिषधाम
वेबसाइटःwww.jyotishdham.com

वसु बारस 2026: दीपावली के उत्सव की शुरुआत

गुरुवार, 5 नवंबर 2026ः कृष्ण द्वादशी, कार्तिक

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि दीपावली धनतेरस से शुरू होती है. महाराष्ट्र में यह एक दिन पहले शुरू हो जाती है. वसु बारस को दीपावली के आरंभ का सूचक माना जाता है. इसे गोवत्स द्वादशी भी कहते हैं. माना जाता है कि इसका नाम वत्स (बछड़ा) और बारस (मराठी में द्वादशी, यानी बारहवीं तिथि) से बना है. इस दिन महिलाएं गाय और उसके बछड़े की हल्दी, कुमकुम, फूल और माला से पूजा करती हैं और अपने बच्चों की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं. कई परिवार इस दिन दूध से बनी चीज़ें और गेहूं नहीं खाते, क्योंकि मान्यता है कि दूध पर बछड़े का अधिकार है. उसकी जगह ज्वार या बाजरे की भाकरी और अंकुरित मूंग खाई जाती है.

– वसु बारस के दिन घरों की सफाई और सजावट की शुरुआत हो जाती है.
– महिलाएं घर के द्वार पर गोबर से गोवर्धन चित्र या गोमाता के प्रतीक बनाती हैं.
– इस दिन महिलाएं गाय और उसके बछड़े की पूजा करती हैं.
– शहरों में जहां घरों में गाय नहीं रखी जा सकती, वहां पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व या पूर्व में कामधेनु या गाय-बछड़े का चित्र रखें. ध्यान रहे, इसे शयनकक्ष में या शौचालय की दीवार के पास न रखें.
– शाम का दीपक उत्तर-पूर्व कोने में जलाएं और उस कोने को सामान से खाली रखें.
– अगर गाय तक नहीं पहुंच सकते, तो गौशाला में चारे के लिए दान दें.

पूजा विधि
– वसुबारस की पूजा प्रातःकाल या सायंकाल की जाती है.
– स्नान के बाद गोबर से मंडप बनाएं और उस पर हल्दी-कुमकुम से स्वस्तिक व गोमाता का चित्र बनाएं.
– फूल, धूप, दीप, अक्षत, रोली, गुड़, चना और घास अर्पित करें.
– उत्तर पूर्व में दीपक जलाएं और गाय को थोड़े गुड़ के साथ रोटी खिलाएं या उसके नाम से चारा भिजवाएं.
– अगर आपके बच्चे हैं तो हर बच्चे का नाम लेकर प्रार्थना करें और तिलक लगाएं.
– गोमाता की आरती करें.
– पूजा के बार प्रसाद के रूप में चना और गुड़ बांटें.
– सादा बाजरे या ज्वार का भोजन करें और दिन को हल्का, सात्विक और शांत रखें.
– शाम को कुछ पल उन लोगों को याद करें, जिन्होंने आपको तब खिलाया जब आप खुद नहीं खा सकते थे.
– वसु बारस हमें याद दिलाती है कि समृद्धि केवल वह नहीं जो हम जमा करते हैं. वह भी है जिसे हम सबसे पहले खिलाने को तैयार हैं.

धनतेरस: पाएं समृद्धि का आशीर्वाद

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026ः कृष्ण त्रयोदशी, कार्तिकधनतेरस, दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का प्रथम दिन है और इसे धन एवं समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस दिन घर में की गई पूजा और उपाय जीवन में धन, स्वास्थ्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं. सोना-चांदी या किसी भी धातु की वस्तु ख़रीदने की परंपरा समृद्धि का प्रतीक है. इस साल धनतेरस शुक्रवार को है. ज्योतिष में शुक्रवार शुक्र का दिन है, जो धन, सुख- सुविधा, सौंदर्य, आभूषण और वाहन का कारक है.

इन चीज़ों की करें ख़रीदारी
– धरतेरस के दिन सोने-चांदी की वस्तुएं ख़रीदना शुभ माना जाता है. लेकिन यदि आप सोना-चांदी नहीं ख़रीद सकते तो एक स्टील की चम्मच ज़रूर ख़रीदें. इस चम्मच को अपनी तिजोरी में रख दें. इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी और आपके घर में धन-धान्य की वृद्धि होगी.
– धनतेरस के दिन धनिया का बीज ख़रीदना शुभ माना जाता है. इन बीजों को लक्ष्मी पूजा के समय इन बीजों को अर्पित करें. पूजा के बाद कुछ बीजों को मिट्टी के गमले में या घर के बगीचे में बो दें और बाकी के बीजों को तिजोरी में रख दें.
– धनतेरस के दिन विवाहित  महिला को श्रृंगार का सामान दना भी शुभ माना जाता है. इस दिन सुहागन को सिंदूर या लाल साड़ी देना चाहिए. इससे लक्ष्मी प्रसन्न होती है.

परिवार के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए जलाएं यम दीपम
प्रदोष काल में घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक छोटा दीपक रखें. यह यमराज की दिशा है. इसके पीछे की कथा परंपरा की सबसे सुंदर कथाओं में से एक है. राजा हिम के सोलह वर्षीय पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था. उसकी नवविवाहिता पत्नी ने अपने गहने और सोने के सिक्कों का ढेर द्वार पर लगाया, चारों ओर दीपक जलाए और रात भर गीत गाती रही. सर्प के रूप में आए यमराज उस चमक और संगीत से मंत्रमुग्ध हो गए और राजकुमार को लिए बिना लौट गए.
इसकी कथा के अनुसार धरतेरस के दिन दक्षिण दिशा में द्वार पर दीपक रखा जाता है. इस दीपक का प्रकाश भाग्य की दिशा बदल सकता है. यम दीपम परिवार के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए सुरक्षा का आशीर्वाद है.

क्या करें?
– कुबेर की दिशा उत्तर है. तिजोरी या नकदी का डिब्बा कमरे के दक्षिण-पश्‍चिम में रखें, ताकि उसका द्वार उत्तर की ओर खुले.
– उत्तर और उत्तर-पूर्व को सामान से मुक्त रखें और वहां एक छोटा दीपक या पीतल की वस्तु रखें.
– पूजा से पहले तिजोरी साफ़ करें और पुराने बिल और काग़ज़ हटा दें.
– नई ख़रीदी हुई वस्तुओं को पहले उत्तर-पूर्व के पूजा स्थान में रखें, फिर यथास्थान रखें.
– सूर्यास्त के बाद यम दीपम बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाएं.
– दीपक जलाकर पूरे घर को प्रकाशमान करें.

छोटी दीपावलीः नेगेटिविटी हटाने का दिन

शनिवार, 7 नवंबर 2026ः कृष्ण चतुर्दशी, कार्तिकनरक चतुर्दशी को लक्ष्मी पूजन से पहले का वार्म-अप समझा जाता है. नरक चतुर्दशी का दिन नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने और पवित्रता को आकर्षित करने का दिन है. इस दिन मां काली और यमराज की पूजा करके हम अपने जीवन से दुख और दरिद्रता को दूर करते हैं.

क्या करें?
– सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करें. पहले तिल के तेल से मालिश करें. फिर बेसन और हल्दी के उबटन से स्नान करें.
– ज्योतिष की दृष्टि से तिल का तेल परंपरा में शनि से जुड़ा है, जो अनुशासन, धैर्य और शरीर की पीड़ाओं का ग्रह है.
– पर्व का पहला कर्म इसलिए शनि जैसा है. अंधेरे में उठना, तेल लगाना, स्नान करना और दिन की शुरुआत परिश्रम और विनम्रता से करना.
– महाराष्ट्र की परंपरा के अनुसार छोटी दीपावली के दिन अपामार्ग की टहनी शरीर के चारों ओर घुमाई जाती है और कारीट नामक छोटा कड़वा फल पैर से कुचला जाता है, जो श्रीकृष्ण और सत्यभामा द्वारा नरकासुर के वध का प्रतीक है.

चौदह दीपक, चौदह साग
– बंगाल में इस दिन को भूत चतुर्दशी कहते हैं. चौदह दीपक जलाए जाते हैं और चौदह प्रकार के पत्तेदार साग खाए जाते हैं, कई मान्यताओं के अनुसार ऐसा चौदह पीढ़ियों के पूर्वजों के सम्मान में किया जाता है.
– गुजरात में इस रात को काली चौदस कहते हैं और इसमें मां काली की उपासना की जाती है.
– इस दिन सफ़ाई करें, दान दें, जप करें और स्मरण करें.

वास्तु के अनुसार ये घर की सफ़ाई का दिन है
घर से सारी अनावश्यक चीज़ें हटाने का सही दिन है. सूर्यास्त से पहले ये चीज़ें हटा दें:
– टूटे शीशे और चटके कांच.
– बंद पड़ी घड़ियां.
– खंडित मूर्तियां (उन्हें आदरपूर्वक जल में विसर्जित करें या पीपल के नीचे रखें).
– सूखे पौधे और पुरानी, धूल भरी मालाएं.
– एक्सपायर्ड दवाइयां, फटे कपड़े और टूटे जूते-चप्पल.
– पुराने कागज़ और बिल.
– उत्तर-पूर्व और घर के मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) को भारी सामान से खाली रखें, ताकि लक्ष्मी की संध्या स्वच्छ स्थान में शुरू हो.
– टपकते नलों को भी ठीक करा लें, क्योंकि वास्तु में बिना उद्देश्य बहता पानी समृद्धि का क्षय माना जाता है.

नरक चतुर्दशी कैसे मनाएं?
– सूर्योदय से पहले उठकर उबटन लगाकर तेल स्नान करें.
– ऊपर बताई गई चीज़ों को हटाकर घर की अव्यवस्था दूर करें.
– शाम को दक्षिण दिशा में पूर्वजों के लिए दीपक जलाएं.
– घर के प्रत्येक कोने में दीपक जलाएं, विशेष रूप से घर के मुख्य द्वार पर.
– सादा भोजन करें और वाणी को मधुर रखें.
– लक्ष्मी पूजा की तैयारी करें.

 

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दीपावलीः अंधेरी रात में ही लक्ष्मी पूजन क्यों?

रविवार, 8 नवंबर 2026ः कृष्ण अमावस्या, कार्तिक
– दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह देवी लक्ष्मी के स्वागत का पर्व है. लक्ष्मी माता को धन, समृद्धि और सुख की देवी माना जाता है. यह दिन न केवल व्यक्तिगत जीवन, बल्कि व्यवसायिक उन्नति और समृद्धि का भी अवसर प्रदान करता है. लेकिन कभी सोचा है कि प्रकाश और धन की देवी को उस रात क्यों बुलाया जाता है जब चंद्रमा दिखता ही नहीं? इसका उत्तर दीपों के ऊपर के आकाश में है.दीपों के पीछे का आकाश
अमावस्या का अर्थ है कि सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में हैं. कार्तिक मास में वह राशि तुला होती है. इसके तीन कारण महत्वपूर्ण हैं.
– मन का कारक चंद्रमा, आत्मा और अधिकार के कारक सूर्य में विलीन हो जाता है. इस रात मन की अपनी कोई राय नहीं रहती.
– सूर्य तुला में नीच का होता है. अहंकार झुकता है, जो आशीर्वाद पाने की अच्छी अवस्था है.
– तुला राशि का स्वामी शुक्र है यानी धन का कारक ग्रह और इसका प्रतीक तराज़ू है.
– तो दीपावली वह रात है जब मन शांत होता है, अहंकार झुकता है और हिसाब-किताब का संतुलन होता है, और यह सब समृद्धि के ग्रह की राशि में होता है. यही ज्योतिषीय कारण है कि इस रात व्यापारी चोपड़ा पूजन करते हैं और नई बही खोलते हैं. तुला का तराज़ू ही असली बही-खाता है.लक्ष्मी पूजन में स्थिर लग्न क्यों?
परंपरा के अनुसार लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद किया जाता है, विशेषकर तब जब स्थिर लग्न उदित हो. स्थिर राशियां हैं वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ. स्थिर लग्न में की गई पूजा से माना जाता है कि धन आकर टिकता है.पूर्वजों की रात
अमावस्या के अधिष्ठाता पितर हैं. कई परिवार दीपावली की संध्या पर लक्ष्मी पूजन से पहले या बाद में घर के दक्षिण भाग में पूर्वजों के लिए दीपक जलाते हैं. यह उसी धागे को आगे बढ़ाता है, जो एक महीने पहले समाप्त हुए पितृ पक्ष में बंधा था. माना जाता है कि लक्ष्मी वहीं ठहरती हैं जहां परिवार की परंपरा शांत हो.

लक्ष्मी की संध्या के लिए वास्तु
– पूजा घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व में करें और पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें.
– प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं और मुख्यद्वार को अच्छी तरह प्रकाशित रखें. ऊर्जा घर में द्वार से ही आती है.
– उत्तर-पूर्व में दीपक रखें और दीपावली की रात घर के किसी कोने को अंधेरा न छोड़ें.
– ब्रह्मस्थान यानी घर के मध्य को खुला रखें. वहां डिब्बे, जूते या भारी फर्नीचर न रखें.
– अगर आप तिज़ोरी की पूजा कर रहे हैं, तो उसे दक्षिण-पश्चिम में रखें, ताकि वह उत्तर की ओर खुले.
– पूजा के बाद दीपक को जितनी देर संभव हो जलने दें और उस रात घर में कलह न करें.
– व्यापारी ये अनुष्ठान करें. पूजा से पहले एक साफ़ पन्ने पर तीन बातें लिखें: इस वर्ष मैं क्या कमाना चाहता हूं, क्या बचाना चाहता हूं और क्या छोड़ना चाहता हूं. इसे लक्ष्मी जी की मूर्ति के नीचे या पूजा स्थान में रखें और अगली दीपावली तक वहीं रहने दें.

लक्ष्मी पूजन सामग्री
कलशः पानी, आम के पत्ते और नारियल.
पंचामृतः दूध, शहद, दही, घी और शक्कर.
दीपकः घी या तेल का दीपक, अगरबत्ती, चंदन और हल्दी, कुमकुम, लक्ष्मी माता की मूर्ति या चित्र.
फूलः गेंदा, गुलाब, चमेली.
फलः केले, अनार, नारियल.
मिठाइयांः लड्डू, पेड़ा, बर्फी.
अन्य सामग्रीः
– सोने-चांदी के सिक्के, सुपारी और पान के पत्ते.
– तुलसी के पत्ते, घंटी, नारियल, अक्षत, मौली, गंगाजल.
– श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, रुद्राक्ष माला.

क्या करें?
– अपने शहर के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न का समय जांच लें.
– घर को साफ़ करें और रोशन करें, विशेषकर उत्तर-पूर्व और प्रवेश द्वार.
– पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पूजा करें.
– दक्षिण दिशा में पूर्वजों के लिए दीपक जलाएं.
– तीन पंक्तियों का अपना संवत् का पन्ना लिखें.
– यदि आप व्यापारी हैं तो नई बही खोलें.
– पूजा स्थल को दीपक और फूलों से सजाएं, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो.
– पूजा स्थल पर लक्ष्मी माता की मूर्ति या तस्वीर रखें.
– उन्हें सुंदर ढंग से सजाएं और पूजा के दौरान ध्यानपूर्वक आराधना करें.
– श्री यंत्र को पीले कपड़े पर रखकर पूजन करें.
– श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का जाप करें. यह धन, समृद्धि और सुख के आह्वान के लिए विशेष रूप से प्रभावी है.

गोवर्धन पूजा

मंगलवार, 10 नवंबर 2026ः शुक्ल प्रतिपदा, कार्तिक

गोवर्धन पूजा दीपावली के दूसरे दिन (कुछ स्थानों पर तीसरे दिन) की जाती है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्रदेव के अभिमान को तोड़ने और गोवर्धन पर्वत उठाकर भक्तों की रक्षा करने की कथा स्मरण की जाती है.
– यह पर्व हमें प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देता है. यह साथ ही घर में सुख-समृद्धि, अन्न की बरकत और ईश्‍वर की कृपा बनाए रखने का मार्ग प्रशस्त करता है.
– कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा बलि प्रतिपदा भी है, जिसे महाराष्ट्र में दिवाली पाडवा कहते हैं.
– यह वर्ष के साढ़े तीन मुहूर्तों में गिनी जाती है यानी उन शुभ दिनों में जब बहुत से लोग अलग मुहूर्त देखे बिना नया कार्य आरंभ करते हैं.
– गुजरात में यह नव वर्ष का पहला दिन है, जिसमें विक्रम संवत् 2083 आरंभ होता है.
– मुंबई में, जहां गुजराती, मराठी और मारवाड़ी समुदाय अपना व्यापारिक वर्ष लगभग इसी समय शुरू करते हैं, यह दिन विशेष रूप से अर्थपूर्ण है.
– व्यापारियों के लिए, नया संवत् आरंभ करने वाली प्रतिपदा एक स्पष्ट निमंत्रण है: नई बही खोलें, पिछले वर्ष का हिसाब देखें और नए वर्ष का पहला लक्ष्य तय करें.

वास्तु के अनुसार
– अन्नकूट को पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व या पूर्व में गोलाकार ढेर के रूप में सजाएं और ऊपर एक तुलसी पत्र रखें.
– गोबर से गोवर्धन की छोटी आकृति बनाकर पूजा करें.
– यदि यह संभव न हो, तो चावल या आटे का छोटा ढेर प्रतीक के रूप में रखा जा सकता है.
– भोजन को दक्षिण-पश्चिम में या रसोई के कचरे वाले हिस्से में न रखें. उसे ऐसी जगह रखें, जहां वह साफ़ और दिखाई दे.
– अर्पण के बाद भोजन बांटें, पड़ोसियों, अतिथियों और ज़रूरतमंदों में. जो अन्नकूट बांटा नहीं जाता, उसका अर्थ खो जाता है.
– प्रवेश द्वार को रंगोली से सजाएं, क्योंकि नव वर्ष की भेंट द्वार से ही शुरू होती है.

गोवर्धन पूजा कैसे करें?
– सुबह स्नान करके तरह-तरह के सादे शाकाहारी व्यंजन बनाएं.
– गोवर्धन पर्वत (गोबर या मिट्टी से बने स्वरूप) की स्थापना करें.
– गोवर्धन पर्वत को जल, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें.
– श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए तुलसी दल चढ़ाएं.
– नमो भगवते वासुदेवाय और गोवर्धन स्तुति मंत्रों का जाप करें.
– भगवान को अन्नकूट (विभिन्न व्यंजन) का भोग लगाएं.
– यदि संभव हो, तो गायों को खिलाएं या गोवर्धन के नाम पर चारा दान करें.
– प्रसाद पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों में बांटें.
– यदि आप व्यापार में हैं, तो नई बही खोलें और वर्ष का पहला संकल्प लिखें.

 

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भाई दूज: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार और मज़बूती का पर्व

मंगलवार, 10 नवंबर 2026 ङ शुक्ल द्वितीया, कार्तिकभाई दूज भाई-बहन के अटूट प्रेम और रिश्ते को मज़बूत करने का पावन पर्व है. इस दिन बहन अपने भाई की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती है.

तिलक के पीछे की कथा
परंपरा के अनुसार, मृत्यु और धर्म के देवता यमराज और उनकी जुड़वां बहन यमुना, दोनों सूर्य देव की संतान हैं. लंबे वियोग के बाद यमराज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना से मिलने आए. यमुना ने उनका स्वागत माथे पर तिलक लगाकर, प्रेम से बनाए भोजन और दीपक से किया. प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक लगवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा.

तिलक की रस्म के लिए वास्तु
– थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और नारियल या सूखे मेवे सजाकर शुरू करने से पहले उत्तर-पूर्व में रखें.
– भाई को इस प्रकार बिठाएं कि दोनों का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो, जो शुभ आरंभ की दिशाएं मानी जाती हैं.
– साफ़ आसन या नीची चौकी का उपयोग करें और उस स्थान को सामान या जूतों-चप्पलों से मुक्त रखें.
– तिलक से पहले दीपक जलाएं और भाई के स्वास्थ्य के लिए छोटी प्रार्थना करें.
– रोली, चावल और पुष्प से भाई का तिलक करें.
– बहन भाई को मिठाई खिलाएं और उपहार दे.
– भाई भी बहन को उपहार और आशीर्वाद दे.

इस वर्ष भाई-बहन का रिश्ता गहरा करने के तीन तरी़के
– सबसे पुरानी शिकायत माफ़ करें. कोई एक पुरानी असहमति चुनें और आज उसे जाने दें. शनि उसी को फल देता है, जो धीमा काम पहले करता है.

– दूर से भी तिलक की प्रार्थना करें. आज तो वीडियो कॉल पर भी भाई-बहन कनेक्ट हो सकते हैं. यदि मिलना संभव न हो तो भाई-बहन के कल्याण की सच्ची प्रार्थना पर्व की भावना को निभाती है.

– कुछ ऐसा दें जो टिके. उपहार से ज़्यादा ध्यान मायने रखता है. एक किताब, हाथ से लिखा पत्र या हर महीने फोन करने का वादा किसी ख़रीदारी से अधिक क़ीमती है.

Sources: Shutterstock

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