आईआरएस ऑफिसर समीर वानखेड़े की गिनती एक सख़्त अधिकारी के रूप में होती रही है. उन्होंने अपने पूरे करियर में न जाने कितने अपराधियों पकड़ा तो वहीं कई रैकेट का पर्दाफाश किया.

मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में जानेेंगे समीर वानखेड़े की मेहनत-लगन, बहादुरी के साथ-साथ स्ट्रग्लस के बारे में, पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें-
अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है कि कैसे एक ईमानदार ऑफिसर कभी पॉलिटिक्स का तो कभी षडयंत्र का शिकार हो जाता है. लेकिन जब हक़ीक़त की धरातल पर ही ऐसा होने लगे तब किसी से किस बात के न्याय की गुहार लगाई जाए.
अपने करियर में जब से समीर वानखेड़े ने कार्यभार संभाला है, तब से वे अपने हर काम को पूरी निष्ठा के साथ करते रहे. फिर चाहे वो एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) के जोनल डायरेक्टर के रूप में कार्यरत रहे हों या फिर महाराष्ट्र सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट में हों. हर जगह उन्होंने अपने काम और बेख़ौफ़ एक्शन से हर किसी को प्रभावित किया.
क्या आप जानते हैं टैक्स विभाग में रहते हुए उन्होंने क़रीब ढाई हज़ार से अधिक लोगों की टैक्स चोरी पकड़ी और उन्हें सामने लाया था. दिलचस्प बात यह रही कि उनमें से तक़रीबन दो सौ से अधिक बड़ी फिल्मी हस्तियां भी रहीं. तब उन्होंने राजस्व को 87 करोड़ का लाभ पहुंचाया था.
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लेकिन सबसे अधिक लाइमलाइट में रहे शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस. उस समय एक तरफ़ उन्हें वाहवाही भी मिली तो दूसरी तरफ़ धमकी और आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा. उस पर इंक्वॉयरी बैठी सो अलग. ट्रांसफर हो गया, विभाग बदल गए, केसेस चल रहे, पर नहीं बदला समीर वानखेड़े का रवैया. वे आज भी अपने काम को लेकर उतने ही कर्त्तव्यनिष्ठ हैं, जितना पहले थे. उनका तो मानना है कि समस्याओं और दबावों से मैं घबराता नहीं, बल्कि मुझे ताक़त मिलती है.

यह उनके स्वाभिमान की भी बात रही जो उन्होंने आर्यन खान की वेब सीरीज़ में उन्हें बदनाम करने और उनकी छवि ख़राब करने को लेकर उन पर ही मानहानि का दावा तक कर दिया.
कई बातें हो रही हैं, कहीं ईमानदारी को शिकार बनाया जा रहा तो कहीं फिल्मी दुनिया से लेकर राजनीति के महकमे तक अपना अलग प्रभाव इस्तेमाल कर रहें. लेकिन इन सब को झेलते हुए भी समीर जी का तो यही कहना है कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं. अब देखते हैं कि अधिकारी, कलाकार, क़ानून, कोर्ट-कचहरी की लड़ाइयां कब तक चलती हैं.
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जब समीर वानखेड़े ने पॉलिटिशियन नवाब मलिक के बेटे को गिरफ़्तार किया था. तब उन्होंने समीर को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, यहां तक की उनकी पर्सनल लाइफ को भी ख़ूब उछाला था. कैसे उन्होंने मुस्लिम धर्म अपना लिया है और अपनी पढ़ाई और पद को लेकर धोखे देते रहे हैं. आख़िरकार परेशान होकर समीर जी ने हलफनामा दायर किया कि उनकी पिता हिंदू और मां मुस्लिम थीं. उन्होंने पहले मुस्लिम महिला से शादी की थी, लेकिन आपसी सहमति से तलाक़ होने के बाद उन्होंने दूसरी शादी की. उनकी दो बेटियां हैं. वैसे तो उन्होंने बहुत बातें कहीं. लेकिन अक्सर देखा गया है कि जब किसी केस में विरोधियों की दाल नहीं गलती तब उन्हेंे व्यक्तिगत प्रहार करना सबसे आसान टार्गेट लगता है और यही समीर वानखेड़े के साथ भी हुआ.
बहुत कम लोग समीर वानखेड़े को क़रीब से जानते हैं. तो क्यों न उनके संघर्ष यात्रा से लेकर कर्त्तव्यनिष्ठा के बारे में उनसे ही जानें मेरी सहेली के पॉडकास्ट में, ताकि उन्हें क़रीब से जान-समझ सकें.

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