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काव्य-अगले‌ बरस प्रभु फिर से आना… (Ganpati Bappa Morya- Agle Baras Prabhu Phir Se Aana…)

आराधन मन से करें, हे लंबोदर आज

तव प्रवास था दस दिवस, पुलकित हुआ समाज

हाथ जोड़ विनती करें, पुनः पधारें आप

भूल चूक सब कर क्षमा, हरें सकल संताप

स्वागत हम सब फिर करें, रखते हैं मन आस

प्रभु का हो पुनरागमन, बिखरे पुनः सुवास

हे गजानन नमन करते, आपको कर जोड़ कर

भक्ति में हों लीन हम सब, अहं सारे छोड़ कर

आपकी आराधना पूजा, हम सभी दिल से करें

भक्ति के अनुपम अनूठे, भाव दिल में हम भरें

माल्य अर्पण कर रहे हम, पुष्प लड़ियां जोड़ कर

जुड़ रहे कंधे बहुत से, भेद कोई है नहीं

मात्र दर्शन की ललक है, दृष्टि स्थिर है वहीं

आपके द्वारे उमड़ते, सर्व बंधन तोड़ कर

एकता की एक आंधी, हर कहीं पर चल रही

हो रही बप्पा की जय-जय, सबसे मधुर सुर है यही

आप समरसता बिखेरें, भाव धारा मोड़ कर

भोग में लड्डू चढ़ाते, नारियल भी फोड़ कर

हे गजानन नमन करते, आपको कर जोड़ कर…

– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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Photo Courtesy: Social Media

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