आज मैं अपने सपने को जी रही हूं… श्‍वेता मेहता: फिटनेस एथलीट/रोडीज़ राइज़िंग 2017 विनर (I Am Living My Dream: Shweta Mehta- Fitness Athlete/Roadies Rising 2017 Winner)

हर नज़र में सवाल था, हर लफ़्ज़ पर ख़ामोशी… मुझसे मेरा वजूद पूछ रहा था, कितनी तन्हा है तू और कितनी है टूटी… मैंने अपने ख़्वाबों की धड़कनों को सुना, तो हर आहट में एक और नया सपना बुना… देखनेवाले देखते रह जाएंगे, मैंने फूलों को नहीं, है कांटों को चुना… हर मोड़ पर उलझी हूं मैं, हर राह पर अपना ही अक्स देखा है मैंने… वजूद मेरा इतना कमज़ोर नहीं, सूरज में तपकर रातों में चलना सीखा है मैंने…
ये पंक्तियां ख़ासतौर से हमने एक ऐसी शख़्सियत के मुकम्मल व्यक्तित्व को बयां करने के लिए लिखी हैं, जो शब्दों से परे है… अपने सपनों को उसने अपने हौसलों से जीवंत किया और आज हर ज़ुबान से उसका नाम बेहद सम्मान और गर्व से लिया जाता है. हम बात कर रहे हैं फिटनेस एथलीट और रोडीज़ राइज़िंग 2017 की विनर (Roadies Rising 2017 Winner) श्‍वेता मेहता (Shweta Mehta) की. क्या कुछ महसूस करती हैं श्‍वेता अपनी इस मुश्किल, लेकिन ख़ूबसूरत जर्नी के बारे में, ख़ुद उनसे ही पूछ लेते हैं…

Shweta Mehta, Fitness Athlete, Roadies Rising 2017 Winner

एक आईआईटी प्रोफेशनल से फिटनेस एथलीट तक का सफ़र ज़ाहिर है आसान नहीं रहा होगा?
जी हां, आसान तो नहीं था और वैसे भी जो आसानी से मिल जाए, उसकी क़ीमत भी कहां समझ पाते हैं हम. अगर मैं अपनी बात करूं, तो एक अच्छी-ख़ासी नौकरी थी, सभी पैरेंट्स की तरह मेरे भी पैरेंट्स चाहते थे कि शादी होकर बेटी सेटल हो जाए. अच्छा घर हो, बेहतर ज़िंदगी हो… लेकिन मुझे यह मंज़ूर नहीं था. मैं कुछ अलग करना चाहती थी. यही वजह है कि आज मैं अपने सपने को जी रही हूं.

क्या आप बचपन से ही फिटनेस फ्रीक थीं?
आप शायद विश्‍वास भी नहीं करेंगे कि मैंने जिम जाना मात्र 3 साल पहले ही शुरू किया था. इस बीच मैंने लगभग 5-6 कॉम्पटीशन्स जीते. आज फिटनेस मेरी पहचान बन चुकी है, वरना एक समय था जब मैं बैक पेन से बेहद परेशान थी और मेरा 12 घंटे का डेस्क जॉब इस दर्द को और बढ़ा रहा था. मुझे एक्सरसाइज़ करने का समय ही नहीं मिलता था, लेकिन मेरे लिए यह ज़रूरी हो गया था कि सेक्योर फ्यूचर, जॉब, सैलरी के मायाजाल से बाहर निकलूं. मैंने हिम्मत की और आज रिज़ल्ट सबके सामने है.

घरवालों की क्या प्रतिक्रिया थी?
ज़ाहिर है कि शुरुआत में तो वो भी थोड़े से परेशान हुए थे. मेरी बिकनी में पिक्चर्स देखकर मॉम को थोड़ा बुरा लगा था, क्योंकि आस-पड़ोसवाले, रिश्तेदार, समाज के लोग उन्हें ताने भी देते थे कि क्या तुम्हारी बेटी नाइट क्लब में काम करती है, जो ऐसे कपड़े पहनती है… लेकिन मैं ख़ुशनसीब हूं कि मेरे पैरेंट्स ने मुझे बहुत सपोर्ट किया, जबकि मैं हरियाणा से हूं और मैंने पहले कभी स्लीवलेस ड्रेस तक नहीं पहना था. पापा को भी स्किन रिवीलिंग कपड़े पसंद नहीं थे. उसके बावजूद भी मेरे पैरेंट्स ने स़िर्फ मुझे सपोर्ट किया, बल्कि लोगों की बहुत-सी बातें मुझ तक पहुंचने तक नहीं दीं कि कहीं मैं निराश न हो जाऊं. यह ज़रूर था कि उन्होंने मुझे एक बात कही थी कि हम अगर तुम्हें सपोर्ट कर रहे हैं, तो तुम्हारी ज़िम्मेदारी बनती है कि तुम कुछ बनकर दिखाओ. फिर रोडीज़ में भी मैं ऑडिशन्स में सिलेक्ट नहीं हुई थी, तो उनका कॉन्फिडेंस थोड़ा हिला हुआ ज़रूर था, लेकिन मेरे भाई को मुझ पर भरोसा था, तो मैंने फिर क़िस्मत आज़माई और मैं न स़िर्फ सिलेक्ट हुई, बल्कि विनर भी बनी.

अब समाज के लोगों की क्या प्रतिक्रिया रहती है?
जो लोग ताने मारते थे, आज वही सम्मान देते हैं. मैंने हिम्मत नहीं हारी, न अपना रास्ता बदला, बल्कि बदले वो लोग, जो मुझे और मेरे परिवार को बातें सुनाते थे. समाज ने अपनी सोच बदली, इसी तरह लोगों को अपना नज़रिया बदलना चाहिए. जब तक वो नहीं बदलेंगे, इसी तरह से चीज़ें चलती रहेंगी.
मेरा निजी अनुभव है, मेरी मम्मी टीचर हैं और वो अक्सर मुझे कहती थीं कि अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बिकनी की पिक्चर्स डिलीट कर दे… मैं जानती हूं कि उन्हें क्या-क्या नहीं सुनना पड़ता होगा, लेकिन मैं दूसरों के लिए अपने सपने नहीं तोड़ना चाहती थी, मुझे ख़ुद पर भरोसा था, इसलिए इन बातों ने मेरा कॉन्फिडेंस और बढ़ाया.

रोडीज़ का सफ़र कैसा रहा?
सच पूछो, तो रोडीज़ की जर्नी आसान नहीं थी. अलग-अलग तरह के लोगों के साथ रहना, उनके साथ कॉम्पटीशन करना बेहद मुश्किल था, क्योंकि सब अपने आप में बेस्ट थे और मेरी प्रॉब्लम यह थी कि मैं शुरुआत में इतना समझ नहीं पाती थी कि कैसे रिएक्ट करूं, क्या बोलूं, क्योंकि हमारी तहज़ीब और संस्कार यही सिखाते हैं कि जब कोई और बोल रहा हूं, तो बीच में मत बोलो, जब कोई बड़ा बात कर रहा तो बीच में मत टोको… लेकिन वहां तो सब कुछ अलग था… कैमरे के लिए भी बहुत कुछ किया जाता था, छीना-झपटी और लड़ाई-झगड़े… एक व़क्त ऐसा आ गया था, जब मुझे लगा कि मैं गिवअप कर दूंगी… लेकिन फिर मुझे समझ में आया कि ऐसे तो गेम नहीं खेला जा सकता. मैंने गिवअप का आइडिया ड्रॉप किया और बोलना शुरू किया. जहां ज़रूरत महसूस हुई, वहां टोकना शुरू किया. इस तरह मैं गेम को समझ पाई और फिर विनर भी बनी.

यह भी पढ़ें: क्रिकेट के हॉटेस्ट बॉय विराट कोहली का स्टाइलिश अंदाज़, जानें अनुष्का के साथ परफेक्ट केमिस्ट्री का राज़ और दिलचस्प बातें 

सीरियल बढ़ो बहू में भी आप नज़र आ रही हैं, तो एक्टिंग की तरफ़ रुझान बढ़ रहा है?
एक्टिंग से मुझे परहेज़ नहीं है, लेकिन रोल ऐसा हो, जो मुझे मेरी फिटनेस से दूर न करे. मुझे ख़ासतौर से इस रोल के लिए अप्रोच किया गया, क्योंकि मेकर्स को लगा कि मेरे अलावा कोई और नहीं कर पाएगा, तो यह सुनकर अच्छा लगा कि मेरी पर्सनैलिटी के अनुरूप रोल मिल रहा है, इसलिए हामी भर दी.

बॉलीवुड भी करना चाहेंगी आप?
क्यों नहीं, हर वो चीज़, जो मेरी फिटनेस के आड़े न आए, मैं करूंगी. आज भी सीरियल की शूटिंग में भी काफ़ी बिज़ी रहती हूं, लेकिन चाहे रात के 11 बज जाएं मैं अपना जिम रूटीन नहीं छोड़ती.
वैसे भी मुझे लगता है कि अगर रियलिटी शो के बाद टीवी सीरियल्स और बॉलीवुड का मौका मिल रहा है, तो करना ही चाहिए, क्योंकि हर जगह के ऑडियंस अलग होते हैं. मुझे अपनी पहचान हर तरह के ऑडियंस में बनानी है, चाहे यंगस्टर्स हों, फैमिली हो या देश की आम पब्लिक. रोडीज़ के ऑडिंस अलग हैं, इसी तरह बढ़ो बहो फैमिली शो है और बॉलीवुड तो देश की जनता की धड़कन है.

आज की लाइफस्टाल में फिटनेस का क्या रोल देखती हैं आप? समय बदल गया है, लोग फिटनेस को लेकर थोड़े अलर्ट हुए हैं, लेकिन संख्या अब भी कम है…
हमारे यहां प्रॉब्लम यह है कि हम समय और परिस्थितियों के अनुसार न ख़ुद को ढालते हैं और न ही अपना डायट बदलते हैं. उदाहरण के तौर पर कोई कहता है कि भई हम तो पंजाबी हैं, हम तो तगड़ा ही खाते हैं, कोई कहता है हम गुजराती हैं, मीठा तो छोड़ नहीं सकते… इसी तरह से हम ट्रेडिशन के नाम पर वही डायट फॉलो करते हैं, जो हमारे दादाजी के समय में खाया जाता था. लेकिन यह भी तो सोचो कि वो समय अलग था, उनका काम अलग था. आज हम सभी डेस्क जॉब करते हैं, कहां से पचेगा तगड़ा खाना…?
बेहतर होगा कि मीठा कंट्रोल करें, ऑयली फूड अवॉइड करें, एक्सरसाइज़ करें. ख़ुद की बॉडी से प्यार करें. तब जाकर आप हेल्दी बनोगे.

आप अपने डायट प्लान के बारे में बताइए
कुछ चीज़ें हम सभी को पता होती हैं, लेकिन हम फॉलो नही करते, जैसे- पानी भरपूर पीएं, ऑयली-फैटी फूड कम खाएं, मीठा ज़्यादा न खाएं, प्रोटीन अधिक लें… आदि… लेकिन हम जानते हुए भी फॉलो नहीं करते.
मैं बस हेल्दी चीज़ें लेती हूं और अनहेल्दी चीज़ें अवॉइड करती हूं, यही है डायट.
मैं अपना खाना ख़ुद बनाती हूं. दिन में 6 बार खाती हूं, 2 बार जिम जाती हूं… मैं अपना ये रूटीन नहीं बदलती और इसीलिए फिट रहती हूं.

फ्यूचर प्लान्स क्या हैं?
मैं रियलिटी शोज़ करना चाहती हूं. मैं दिल से चाहती हूं कि फियर फैक्टर का हिस्सा बनूं. मुझे चैलेंजेस पसंद हैं.
वैसे भी आपको वही करना चाहिए, जो आपको पसंद हो, इसीलिए मेरा यूट्यूब चैनल भी आ रहा है, जिसमें हमारी टैगलाइन यही है- Do what you want to do (डू व्हाट यू वॉन्ट टु डू) यानी आप वही करें, जो आप करना चाहते हैं.

शहर में अपने प्रदेश की कोई ख़ास बात जो आप मिस करती हैं?
जो अपनापन वहां है, वो इन शहरों में नहीं है. एक अलग ही एनर्जी होती है वहां. कोई घर पर आ जाए, तो उसकी मेहमांनवाज़ी में हमें अलग ही ख़ुशी होती है. हमें लगता है कि क्या बनाकर खिला दें, क्या नहीं… कहीं कोई कमी न रह जाए. लेकिन यहां तो कोई पानी भी नहीं पूछता… तो एक चीज़ बहुत मिस करती हूं मैं.

फ्री टाइम में क्या करना पसंद है?
सच पूछो, तो फ्री टाइम मिलता ही कहां है. बाकी जो समय है वो मैं अपने मील्स बनाने में बिताती हूं, मैं ख़ुद को बेटर कैसे कर सकती हूं इसी कोशिश में रहती हूं और हम सभी को यही कोशिश करनी चाहिए.

आपके तो लाखों फैंस हैं, आप किसकी फैन हैं?
मुझे ड्वेन जॉनसन पसंद है. हां, अगर बात इंडिया की है, तो एक बंदा है जिसकी मैं ज़बर्दस्त फैन हूं, वो है दिलजीत दुसांज. उनकी स्ट्रगल स्टोरी हमेशा मुझे इंस्पायर करती है. किस तरह एक गांव से निकलर लाखों-करोड़ों की भीड़ में अपनी पहचान बनाई और उसके बाद भी वो इतने सहज हैं, उनके पांव ज़मीन से जुड़े हैं… न कोई घमंड, न एटीट्यूड. वो सच में एक प्रेरणास्रोत हैं.