Close

काव्य- अनकहा सच (Kavay- Ankaha Sach)

जो कुछ भी तुमने कहा

वह सच नहीं है

अगर कुछ है भी तो

बेमतलब-बेतुका

राजनैतिक हलचल

मौसम का हाल

क्या यही सब कहने सुनने

तुम इतनी दूर आए थे?

सच वह है जो

चेहरे पर उभरा

आंखों में छलका

और महसूस कर लिया

बिना शब्दों में बंधे

सब समझ लिया

कहा कुछ भी नहीं

मगर

कुछ भी अनकहा नहीं रहा...

- उषा वधवा

यह भी पढ़े: Shayeri

Share this article