कविता- ईर, बीर, फत्ते और हम (Kav...

कविता- ईर, बीर, फत्ते और हम (Kavita- Eer, Bir, Phatte Aur Hum)

एक रहेन ईर
एक रहेन बीर
एक रहेन फत्ते
एक रहेन हमहू

ईर कहे चलो हम न्यूज़ देखी
बीर कहे चलो हम न्यूज़ देखी
फत्ते कहे चलो हम न्यूज़ देखी
हम कहे चलो हमहू न्यूज़ देखी

दिखी उत्तराखंड की बाढ़ तमाम
रोकने में इंसान रहा नाकाम
उसमें बताए गए कारण सारे
पेड़ काटने से हुए गृहस्थ बंजारे

ईर लिखा एक लेख
बीर लिखा दुइ लेख
फत्ते बनाया डॉक्यूमेंट्री फिल्म
हम लगावा एक पौधा

एक रहेन ईर
एक रहेन बीर
एक रहेन फत्ते
एक रहेन हमहू

ईर कहे चलो हम फॉरेन घूम आई
बीर कहे चलो हम फॉरेन घूम आई
फत्ते कहे चलो हम फॉरेन घूम आई
हम कहे चलो हमहू फॉरेन घूम आई

ईर लाए एक गिफ्ट
बीर लाए कई गिफ्ट
फत्ते लाए पूरी दुकान
हम लावा संकल्प कि नियम अब वहां की तरह पालेंगे
कर कूड़े का निस्तारण ठीक, अपना दायित्व सम्हालेंगे

एक रहेन ईर
एक रहेन बीर
एक रहेन फत्ते
एक रहेन हमहू

ईर कहे चलो हम समाचार पढ़ी
बीर कहे चलो हम समाचार पढ़ी
फत्ते कहे चलो हम समाचार पढ़ी
हम कहे चलो हमहू समाचार पढ़ी

उसमें लिखा रहा बिटियन पर अत्याचार भवा
उन सबका बचपन सारा बिखर गवा
ईर कोसा एक सरकार को
बीर कोसा दुइ सरकारन को
फत्ते कोसा सभी सरकारन को
हम लगाईं एक सभा, जिसमें वंचित बच्चे रहे थे तीन-चार
दिया थोड़ा प्यार, निर्देशन, ताकि अपराधी न बने वो हार

एक रहेन ईर
एक रहेन बीर
एक रहेन फत्ते
एक रहेन हमहू

– भावना प्रकाश

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Photo Courtesy: Freepik

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