मां सभी के लिए ज़िंदगी में बहुत कुछ होती है, कभी वो प्रेरणा बनती है, तो कभी जीने का सहारा, तो कभी ढाल और हौसलाअफ़जाई... सेलेब्स का भी अपनी मांओं से अटूट रिश्ता होता है, जिस पर वे गर्व करते हैं, अपने इसी एहसास को वे कुछ यूं बयां करते हैं...
मां के लिए क्या लिखूं
मां ने तो मुझे लिखा है...

रणवीर सिंह
रणवीर सिंह अपनी मां अंजू भवनानी के बेहद क़रीब हैं. वे अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताक़त और देवी समान मानते हैं. चाहे फिल्मी करियर के शुरुआती संघर्ष भरे उतार-चढ़ाव वाला दौर रहे हो या फिर तमाम जगहों से रिजेक्शन की हताशा रही हो, मां ने हमेशा बेटे रणवीर का साथ दिया और उनका सपोर्ट सिस्टम बनी रहीं. वे अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को ही देते हैं.
एक अवॉर्ड शो में जब रणवीर को पुरस्कार दिया गया तब उनकी मां रो पड़ी थीं. उस दौरान अपने बेबाक़ और इमोशनल अंदाज़ में रणवीर ने कहा कि सालों पहले भी तुम रो रही थी और आज भी रो रही हो... मैं जानता हूं कि ये आंसू तेरे बेटे की कामयाबी की ख़ुशी के हैं. तुम रोना बंद कर दो वरना मैं भी रो दूंगा...
डंके की चोट पर रणवीर लोगों से यह कहने से भी नहीं चूकते कि मैं सालों से आप सभी को एंटरटेन कर रहा हूं, मैं अपनी मां की क़सम खाता हूं कि जब तक ज़िंदा रहूंगा, आप सभी को ऐसे ही एंटरटेन करता रहूंगा...

विक्की कौशल
मां ने मेरे मुश्किल के दिनों में हमेशा मुझे न केवल संभाला, बल्कि आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने मुझे हमेशा ज़मीन से जुड़े रहना सिखाया. मुझे अपनी मां पर गर्व है... अपनी मां वीना के बारे में कहते हुए भावुक हो जाते हैं विक्की कौशल.
उनका कहना है कि जब वे स्ट्रगल कर रहे थे और उन्हें काम नहीं मिल रहा था, तब वे अपने करियर को लेकर नाउम्मीद होते जा रहे थे. ऐसे कठिन समय में मां उन्हें समझाती रहतीं कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा. बस, वे हिम्मत न हारें.
अपनी मां की सादगी और परिवार के प्रति निस्वार्थ भाव उनके दिल को छू जाती है. उन्हें आज भी याद है जब उन्हें काम नहीं मिल रहा था, ऑडिशंस में रिजेक्ट हो रहे थे, कोई उन्हें प्रोजेक्ट में कास्ट नहीं कर रहा था. उन दिनों जब वे घर जाते मां से कहते कि मैं अपने ख़्वाबों को बिखरते हुए देख रहा हूं. आख़िर क्यों असफलताएं मेरा पीछा नहीं छोड़ रहीं. तब उनकी मां कहतीं, “तू ये मत सोचना कि क्यों और कैसे ये सब हो रहा है. बस, तू होगा, सब ठीक होगा, ये यक़ीन रखना.” मां ने विक्की के मन में इतनी पॉजिटिवनेस भर दी कि फिर वे सकारात्मक होकर करियर को देखने लगे और रिजल्ट हम सभी के सामने है.
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सारा अली खान
मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा, शक्ति और सपोर्ट सिस्टम हैं. उन्होंने अकेले ही हम दोनों (भाई इब्राहिम) की परवरिश की है. वे इतनी साहसी हैं कि अपनी बात को निडरता से रखती हैं. उनसे ही मैंने ज़िंदगी में मज़बूती से खड़ा रहना सीखा है. मेरा यह मानना है कि मां जैसी ताक़त दुनिया में कोई नहीं है. मेरी मां सबसे अलग और अनोखी हैं. वे मेरी सहेली, आधार और मार्गदर्शक भी हैं. मुझे उन पर गर्व है.

रश्मिका मंदाना
अम्मा ने मुश्किल समय में हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है. जब कभी मैं डांवाडोल होती हूं. ख़ुद पर ही विश्वास नहीं होता कि मैं यह कर पाऊंगी या नहीं. ऐसे नाज़ुक घड़ी में वे मेरी सभी शंका-आशंकाओं को दूर करती हैं. मुझमें विश्वास जगाती हैं. वे इतना निस्वार्थ प्यार देती हैं कि मैं एक बार फिर मज़बूती से खड़ी हो जाती हूं. अम्मा ने मुझे हमेशा आत्मनिर्भर नारी बनने के लिए प्रेरित किया है. पहले अक्सर काम के प्रेशर के कारण मैं हिम्मत हार जाती थी, रोने लगती थी. तब मां न केवल मुझे संभालती थीं, बल्कि सही तरह से गाइड भी करती थीं. मुझे याद है मैंने अपनी पहली ख़रीदारी के रूप में अपनी मां के लिए गहने ख़रीदे थे. मेरी मां मेरा सबसे बड़ा सहारा और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक हैं.

कार्तिक आर्यन
मेरी मां ने एक बहादुर सैनिक की तरह कैंसर को मात दी है. कीमोथेरेपी के उन तकलीफ़ भरे दिनों में वे हमेशा सकारात्मक रहीं और फैमिली की भी स्ट्रेंथ बनी रहीं. आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि मेरी मां ने कैंसर से जंग लड़ी और जीत हासिल की. इससे मैंने यह सीखा कि परिवार के प्यार व सहयोग से बड़ी कोई सुपर पावर नहीं है. मेरी मां को मेरी कामयाबी को देखकर बेहद ख़ुशी और गर्व होता है. लेकिन साथ ही उन्हें बेटे को कहीं नज़र न लग जाए, जैसी चिंता भी लगी रहती है.
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युवराज सिंह
मेरी मां ने मुझे दो बार जन्म दिया है. कैंसर जैसी बीमारी व उस मुश्किल भरे दौर में वे मेरे साथ साये की तरह रहीं. मेरी मां मेरे लिए शक्ति का स्त्रोत रही हैं. मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा आधार हैं वो. कैंसर की लड़ाई में मां ढाल बनकर खड़ी रहीं. हार मानने नहीं दिया. ख़ुद भी हिम्मत रखी और मेरा भी हरदम हौसला बढ़ाया. मैं उन्हें अपना असली हीरो मानता हूं.

विराट कोहली
मेरी कामयाबी के पीछे मेरी मां का निस्वार्थ त्याग रहा है. मुझे उन पर गर्व है. वे मेरी ताक़त और सहारा रही हैं. आज मैं जो कुछ भी हूंू, इसमें उनका संघर्ष व आशीर्वाद है. मुझे जो भी अवॉर्ड मिलते हैं, वो मैं मां के पास गुरुग्राम भेज देता हूं. इस पर उनका हक़ है. वे उन्हें संभाल कर रखती हैं. मेरी मां मेरा रब हैं. वे अक्सर मुझसे फोन पर पूछती रहती हैं कि मैं कितना दुबला हो गया हूं. अपना ठीक से ख़्याल रखता हूं कि नहीं, खाना बराबर खा रहा हूं ना?.. बीमार तो नहीं हूं... जैसे सवाल करती रहती हैं. जबकि सभी जानते हैं कि फिट रहने के लिए मैं डायट को फॉलो करता हूं. पर मां तो मां है.
- ऊषा गुप्ता

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