राष्ट्रीय खेल दिवस पर विशेष: वुमन पावर- मानसी जोशी: पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतना सपने के पूरा होने जैसा है… (National Sports Day: Woman Power- India’s Para-Badminton World Champion Manasi Joshi)

समय के साथ भारतीय महिला खिलाड़ियों ने खेल में अपना दमखम व वर्चस्व बेहतरीन तरी़के से साबित किया है. इस पर पीवी सिंधु ने तो ऐसा इतिहास रच दिया है कि हर भारतीय गर्व से अभिभूत हो गया है. एक तरफ़ जहां सिंधु इतिहास रच रही थीं, वहीं इसके पहले ही पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप 2019 में मानसी जोशी ने भी कामयाबी की एक नई इबारत लिख दी. वहीं स्विट्ज़रलैंड के बासेल में हुए इस प्रतियोगिता के फाइनल में उन्होंने हमवतन पारुल परमार को हराकर स्वर्ण पदक जीता. वैसे पारुल भी इस प्रतियोगिता में तीन बार की गोल्ड विनर रह चुकी हैं. मानसी जोशी ने जीत के बाद भावुक होते हुए कहा कि यह किसी सपने के पूरा होने जैसा है…

National Sports Day

मानसी की संघर्षपूर्ण यात्रा…

* मानसी जोशी को बचपन से ही बैडमिंटन खेलने का शौक था.

* उनके पिता मुंबई के भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में कार्यरत हैं.

* यहीं से मानसी के बैैडमिंटन खेल में निखार आने लगा और उन्होंने स्कूल व ज़िला स्तर पर कई मेडल्स जीते.

* दुखद रहा साल 2011, जब उन्होंने एक रोड एक्सीडेंट में अपना बायां पैर खो दिया और दो महीने तक हॉस्पिटल में रहीं.

* लेकिन इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर तीस वर्षीया मानसी ने हार नहीं मानी और चार साल बाद पी. गोपीचंद एकेडमी ज्वाइन किया.

* पांच साल तक वे कड़ी मेहनत के साथ प्रैक्टिस करती रहीं और खेलती रहीं.

* मैच में अपना सौ प्रतिशत देने के लिए उन्होंने अपना वज़न कम किया. बॉडी की फैक्सिबिलिटी व स्ट्रैचिंग पर अधिक ध्यान दिया.

* मुश्किलों से भरी उनकी ट्रेनिंग में वे एक दिन में तीन सेशन ट्रेनिंग करती थीं.

* वे फिटनेस पर भी बहुत ध्यान देती थीं. जिम में हफ़्ते में छह दिन ख़ूब वर्कआउट करतीं और पसीना बहाती थीं.

* यूं तो अब मानसी चलने-फिरने के लिए नए वॉकिंग प्रोसथेसिस सॉकेट का इस्तेमाल कर रही हैं, पर इसके पहले वे लगभग पांच साल तक एक ही सॉकेट का उपयोग कर रही थीं. इसी वजह से खेलने व वर्कआउट करते समय उनकी स्पीड अधिक नहीं हो पाती थी.

* आख़िरकार वे विश्‍व पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप के महिला एकल एसएल-3 के फाइनल में पहुंचकर 21-12, 21-7 से तीन बार की विश्‍व चैंपियन पारुल परमार को हराकर विश्‍व विजेता बनीं.

* एसएल 3 कैटेगरी में वे प्लेयर शामिल होते हैं, जिनके एक या दोनों लोअर लिंब्स काम नहीं करते और जिन्हें चलते या दौड़ते समय बैलेंस बनाने में भी द़िक्क़तों का सामना करना पड़ता है.

* प्रमोद भगत व मनोज सरकार ने पुरुषों के डबल्स में एसएल 3-4 कैटेगरी में हमवतन तरुण ढिल्लों व नितेश कुमार को 14-21, 21-15, 21-16 से हराकर गोल्ड जीता.

* प्रमोद भगत ने मेल सिंगल एसएल 3 के फाइनल में इंग्लैंड के डेनियल बैथल को 6-21, 21-14, 21-5 से हराकर गोल्ड पर कब्ज़ा जमाया. इसके अलावा उन्होंने पुरुष युगल एसएल 3-4 में भी मेडल जीते.

* तरुण कोना को पुरुष सिंगल के एसएल 4 के फाइनल में फ्रांस के लुकास मजूर से हारकर रजत से ही संतोष करना पड़ा.

Manasi Joshi

मानसी ने अपनी जीत का श्रेय पी. गोपीचंदजी, उनके स्टाफ व अकादमी को भी दिया है. बकौल उनके सभी ने उनका काफ़ी साथ दिया. उन्होंने गोपी सर को विशेष रूप से धन्यवाद दिया, क्योंकि वे उनके हर मैच में न केवल उपस्थित रहे, बल्कि मानसी का हौसला भी बढ़ाते रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी और खेल मंत्री किरन रिजिजू ने वर्ल्ड पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में कुल बारह पदक जीतने पर सभी खिलाड़ियों की जमकर तारीफ़ की.

पीएम मोदीजी- 130 करोड़ भारतीयों को पैरा बैडमिंटन टीम पर बेहद गर्व है. इस टीम ने बीडब्ल्यूएफ पैरा वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप 2019 में बारह मेडल जीते. पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई! इनकी सफलता काफ़ी ख़ुशी देनेवाली व प्रेरणादायी है. इनमें से हर खिलाड़ी असाधारण है.

किरन रिजिजूजी ने भी सभी खिलाड़ियों के स्वदेश लौटने पर उनका सम्मान किया. साथ ही सभी पैरा बैडमिंटन प्लेयर्स को पहली बार नकद धनराशि भी दी गई. इसके अलावा इसके कुछ नियम भी बदले गए, ताकि खिलाड़ियों को अधिक सहूलियत मिल सके और वे और आगे बढ़ सके. सभी पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों को मेरी सहेली की तरफ़ से बहुत-बहुत बधाई और अगली प्रतियोगिताओं के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं. वेल डन!.. ऑल द बेस्ट!..

– ऊषा गुप्ता

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