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व्यंग्य- द नींबू की कार्ड्स एंड कॉकटेल पार्टी (Satire- The Nimbu Ki Cards And Cocktail Party)

विदेशी मेहमान द नींबूजी की तारीफ़ करते ना थक रहे थे. मैंगोस्टीन ने बताया, "द नींबूजी, विश्व सुंदरी ऐश्वर्या रॉय के द्वारा भी प्रमोट किए गए हैं. 'नींबूड़ा नींबूडा…' गाने में, जो आजकल ट्रेंडिंग है…" सभी ने एक सुर में हां में हां मिलाई और तालियों की गड़गड़ाहट. नींबू की ख़ुशी का मानो ठिकाना ना था, पर फिर भी एक अजीब-सी बेचैनी मन में घर किए बैठी थी.

नींबू ने जो गज़ब की सफलता पाई है अभी कुछ समय में वो सच में बधाई के योग्य है. हर जगह बस नींबू के ही चर्चे हैं. आम से लेकर ख़ास तक, अख़बार से लेकर सरकार तक, व्यंग्यकार से लेकर वॉट्सएप के ज्ञानी मैसेज तक, इंस्टा की रील्स, यूट्यूब के शॉट्स से लेकर एनिमेटेड वेब सीरीज़ तक हर जगह बस नींबू ने अपनी पकड़ ऐसे बनाई है जैसे हर्षद मेहता के समय में शेयर के भाव थे.
तो इसी उपलक्ष्य में नींबू ने रखी एक कॉकटेल पार्टी, क्योंकि देश-विदेश से सभी परिचितों और ख़ास अजनबियों के इतने बधाई और पार्टी के कॉल आ चुके कि अब स्वयं नींबू, नींबू ना रहकर, 'द नींबू' हो गया, जिससे सभी मिलना चाहते हैं.
कुछ साग-सब्ज़ियां और फल भी, नींबू की इस अपार सफलता से कुढ़ रहे हैं, कुछ ईर्ष्यावश बुराई कर रहे हैं, कुछ फ्री की पार्टी मिलने की ख़ुशी में मग्न हैं, कुछ सच में ख़ुश हैं और कुछ भुगतभोगी, ये जानते हैं कि ये सब चकाचौंध ज़रा-सी देर की है, फिर वही ढाक के तीन पात.

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नींबू का सबसे पक्का साथ रहा है मिर्ची के साथ, नींबू की तरक़्क़ी की ख़बर मिलते ही सबसे पहले वो आई थी, नाचती-झूमती, बधाई दी, साथ में नज़र भी उतारी थी नींबू की. पर पार्टी का न्योता अब तक उसे ना मिला था, ख़बर पहले मिल गई थी, सो वो तैयारी में लग गई.
मिर्ची को उसके मॉं, बाबा, प्याज़ चाची, काली मिर्च मौसी लगभग सभी ने समझाया, पर वो प्रेम दीवानी बोली, "नींबू मुझे ना बुलाए, ऐसा भी हो सकता है भला? और वे भी अपनों को क्या न्यौता देना, हम तो मेजबान हैं, मेहमान थोड़ी!"
अब उसे कैसे समझाए कि एकदम से मिली अतिशय शौहरत आदमी के सिर चढ़ जाती है, तो भला नींबू जैसा भोला जीव उससे अछूता कैसे रहता? वैसे भी बरसों से मानवों के बीच रहते उनके रंग सभी पर चढ़ गए है आजकल.
ख़ैर, नींबू ने आख़िर अपनी देसी मिर्ची को बताया शाम को पार्टी है, तुम ज़रूर आना!
मिर्ची ने सबको गर्व से त्यौरियां दिखाई मानो कह रही हो, 'देखा…'
शाम की पार्टी की कवरेज के लिए मीडिया में गहमागहमी थी. विदेशी सब्ज़ियां और फल भी शिरकत जो करनेवाले थे. पार्टी हॉल की सजावट का क्या कहें. अगर स्वर्ग की कल्पना की होगी किसी ने तो बस वैसी ही आकर्षक साज-सज्जा, चारों ओर मधुर सुर संगीत ने भी सबको मुग्ध कर रखा था.
तभी द नींबू साहब पधारे, स्वागत में चारों ओर से पुष्प वर्षा होने लगी, पर… पर उनके साथ तो प्यारी मिर्ची को होना था, पर वो तो अपने साथ एक ओर जेलपीनो और दूसरी ओर कैरोलीना रीपर के साथ आए थे. एक बला की ख़ूबसूरत लग रही थी और दूसरी सबसे तेज का खिताब लिए इठलाती मित्र नींबू का हाथ थामे सबसे मिल रही थी.


यूं भी कोरोना के बाद ऐसे जानदार और शानदार पहली पार्टी थी शायद. एक तरफ़ देसी सब्ज़ियां नींबू के इस व्यवहार से नाख़ुश थीं, बोलीं, "हमारी बेटी के साथ रंगभेद के नाम पर भेदभाव हुआ है. हमारी देसी मिर्चियां किसी से कम है के? अरे वर्ल्ड रिकॉर्ड तो इनके नाम भी है, तीखी तेज तर्रार होने का, बस रंग ज़रा गहरा है, तो नींबू ने आज उन विदेशियों को चुन लिया?" ये कहकर मिर्ची के परिवारवाले उसे अपने साथ वापस ले गए और कुछ भाजियां उनसे सहमत, अपना विरोध जताती मीडिया में अपनी सशक्त बात बताकर पार्टी से चली गईं.
दूसरी तरफ़ विदेशी मेहमान द नींबूजी की तारीफ़ करते ना थक रहे थे. मैंगोस्टीन ने बताया, "द नींबूजी, विश्व सुंदरी ऐश्वर्या रॉय के द्वारा भी प्रमोट किए गए हैं. 'नींबूड़ा नींबूडा…' गाने में, जो आजकल ट्रेंडिंग है…" सभी ने एक सुर में हां में हां मिलाई और तालियों की गड़गड़ाहट. नींबू की ख़ुशी का मानो ठिकाना ना था, पर फिर भी एक अजीब-सी बेचैनी मन में घर किए बैठी थी.
वहीं कुछ कोने में बातें बना रहे थे. खटाई का काम तो टमाटर, इमली, अमचूर और नींबू के (फूल) सत या दही भी कर लेते हैं, ये फसल कम होना या ख़राब होना, सब कालाबाजारी करके नींबू ने अपना दाम, नाम और शौहरत बढ़ाने के लिए किया है…
प्याज़ के बिना आधे से ज़्यादा विश्व नहीं रह सकता और वही बात आलू की भी है, पर नींबू? नींबू में ऐसा क्या है? विटामिन सी तो संतरा भी देता है और ऊपर से वो सुंदर बड़ा फल भी है, नींबू तो…
ये बातें भी नींबू श्री तक पहुंच रही थी, पर अभी वो बस आज की पार्टी एंजॉय करना चाहते थे. फिर ख़ूब कार्ड्स खेले गए और मॉकटेल, कॉकटेल भी चली. जैसी सभी बड़ी पार्टियां होती हैं वैसी ही ये भी रही.

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पर पार्टी ख़त्म होते ही, नींबू जाकर अपने पुराने दिनों को याद करने लगा, नाम दाम ना सही, लोगों का कितना स्नेह था, बीमारी से लेकर मेहमानों तक में उसकी पूछ थी, पर अभी? अभी केवल नेताओं में चर्चा है, कवि/ लेखक के उपमाओं में स्थान है और लोगों की रील्स और तानों में उसका नाम है.
तभी उसकी चहेती मिर्ची ने आकर पीछे से एक धौल दी, "क्यों बच्चू? इतना बड़ा आयोजन करके भी उदास काहे?" नींबू कुछ ना कह पाया, बस आंख के कोर में तरलता आ गई, इतना ही कहा, "सॉरी, मुझे पता है पर मैं क्या करता. इतने सालों बाद ये जो सब सिर्फ़ मेरी बात रहे हैं, बस उसी का नतीज़ा…" मिर्ची ने एक और मीठी चपत लगाई और हंस दी.
दोनों पुनः पहले की तरह ठहाका लगाकर बतियाने लगे और ये मनभावन दृश्य देखकर तारे मुस्कुराने लगे.

- अंकिता बाहेती

Photo Courtesy: Freepik

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