ये भी तो हो सकता है भूल गई हों. आजकल में आकर दे जाएं, लेकिन फोन क्यों नहीं उठा रही है?ये सब सोचते हुए मैं रुआंसी हो गई. बहुत नुक़सान हो गया.
जब पांचवीं बार भी मिसेज़ गुलाटी ने फोन नहीं उठाया, तो मुझे यक़ीन हो गया कि वो मुझे दो हज़ार का चूना लगा गई हैं. रोना आने लगा, किससे बात करूं?पति तो मेरे ऊपर ही चिल्लाएंगे कि केक का आॅर्डर लेते समय अग्रिम भुगतान क्यों नहीं लिया? चलो फोन पर ऑर्डर ले लिया, केक बना दिया.
लेकिन जब उनका ड्राइवर केक लेने आया तब क्यों बिना रुपए लिए उसको जाने दिया?..
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ये भी तो हो सकता है भूल गई हों. आजकल में आकर दे जाएं, लेकिन फोन क्यों नहीं उठा रही है?
ये सब सोचते हुए मैं रुआंसी हो गई. बहुत नुक़सान हो गया. मैदा, चीनी, आम… आम! मुझे झटका लगा, उसके रुपए तो दिए ही नहीं थे! मैं पर्स लेकर चौराहे की ओर भागी.
“अम्मा, ये लो… परसों दो किलो आम लिए थे ना.. ५०० के छुट्टे नहीं थे आपके पास.” मैं हांफते हुए बोली.
बचे हुए रुपए रखने के लिए पर्स खोला तो फोन की घंटी सुनाई दी.
हैं??.. मेरी आंखें हैरत से फैल गईं; स्क्रीन पर ‘मिसेज़ गुलाटी’ लिखा हुआ आ रहा था!..
– लकी राजीव
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