Close

कहानी- मिट्टी का घड़ा (Short Story- Mitti Ka Ghada)

मां की धीमी सी प्रार्थना जैसे आज फिर से कानों में गूंज उठी. फिर वही घड़ा और उसका ठंडा, मीठा जल याद आ गया. वर्तमान में लौटते हुए तनु ने अनायास फ्रिज की ओर देखा. उसमें ठंडक तो थी, पर वैसी नहीं.

तेज़ धूप के चलते तापमान बढ़ने लगा था. दिन लंबे और शामें छोटी हो चली थी. इस बढ़ती गर्मी को देखते हुए तनु ने रसोई से कहा, “अनिकेत, लौटते हुए एक घड़ा ले आओगे?”

“घड़े की क्या ज़रूरत है, तनु! इतना बड़ा फ्रिज रखा है घर में.”

अनिकेत ने जूते पहनते हुए सहजता से कहा और ऑफिस को निकल गया. तनु कुछ पल दरवाज़े की ओर देखती रह गई. फिर बर्तनों में हाथ चलाते-चलाते जाने कहां खो गई.

उसे अपनी मां याद आ गईं. उनका नहा-धोकर नया घड़ा भरना, उस पर हल्दी-अक्षत से छोटा सा सतिया बनाना और अगले दिन उस जल को पौधों में अर्पित कर फिर से घड़ा भरते हुए कहना, “हे प्रभु! इस तपती गर्मी में जीव-जंतु, पेड़-पौधों सबको शीतलता देना.”

मां की धीमी सी प्रार्थना जैसे आज फिर से कानों में गूंज उठी. फिर वही घड़ा और उसका ठंडा, मीठा जल याद आ गया. वर्तमान में लौटते हुए तनु ने अनायास फ्रिज की ओर देखा. उसमें ठंडक तो थी, पर वैसी नहीं.

दोपहर ढलते-ढलते वह बेटे अथर्व को लेने स्कूल पहुंची. अथर्व पसीने से तर था, बोतल खाली.

यह भी पढ़ें: झुलसाती गर्मी में तन-मन को ठंडक देती लस्सी (Lassi cools the body and mind in the scorching heat)

“मम्मा! बहुत प्यास लगी है.” उसकी आवाज़ सूखी थी.

“बस घर पहुंचते हैं बेटा!” कहते हुए तनु ने आसपास देखा न कोई नल, न हैंडपंप, न किसी के दरवाज़े पर रखा घड़ा.

कुछ कदम बाद ही उसने एक बोतल ख़रीदी. अथर्व ने लंबी सांस के साथ ऐसे ठंडा-ठंडा पानी पिया, जैसे जीवन लौट आया हो.

शाम को अनिकेत ने आते ही कहा, “एक ग्लास बर्फ़ वाली शिकंजी बना दो तनु, गर्मी जान ले रही है.”

तनु चुपचाप रसोई में चली गई.

अगले दिन अनिकेत के माता-पिता गांव से आ गए। घर में रौनक घुल गई.

“अभी तक घड़ा नहीं लाए?” मां ने आते ही पूछा.

तनु कुछ कहती, उससे पहले ही अनिकेत की लगातार छींकें शुरू हो गईं. उधर अथर्व भी खांस रहा था.

मां ने दोनों को देखा, फिर तनु की ओर देखकर कहा, “फ्रिज का पानी हर किसी को रास नहीं आता. घड़ा होता तो ये नौबत नहीं आती.”

तनु ने धीमे से कहा, “मांजी! घड़ा लाने को मैंने कहा था इनसे पर ये नहीं लाए.”

मां ने अनिकेत की ओर मुड़कर लगभग आदेश दिया, “आज लौटते हुए दो घड़े ले आना.”

“दो?” अनिकेत चौंका.

“एक घर के लिए और एक बाहर रखने के लिए. जहां लोगों को पानी न मिलता हो.”

यह भी पढ़ें: जानें 9 तरह की मॉम के बारे में, आप इनमें से किस टाइप की मॉम हैं?(Know About 9 Types Of Moms, Which Of These Are You?)

दादी की बात पर अथर्व उछल पड़ा, “मम्मा, मेरे स्कूल के बाहर रख देंगे! मैं गार्ड अंकल से कह दूंगा, वो पानी भर देंगे.”

तनु ने पहली बार हल्की सी मुस्कान महसूस की. उस शाम घर में दो नए घड़े आ गए.

मां ने चुपचाप दोनों पर हल्दी-अक्षत लगाए. घर वाले घड़े में पानी भरा गया. और दूसरा घड़ा अगले ही दिन स्कूल के बाहर रख दिया गया. कुछ दिनों बाद, तनु वहीं से गुज़र रही थी. घड़े के पास दो बच्चे खड़े थे. बारी-बारी से पानी पीते हुए उनके चेहरों पर वही तृप्ति थी, जो उसने कभी अपने घर के आंगन में देखी थी. तनु कुछ देर ठिठकी रही. धूप अब भी तेज़ थी, पर उसे लगा, कहीं न कहीं, मिट्टी का एक छोटा सा घड़ा अब भी दुनिया को थोड़ा शीतल कर रहा है.

पूर्ति खरे

यह भी पढ़ें: देसी जुगाड़ से घर को रखें कूल कूल (Keep your home cool with this desi jugaad)

Photo Courtesy: Freepik.

Share this article