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लघुकथा- वात्सल्य… (Short Story- Vaatsalya…)

"इस कठिन घड़ी में भी आप इतनी हिम्मत रखकर इतनी बड़ी बात सोच रही हैं... बहुत बड़ा दिल है आपका. मैं ख़बर कर देता हूं सभी अस्पतालों में. मानवता के लिए आप एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं, सच में."

"बहुत दुख है कि हम कुछ नहीं कर पाए. अब कुछ नहीं बचा. आप जब कहें हम वेंटिलेटर निकाल देंगे. एक्सीडेंट में सिर पर गहरी चोट थी. तब भी हमसे जो कुछ हो सकता था..."

"समझ सकती हूं, लेकिन पता कर लीजिए यदि कहीं किसी को अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो, नेत्रदान के लिए भी कह दीजिए. बस तब तक वेंटिलेटर मत निकालिए."

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"इस कठिन घड़ी में भी आप इतनी हिम्मत रखकर इतनी बड़ी बात सोच रही हैं... बहुत बड़ा दिल है आपका. मैं ख़बर कर देता हूं सभी अस्पतालों में. मानवता के लिए आप एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं, सच में."

"मैं तो बस मां हूं डॉक्टर साहब. और अपने इकलौते बेटे को किसी भी क़ीमत पर ज़िंदा रखना चाहती हूं. एक रूप में न सही बहुत से रूपों में वो ज़िंदा रहेगा और बहुत सी दूसरी मांओं की गोद उजड़ने से बच जाएगी."

Dr. Vinita Rahurikar

विनीता राहुरीकर

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Photo Courtesy: Freepik

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