बच्चों की परवरिश पैरेंट्स के लिए चुनौती बनती जा रही है. एक तरफ़ बच्चों का रुझान टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर पैरेंट्स बच्चों में अपने संस्कारों और धार्मिक रीति-रिवाज़ों के बीज बोने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी सोच को धार्मिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन इस प्रयास को कैसे सफल बनाया जाए, चलिए हम आपको बताते हैं.
आज का ये मॉडर्न, फास्ट लाइफस्टाइल वाला दौर साइंस और टेक्नोलॉजी का दौर है. आज के इस आधुनिक दौर में बच्चे 4-5 साल की उम्र से ही मोबाइल, लैपटॉप, और इंटरनेट चलाना सीख रहे हैं. इसमें सबसे बड़ी ग़लती पैरेंट्स की है. जब भी बच्चा रोता है या परेशान करता है, तो उसे शांत करने के लिए पैरेंट्स उसके हाथ में स्मार्टफोन पकड़ा देते है. बच्चा चुपचाप बैठकर स्मार्टफोन पर यूट्यूब ऑन करके एनिमेटेड कार्टून और वीडियोज देखता रहता है. पैरेंट्स बच्चे से न तो उसके रूटीन के बारे में पूछते हैं और न ही उस से बात करते हैं. बस बच्चा भी मज़े से एनिमेटेड कार्टून और वीडियोज देखता रहता है.
वैसे भी आजकल के मॉडर्न स्कूलों में धर्म और संस्कारों पर चर्चा कम ही होती है. ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या आजकल के बच्चों को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा जा सकता है? और अगर हां, तो कैसे? चलिए हम आपको बताते हैं-
हर दिन की शुरुआत करें 2 मिनट की प्रार्थना या श्लोक बोलने से
जब भी बच्चा सुबह सोकर उठे तो उसे 2 मिनट भगवान की प्रार्थना करना सिखाएं या फिर ब्रेकफास्ट टेबल पर जब पूरी फैमिली ब्रेकफास्ट के लिए इकट्ठा हो तो उस समय भगवान को ‘थैंक यू गॉड’ बोलना सिखाएं. प्रार्थना के दौरान इन मंत्रों का जाप करने के लिए कहें, जैसे- ‘कराग्रे वसते लक्ष्मी’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिन’, ‘गायत्री मंत्र’ आदि. इन मंत्रों का जाप करने से न केवल मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि बच्चों की एकाग्रता क्षमता भी बढ़ती है.
कहानियों की जरिए बच्चों को सिखाएं धर्म की बातें
छोटे बच्चों को कहानियां सुनना बहुत अच्छा लगता है. बच्चे कहानियों से ज़्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं. बेहतर होगा कि धर्म के बारे में उपदेश देने की बजाय उन्हें श्रीराम, श्रीकृष्ण, हनुमान, गणेश, भीष्म, युधिष्ठिर के जीवन से जुडी कथाएं सुनाएं. वो भी रोचक और मज़ेदार तरीक़े से. जैसे- हनुमानजी आयरनमैन या सुपरमैन से भी ज़्यादा शक्तिशाली और बलशाली हैं. उनकी स्पीड हवाई जहाज से भी अधिक है…. इसके अलावा बच्चों को राम, कृष्ण, विष्णु भगवान, हनुमान और गणेशजी की एनीमेटेड फिल्म दिखाएं.
रोचक और मज़ेदार तरीक़े से सुनाई और दिखाई गई कहानियों से बच्चों के मन अपने धर्म के प्रति रुचि और सम्मान जाग्रत होगा. इन कथा-कहानियों से बच्चे संस्कार सीखेंगे. उन्हें सत्य, धर्म, परोपकार और कर्तव्य का महत्व समझ में आएगा.
बच्चों को स्कूल में होनेवाले धार्मिक नाटक में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें
सही मायनों में बच्चों को धर्म और संस्कारों का असली मतलब समझाना चाहते हैं तो उन्हें स्कूल में होने वाले धार्मिक नाटक और ड्रामा में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें. इसके अलावा बच्चों को दिवाली, नवरात्रि, होली के मौके पर त्योहार का महत्व, उसके पूजन की विधि आदि बातों की जानकारी दें.
धार्मिक कथाओं को समझाने का आसान तरीक़ा
छोटे बच्चों की किताबों में पाठ से ज़्यादा चित्र होते हैं, ताकि चित्रों के ज़रिए बच्चों को समझा सकें. बच्चों को फोटो बुक, ऑडियोबुक और एनिमेटेड वीडियो के ज़रिए धर्म और कर्तव्य के बारे में बताएं. आजकल बाजार में बच्चों के लिए चित्रों वाली कई धार्मिक पुस्तकें भी उपलब्ध हैं, जो सिर्फ़ छोटे बच्चों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन की गई है. उन्हें ये किताबें गिफ्ट में दें. बच्चे इन किताबों को पढ़ने में रुचि लेंगे और धर्म के बारे में जानेंगे.
सप्ताह में एक दिन ‘कल्चर डे’ बनाएं
यह बहुत ज़रूरी है कि जो बातें पैरेंट्स अपने बच्चों को बता रहे हैं, उन्हें ख़ुद भी फॉलो करें. इसलिए अपने घर पर सप्ताह में एक दिन ‘कल्चर डे’ बनाएं. इसके अलावा कुछ ख़ास मौकों (बर्थडे या शादी की सालगिरह पर) घर में पूजा, भजन-कीर्तन और कथा कराएं.
घर में बच्चों से रोज़ाना पूजा कराएं
पैरेंट्स सुबह-शाम जब भी पूजा करें, बच्चों को अपने साथ बिठाएं. उनसे घंटी-शंख बजवाएं, आरती करवाएं. जब बच्चे पैरेंट्स को ऐसा करते देखेंगे, तो धीरे-धीरे वे भी उस माहौल में अपने आप ढल जाएंगे. पैरेंट्स को पूजा करना, हाथ जोड़ना, भगवान को प्रणाम करना देख, वे भी वैसा ही करना सीखेंगे. और यही सीख उनके जीवनभर काम आएगी.
सप्ताह में एक मंदिर ले जाएं
सप्ताह में कम-से-कम एक बार अपने बच्चों को मंदिर लेकर ज़रूर जाएं. मंदिर का शांत, सुकून और भक्तिमय वातावरण देखकर वे पूजा-पाठ करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
व्रत-त्योहार के मौकों पर बच्चों को शामिल करें
जब भी घर में जब भी कोई पूजा, कथा, व्रत और त्योहार हो तो बच्चों को भी उसमें शामिल करें. जैसे होली, दिवाली, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी की तैयारियों में उनकी मदद लें. उनसे दीपक जलवाएं, फूल चढ़वाएं. तैयारी के दौरान उन्हें बताएं कि हम ये त्योहार क्यों मनाते हैं. इससे उनका ज्ञान बढ़ेगा और वे अपने धर्म, धार्मिक रीति-रिवाज़ों के बारे में जानेंगे.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल अच्छे धार्मिक कंटेंट को दिखाने के लिए करें
अगर बच्चे मोबाइल या टीवी देखना ही चाहते हैं तो उन्हें श्रीकृष्ण, श्रीराम, महादेव जैसे रिलिजियस सीरियल या एनिमेशन मूवी दिखाएं. इससे उनकी धार्मिक जानकारी भी बढ़ेगी और उनमें भगवान के प्रति प्रेम भी पैदा होगा.
पैरेंट्स बच्चों के लिए रोल मॉडल बनें
बच्चे सबसे ज़्यादा अपने पैरेंट्स से ही सीखते हैं. पैरेंट्स रोज़ाना पूजा करेंगे, धार्मिक ग्रंथ पढ़ेंगे, तो बच्चे भी वैसा ही करेंगे. इसलिए बच्चों का सबसे बड़ा रोल मॉडल पैरेंट्स ख़ुद बनें. आजकल की मॉडर्न लाइफ में बच्चों को धर्म से जोड़ना आसान नहीं, संस्कार सिखाने इतना भी आसान नहीं है. बस ज़रूरत है बच्चों को थोड़ा-सा समय देने की और उन्हें प्यार से समझाने की. यदि पैरेंट्स अपने बच्चों को बचपन से ही धर्म, संस्कार और अध्यात्म की राह पर चलाएंगे तो बड़े होकर भी वे अपने संस्कार, संस्कृति और परंपरा को याद रखेंगे.
बच्चों को धर्म-संस्कार सिखाते समय पैरेंट्स इन बातों का ख़्याल रखें
दूसरे धर्मों के बारे में बताएं: बच्चों को सिर्फ़ अपने धर्म, अपने धर्म से जुडी धार्मिक बातें और अपने धर्मग्रंथों के बारे में ही न बताएं, बल्कि उन्हें दूसरे धर्मों के बारे में भी बताएं. दूसरे धर्म के बारे में बच्चों की राय पूछें. उन्हें अपने विचार रखने की आजादी दें. इस विषय पर उनके साथ हेल्दी डिस्कशन भी करें.
किसी एक धर्म का फेवर न करें: बड़े होने के नाते हर धर्म के बारे में पैरेंट्स के अपने विचार हो सकते है. उन्हें बच्चों के सामने अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन बच्चों पर अपने विचार और राय न थोपें. धर्म के बारे में पैरेंट्स अपनी निष्पक्ष राय दें, ताकि बच्चों में किसी तरह का भ्रम न हो.
सभी धर्मों के पूजास्थल दिखाएं: धर्म, संस्कार, रीति-रिवाजों और धर्म-ग्रंथों के बारे में बच्चों को बताने का एक और रोचक और मज़ेदार तरीक़ा है कि बच्चों को मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च में ले जाएं. इन पूजास्थलों के बारे में बताने पर उनमें सभी धर्मों के प्रति प्रेम, सम्मान और लगाव की भावना पैदा होगी.
मानवता के प्रति प्रेम और विश्वास करना सिखाएं: बच्चों को धर्म के बारे में बताते समय उन्हें ये समझाएं कि सभी लोगों से प्यार करें. प्यार, दया और स्नेह से सभी के साथ पेश आएं. लोगों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव न करें.
- पूनम नागेंद्र शर्मा
