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परेशान करते हैं महिलाओं और ह्यूमन ट्रैफिकिंग  से जुड़े ये आंकड़े…(These statistics on human trafficking involving women are disturbing…)

लड़कियां और महिलाएं ट्रैफिकिंग के निशाने पर हमेशा ही रही हैं. पिछले दस सालों में देशभर के ह्यूमन ट्रैफिकिंग केसेस का 76% है. ह्यूमन ट्रैफिकिंग के अंतर्गत ही अन्य जो केसेस रजिस्टर होते हैं, उनमें वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों को बेचना, विदेशों से लड़कियों को ख़रीदना और वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों की ख़रीद-फरोख़्त आदि आते हैं.

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यदि भारत की बात की जाए, तो ह्यूमन ट्रैफिकिंग का जाल लगभग हर राज्य में फैला हुआ है. इसमें तमिलनाडु 9, 701 केसेस के साथ सबसे ऊपर है. उसके बाद 5861 केसेस के साथ आंध्र प्रदेश, 5443 केसेस के साथ कर्नाटक, 4190 केसेस के साथ पश्‍चिम बंगाल और 3628 केसेस के साथ महाराष्ट्र का नंबर आता है.

ये 5 राज्य ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मुख्य स्रोत और गढ़ भी हैं, जहां लड़कियों को रेड लाइट एरिया के लिए ख़रीदा व बेचा जाता है. ह्यूमन ट्रैफिकिंग के रिपोर्टेड केसेस में 70% इन्हीं राज्यों से आते हैं.

यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक़ तमिलनाडु युवा लड़कियों की तस्करी मुंबई व दिल्ली के रेड लाइट इलाक़ों में करता है.

हालांकि पिछले कुछ समय से तमिलनाडु में इस तरह के मामलों की कमी देखी गई है, जबकि पश्‍चिम बंगाल में ये बढ़ रहे हैं.

वर्ष 2009 से लेकर 2014 के बीच ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों में 92% बढ़ोत्तरी हुई है. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि यह बहुत अधिक मुना़फे का धंधा है, ज़्यादा-से-ज़्यादा पैसा कमाने का लालच इस तरह के अपराधों के फलने-फूलने की बड़ी वजह बन रहा है.

वर्ष 2014 में देशभर में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के रजिस्टर्ड केसेस में 39% की बढ़ोत्तरी देखी गई. पिछले 6 वर्षों में 92% की बढ़ोत्तरी देखी गई है, जबकि वर्ष 2005 से लेकर 2009 के बीच इस तरह के मामलों में 55% तक की गिरावट देखी गई थी.

क़ानूनी प्रावधान

इम्मॉरल ट्रैफिकिंग प्रिवेंशन एक्ट (आईटीपीए) के अनुसार अगर व्यापार के इरादे से ह्यूमन ट्रैफिकिंग होती है, तो 7 साल से लेकर उम्र कैद तक की सज़ा हो सकती है. इसी तरह से बंधुआ मज़दूरी से लेकर चाइल्ड लेबर तक के लिए विभिन्न क़ानून व सज़ा का प्रावधान है. लेकिन सबसे बड़ी समस्या क़ानून को क्रियान्वित करने की ही है.

बात अगर सज़ा की की जाए, तो पिछले 5 सालों में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के फाइल्ड केसेस में 23% में दोष सिद्ध हुआ. इस मामले में लगभग 45,375 लोगों की गिरफ़्तारी हुई और 10,134 लोगों को दोषी क़रार दिया गया, जिसमें जुर्माने से लेकर जेल तक की सज़ा दी गई.

पिछले 5 सालों में आंध्र प्रदेश में सर्वाधिक गिरफ़्तारियां हुईं, लगभग 7, 450 के क़रीब. महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर आता है, उसके बाद कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्‍चिम बंगाल हैं.

इन बढ़ते मामलों की एक वजह यह भी हो सकती है कि अब मामले अधिक दर्ज होने लगे हैं.

केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों को फंड्स प्रदान करती है और वेब पोर्टल भी लॉन्च किया गया है, ताकि मानव तस्करी का यह अमानवीय व्यापार रुक सके या कम हो सके. इसके अलावा महिला व बाल विकास विभाग ने भी पीड़ितों के बचाव व पुनर्वसन के लिए अपने प्रयास तेज़ किए हैं.

Photo Courtesy: freepik

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