नवरात्र में ख़ूबसूरत दिखने की चाह अच्छी है, लेकिन 15-20 दिनों में स्लिम होने के लिए भूखा रहना और ज़रूरत से ज़्यादा कसरत करना शरीर पर भारी पड़ सकता है.
नवरात्र आने में कुछ ही दिन बाकी हों और आलमारी में टंगी मनपसंद चनिया चोली, लहंगा या गरबा ड्रेस अचानक यह याद दिला दे कि इस बार थोड़ा स्लिम दिखना है, तो यह एहसास आजकल बहुत सी युवतियों के लिए जाना-पहचाना है. ड्रेस की फिटिंग परफेक्ट हो, कमर थोड़ी पतली दिखाई दे, तस्वीरों में पेट नज़र न आए और सोशल मीडिया की रील में चेहरा और फिगर दोनों आकर्षक लगें, इसके लिए नवरात्र से कुछ सप्ताह पहले ही डाइट और एक्सरसाइज़ की तैयारी शुरू हो जाती है.
गुजरात की गरबा संस्कृति अब पूरे देश में फैल चुकी है. दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, जयपुर, इंदौर, लखनऊ जैसे शहरों में भी नवरात्र के दौरान गरबा और डांडिया आयोजन ख़ास आकर्षण बन चुके हैं. रंग-बिरंगे परिधान, संगीत और नृत्य के इस उत्सव में ख़ूबसूरत दिखने की चाह स्वाभाविक है. लेकिन यही चाह जब ज़ल्दबाज़ी में बदल जाती है, तब परेशानी शुरू होती है.
15 दिनों में बदल जाएगा शरीर?
नवरात्रि तक वज़न कम करना है, यह सोच अपने आप में ग़लत नहीं है. समस्या तब पैदा होती है, जब इसके लिए भोजन अचानक बहुत कम कर दिया जाए या घंटों कठिन व्यायाम शुरू कर दिया जाए. शरीर कोई मशीन नहीं है, जिसे एक दिन निर्देश देकर 15-20 दिनों में मनचाहे आकार में ढाला जा सके. वज़न में स्वस्थ बदलाव के लिए समय, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि की ज़रूरत होती है.
क्रश डायट में कम समय में वज़न घटाने के लिए भोजन या कैलोरी में बहुत ज़्यादा कटौती की जाती है. शुरुआत में वज़न तेज़ी से घटता दिखाई दे सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि शरीर की उतनी ही मात्रा में चर्बी कम हो रही है. कार्बोहाइड्रेट कम होने पर शरीर में जमा ग्लाइकोजन और उसके साथ जुड़ा पानी भी कम हो सकता है. बहुत कम कैलोरी लंबे समय तक लेने पर मांसपेशियों का वज़न भी घट सकता है. इसलिए वज़न मशीन पर दो किलो कम दिखना और शरीर की दो किलो चर्बी कम होना एक ही बात नहीं है.
भूखे रहकर ख़ूबसूरती नहीं मिलती
कई बार स्लिम दिखने की कोशिश में युवतियां भोजन छोड़ने लगती हैं. कोई नाश्ता बंद कर देती है, कोई दिन में केवल एक बार भोजन करती है और कोई रोटी-चावल जैसे खाद्य पदार्थ पूरी तरह छोड़ देती है. लेकिन शरीर को रोज़ाना काम करने के लिए ऊर्जा के साथ प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और मिनरल्स की ज़रूरत होती है. बहुत कम भोजन लेने से कुछ लोगों को थकान, चक्कर, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन या एकाग्रता में कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं.
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इसलिए वज़न घटाने का अर्थ भोजन से दोस्ती ख़त्म करना नहीं है. बेहतर तरीक़ा यह है कि भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए. बहुत अधिक चीनी, प्रोसेस्ड फूड, मैदे की चीज़ें और बार बार तले हुए नाश्ते को कम किया जा सकता है. वहीं दालें, फलियां, हरी सब्ज़ियां, साबुत अनाज, मिलेट्स और पर्याप्त प्रोटीन को संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है. बादाम, अखरोट और बीज पौष्टिक हैं, लेकिन इन्हें भी उचित मात्रा में ही खाना चाहिए. नो पेन, नो गेन का मतलब ख़ुद को थकाना नहीं.
नवरात्र से पहले अचानक जिम में घंटों पसीना बहाना भी सही रास्ता नहीं है. पूरे साल नियमित व्यायाम न करने के बाद अचानक रोज़ दो घंटे कार्डियो, भारी वज़न उठाना या अत्यधिक कठिन एक्सरसाइज़ शुरू करने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है.
हृदय, फेफड़ों, मांसपेशियों और जोड़ों को बढ़ती हुई शारीरिक मेहनत के अनुरूप ढलने में समय लगता है.
इसलिए अगर लंबे समय से एक्सरसाइज़ नहीं की है तो शुरुआत हल्की गतिविधियों से करें.
नियमित वॉक, हल्की जॉगिंग, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार एरोबिक गतिविधियां धीरे-धीरे स्टैमिना बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.
उम्र, वज़न, फिटनेस और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्यायाम का तरीक़ा भी अलग होना चाहिए. पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो व्यायाम की तीव्रता बढ़ाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना समझदारी है.
सोशल मीडिया की तस्वीर आपकी ज़िंदगी नहीं है
आज नवरात्र का उत्सव केवल गरबा मैदान तक सीमित नहीं है. उसके साथ सेल्फी, फोटो शूट, रील और सोशल मीडिया पोस्ट भी जुड़ गए हैं. दूसरों की ख़ूबसूरत तस्वीरें देखकर कई बार हमें अपना शरीर कम आकर्षक लगने लगता है. फिर शुरू होती है ख़ुद को बदलने की दौड़.
लेकिन याद रखिए, सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीर कुछ सेकंड की होती है. उसमें कैमरा एंगल, रोशनी, मेकअप, कपड़े और कई बार फोटो एडिटिंग भी भूमिका निभाते हैं. इसलिए किसी और की तस्वीर को अपने शरीर के लिए पैमाना बनाना उचित नहीं है. ख़ूबसूरत दिखना अच्छी बात है, लेकिन ख़ूबसूरत दिखने के लिए अपने शरीर को सज़ा देना अच्छी बात नहीं.
गरबा के लिए चाहिए ऊर्जा
गरबा में लगातार घूमना, नाचना और घंटों सक्रिय रहना अपने आप में एक अच्छा शारीरिक व्यायाम हो सकता है. लेकिन इसके लिए शरीर में ऊर्जा और स्टैमिना होना ज़रूरी है. स्टैमिना एक-दो दिन में नहीं बनता. नवरात्र से पहले धीरे-धीरे अपनी शारीरिक गतिविधि बढ़ाना ज़्यादा उपयोगी है. नियमित चलने से शुरुआत करके समय और गति धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है.
और गरबा के दौरान पानी को बिल्कुल न भूलें. नृत्य, गर्मी, भीड़ और लगातार पसीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है. दिनभर पर्याप्त तरल पदार्थ लेना ज़रूरी है. बहुत भारी भोजन करके तुरंत गरबा खेलने से भी बचना चाहिए और बिल्कुल खाली पेट लंबे समय तक नाचना भी उचित नहीं है.
यदि गरबा करते समय छाती में दर्द, असामान्य सांस फूलना, चक्कर या दिल की धड़कन असामान्य महसूस हो तो उसे सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ न करें.
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इस नवरात्र ख़ुद से एक वादा करें
नवरात्र शक्ति की आराधना का पर्व है. फिर इसकी तैयारी ऐसी क्यों हो, जो शरीर की शक्ति ही कम कर दे? इस बार लक्ष्य केवल यह न हो कि ड्रेस में कमर पतली दिखे. लक्ष्य यह हो कि गरबा की आख़िरी ताल तक कदमों में ऊर्जा बनी रहे. लक्ष्य यह हो कि चेहरे पर मेकअप के साथ-साथ स्वास्थ्य की चमक भी दिखाई दे.
परफेक्ट रील से ज़्यादा ज़रूरी है वास्तविक ज़िंदगी में स्वस्थ और ख़ुश रहना. वज़न का कांटा दो किलो कम दिखे, यह अच्छी बात हो सकती है, लेकिन उससे भी बड़ी उपलब्धि यह है कि शरीर मज़बूत रहे, नींद अच्छी हो, भोजन संतुलित हो और मन प्रसन्न रहे.
इस नवरात्र ख़ुद को किसी और जैसा बनाने की कोशिश न करें. अपने शरीर को उसका सबसे स्वस्थ रूप देने की कोशिश करें. क्योंकि असली ख़ूबसूरती वह नहीं, जो कैमरे में कुछ सेकंड के लिए दिखाई दे, असली ख़ूबसूरती वह है, जो स्वस्थ शरीर, आत्मविश्वास और चेहरे की सहज मुस्कान में हमेशा नज़र आए.
– स्नेहा सिंह

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