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जब कोई सिरफिरा पीछे लग जाए तो क्या करें? (What should you do if a weirdo starts following you?)

पीछा करना, कोई प्यार या अटेंशन देने का तरीक़ा नहीं है, बल्कि यह किसी को भी मानसिक रूप से परेशान करने की सिचुएशन हो सकती है.

कोई सिरफिरा ख़ुद को आपका आशिक बताए और हर जगह रास्ता रोके और पीछा करे, तो उसका क्या करें? उससे कैसे पीछा छुड़ाएं? यह जानना बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि अगर इस स्थिति को ज़्यादा समय तक नज़रअंदाज़ किया जाए या फिर टाला जाए, तो इससे पीछा करने वाले के हौसले बुलंद हो जाते हैं, जो आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है. इसलिए सही समय पर सतर्क होना, सबूत जुटाना और क़ानूनी मदद लेना ही इस परेशानी से सुरक्षित बाहर निकलने का एकमात्र तरीक़ा है.

चुप्पी तोड़ना ज़रूरीः इसे सहने या छुपाने से अपराधी का हौसला बढ़ता है, इसलिए शुरुआत में ही सख़्त क़दम उठाना सुरक्षा के लिए ज़रूरी है.

उसे स्पष्ट शब्दों में ना कहेंः कई बार हम किसी के पीछा करने पर इतना डर जाते हैं कि उसकी बात भी नहीं सुनते और अपना इंकार भी नहीं कह पाते, जिसका मतलब सामने वाला यह लगा लेता है कि एक ना एक दिन मान ही जाएगी, क्योंकि इंकार तो नहीं किया ना उसने. इसलिए अच्छा यही होगा कि एक बार रुककर खुले शब्दों में बातचीत करें और उसे अच्छी तरह समझा दें कि आपका उससे कोई मतलब नहीं है. उसका पीछा करना आपको अच्छा नहीं लग रहा है. कम से कम शब्दों में यह बात उसे समझा दें, लेकिन बहस न करें. मैसेज दें और वहां से निकल जाएं.

अकेले बाहर जाने से बचेंः जो व्यक्ति आपका पीछा कर रहा है आप उसके बारे में कुछ नहीं जानतीं, वह कौन है और क्यों आपके पीछे आ रहा है? आपको यह भी नहीं पता कि वह किस हद तक जा सकता है और कितना ख़तरनाक हो सकता है. बेहतर होगा कि जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, बाहर जाते समय किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को साथ रखें.

रास्ते और समय बदलेंः हमेशा एक ही समय पर घर से ना निकलें. अपने आने-जाने के रास्तों और समय में बदलाव करें, ताकि वह आपके रूटीन का अंदाज़ा न लगा सके. हमेशा भीड़भाड़ वाला रास्ता ही चुनें, ताकि वह पब्लिक प्लेस में कुछ ना कर पाए और आप बिना डरे घर पहुंच सकें. सुनसान या अंधेरे रास्तों का इस्तेमाल न करें.

शोर मचाएंः अगर वह रास्ते में आपको रोकता है, तो बिल्कुल न डरें. ज़ोर से चिल्लाएं और आसपास के लोगों को इकट्ठा कर लें. पब्लिक में बेइज़्ज़़ती का डर ऐसे लोगों को पीछे हटने पर मजबूर करता है.अपने परिवार को इसके बारे में बताएं और उनसे सलाह लेंः इस बात को बिल्कुल न छुपाएं. अपने परिवार, दोस्तों और अपनी हाउसिंग सोसाइटी या ऑफिस के सिक्योरिटी गार्ड्स को उस व्यक्ति की पहचान (फोटो या हुलिया) बताएं, ताकि वे सतर्क रहें.

उसके ख़िलाफ़ सबूत इकट्ठा करें
स्क्रीनशॉटः मैसेज, कॉल लॉग और सोशल मीडिया (व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक) पर भेजी गई रिक्वेस्ट या चैट के स्क्रीनशॉट लें. स्क्रीनशॉट में तारीख़, समय और उसका फोन नंबर/यूज़रनेम साफ़ दिखना चाहिए.

कॉल रिकॉर्डिंगः उसकी कॉल आने पर बातचीत को रिकॉर्ड करें. कॉल पर ख़ुद संयमित रहें और केवल उसकी बातों को रिकॉर्ड होने दें.

प्रोफाइल यूआरएलः उसके सोशल मीडिया अकाउंट का लिंक कॉपी करके सुरक्षित रख लें, ताकि अगर वह बाद में अकाउंट डिलीट भी कर दे, तो पहचान की जा सके.

ईमेलः यदि वह ईमेल भेज रहा है, तो उन्हें डिलीट न करें, एक अलग फोल्डर में ईलहर्ळींश करके रखें.

इंसिडेंट लॉगः एक डायरी या फोन के नोट्स ऐप में हर घटना को दर्ज करें- तारीख़, समय, स्थान, गाड़ी/बाइक का नंबर और उसने क्या हरकत की.

सीसीटीवी फुटेजः अगर वह आपके घर, ऑफिस या किसी दुकान के बाहर चक्कर काटता है, तो वहां लगे सीसीटीवी कैमरे के मालिक या गार्ड से बात करके उस समय की फुटेज की पेनड्राइव कॉपी या फोन से वीडियो बना लें.

गवाहों की लिस्टः जिन लोगों (जैसे सोसाइटी गार्ड, साथी कर्मचारी या दुकानदार) ने उसे आपका पीछा करते देखा है, उनके नाम और फोन नंबर नोट कर लें.

क्लाउड बैकअपः सभी स्क्रीनशॉट, रिकॉर्डिंग्स और वीडियो को गूगल ड्राइव या आई क्लाउड पर अपलोड करें.

भरोसेमंद व्यक्ति के पास कॉपी रखेंः इन सबूतों का एक सेट अपने किसी क़रीबी परिजन या दोस्त के ईमेल/व्हाट्सएप पर भेज दें, ताकि आपके फोन को नुक़सान पहुंचने पर भी डेटा सुरक्षित रहे.

प्रिंटआउट फाइल तैयार करेंः स्क्रीनशॉट और घटना डायरी का एक फिजिकल प्रिंटआउट निकालकर फाइल बना लें. यह पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराते समय सबसे ज़्यादा काम आएगा.

हेल्पलाइन नंबर डायल करेंः तुरंत मदद के लिए 112 (नेशनल इमरजेंसी नंबर) या 1091 (वुमन हेल्पलाइन नंबर) पर कॉल करें.

पुलिस में शिकायत दर्ज करेंः पुलिस स्टेशन जाकर या राष्ट्रीय महिला आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें. क़ानून के अनुसार ’स्टॉकिंग’ (पीछा करना) एक गंभीर संज्ञेय अपराध है, जिसमें तुरंत गिरफ़्तारी का प्रावधान है.

भारतीय क़ानून में स्टॉकिंग की स्थिति
क़ानूनी धाराः भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 (पूर्व में आईपीसी 354डी) के तहत किसी का शारीरिक या डिजिटल माध्यम (सोशल मीडिया/कॉल) से लगातार पीछा करना दंडनीय अपराध है.

सज़ा का प्रावधानः पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और ज़ुर्माना और दोबारा ऐसा करने पर पांच साल तक की सख्त ़कैद का प्रावधान है.

गैर-जमानती अपराधः बार-बार पीछा करने या गंभीर रूप से धमकाने के मामलों में यह गैर-जमानती श्रेणी में आता है.

– शिखा जैन 
Sources: Shutterstock

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