जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल बचाने से लेकर सोना ख़रीदने व अन्य छोटी-छोटी बातों के लिए देशवासियों को सहयोग देने का आव्हान किया है, तब से हर कोई अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग दे रहा है. कहीं पर वकील-जज साइकिल से कोर्ट जा रहे हैं, तो कहीं पर लोग निजी वाहन से कम सार्वजनिक, जैसे- ट्रेन, बस आदि का अधिक उपयोग कर रहे हैं. इसी फ़ेहरिस्त में अनुपम खेर भी जुड़ गए हैं.

आज अनुपम खेर ने जयपुर से दिल्ली तक का सफ़र वंदे भारत ट्रेन से किया. साथ ही उन्होंने लोगों को प्रेरित करने के लिए प्यारा सा संदेश भी दिया. उन्होंने कहा-
नमस्कार दोस्तों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने देशवासियों से अपील की है कि हम सब मिलकर पेट्रोल-डीजल की बचत करने की कोशिश करें. जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें. कार पूलिंग करें. छोटी दूरी के लिए अपनी गाड़ी निकालने से बचें. और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में थोड़ा-थोड़ा बदलाव लाकर देश का सहयोग करें.
मुझे उनकी यह बात बहुत सही लगी. उसी सोच के साथ मैं आज जयपुर से दिल्ली वंदे भारत ट्रेन से यात्रा कर रहा हूं. यह कोई बहुत बड़ा त्याग नहीं है, लेकिन अगर हम सब अपनी-अपनी तरफ़ से छोटी-छोटी कोशिशें शुरू करें तो उसका असर बड़ा हो सकता है.
आज दुनिया जिस दौर से गुज़र रही है, उसमें ज़िम्मेदार नागरिक होने का मतलब स़िर्फ बातें करना नहीं है, बल्कि अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव लाना भी ज़रूरी है.
आप कभी मेट्रो से जा सकते हैं तो मेट्रो लें. अगर दो लोग एक गाड़ी में जा सकते हैं तो अलग-अलग गाड़ियां निकालने की क्या ज़रूरत है. मुझे लगता है देश सेवा स़िर्फ सरहद पर नहीं होती है. कभी-कभी वो हमारे रोज़मर्रा के छोटे-छोटे ़फैसले में भी दिखाई देती है और दिखाई देनी चाहिए. चलिए, जितना हो सके अपना छोटा सा योगदान देते हैं. धन्यवाद! जय हिंद!
इसी के साथ उन्होंने नरेंद्र मोदी और भारतीय रेल का उन्होंने अपना यह वीडियो टैग किया.
अनुपम जी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के इंस्टाग्राम स्टोरी पर जयपुर रेल स्टेशन पहुंचने का वीडियो भी किशोर कुमार के गाने गाड़ी बुला रही है... के साथ शेयर किया.

अपने मोटिवेशनल लेक्चर में लोगों के साथ का एक और वीडियो अनुपमजी ने साझा किया. दर्शकों-प्रशंसकों से खचाखच भरा हॉल उनकी सफलता की कहानी कह रहा था, जबकि इस पर उनका कहना है-
अंत में सब ठीक हो जाता है! अगर सब ठीक नहीं है, तो यह अंत नहीं है! सालों से, मेरे प्रेरक भाषण एक सरल लेकिन शक्तिशाली विचार के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं- असफलता की शक्ति.

असफलताएं हमें ख़त्म नहीं करतीं. वे हमें जीवन के अगले अध्याय के लिए तैयार करती हैं. और जब भी मैं श्रोताओं से यह वाक्य कहता हूं, तो मैं सचमुच लोगों को इससे भावनात्मक रूप से जुड़ते हुए देख सकता हूं: “अंत में सब ठीक हो जाता है. अगर सब ठीक नहीं है, तो यह अंत नहीं है.” इन संवादों का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा यह एहसास है कि हर व्यक्ति के भीतर संघर्ष की एक कहानी छिपी होती है. और कहीं न कहीं, हम सभी बस फिर से आशा खोजने की कोशिश कर रहे हैं. अगर मेरी यात्रा, मेरी असफलताएं और मेरे अनुभव किसी एक व्यक्ति को भी फिर से ख़ुद पर विश्वास दिला सकें, तो मुझे लगता है कि मेरा उद्देश्य पूरा हो गया है.

वाकई अनुपम खेर हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. उनकी बातें, हौसलाअफ़जाई करने का अंदाज़, मां-परिवार से जुड़ाव हर किसी को बेहद प्रेरित करता है. उम्मीद है, वे इसी तरह ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमें प्रोत्साहित करते रहेंगे. धन्यवाद! जय हो!
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