ब्रेस्ट कैंसर यानी स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में कैंसर के कारण होनेवाली मौतों के मुख्य कारणों में से एक रहा है. हालांकि इस कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन इसके बावजूद हर साल इससे बड़ी संख्या में मौतें होती हैं. आइए इससे जुड़ी सभी ज़रूरी बातों को समझें
ब्रेस्ट कैंसर तब होता है, जब ब्रेस्ट के भीतर कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं. अक्सर लंबे समय तक इसका पता नहीं चलता. ब्रेस्ट कैंसर में ब्रेस्ट में गांठ बन जाती है या उसके शेप या साइज़ में बदलाव आ जाता है. ब्रेस्ट या बगल में नई गांठ बनना, साइज़ बढ़ना या सूजन, खुजली, ब्रेस्ट की त्वचा की परतें उतरना, ब्रेस्ट के किसी हिस्से ख़ासतौर पर निप्पल में दर्द आदि लक्षण देखे गए हैं.
कैंसर से जुड़ी तमाम अनकही बातों को एक्सपर्ट डॉक्टर से जानें मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में.. पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें -
पीरियड्स के कुछ दिनों बाद आप अपने ब्रेस्ट की जांच कर सकती हैं. जब ब्रेस्ट अपनी सही शेप में होते हैं. जिन महिलाओं के पीरियड्स बंद हो चुके हैं, वे महीने का एक दिन इसके लिए चुन सकती हैं. अपनी जांच का रिकाॅर्ड रखें. इससे अगर आपके ब्रेस्ट के किसी हिस्से में बदलाव आता है, तो आप समझ पाएंगी.
यह भी पढ़ें: ख़तरनाक हो सकता है डीहाइड्रेशन, ऐसे करें बचाव (Dehydration can be dangerous, so prevent it)
ब्रेस्ट कैंसर को पहचानने में उसके लक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इस बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके डायग्नोसिस में देरी से मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए जैसे ही आपको शक हो, तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें. डायग्नोसिस का एक तरीक़ा है मैमोग्राफी, जिसमें कम स्तर की एक्स-रे की मदद से ब्रेस्ट के टिश्यूज़ में होनेवाले बदलावों को देखा जाता है. अगर मैमोग्राफी में कुछ असामान्यता दिखाई दे, तो ब्रेस्ट कैंसर की जांच की जाती है, जिसमें विभिन्न कोणों से एक्स-रे लिए जाते हैं और इसके बाद अल्ट्रासाउंड किया जाता है.
महिलाओं को 40 साल की उम्र के बाद हर साल मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है, चाहे उनमें स्तनों से संबंधित कोई लक्षण दिखाई दे या न दें.
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कई तरह से किया जाता है. यह अक्सर कैंसर की अवस्था और इस बात पर निर्भर करता है कि स्तनों में कैंसर के उतकों का विकास कितना गंभीर है. आम तकनीकों में सर्जरी, कीमो थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और हार्मोन थेरेपी शामिल है. मामले की गंभीरता के आधार पर सर्जिकल विकल्प जैसे लम्पेक्टोमी (गांठ को निकालना) या मास्टेक्टोमी (पूरे स्तनों को निकालना) को भी चुना जा सकता है. इसलिए ज़रूरी है कि दूसरी अवस्था से पहले ही मरीज़ का निदान हो जाए.
हेल्थ अलर्ट
- अल्कोहल का सेवन करने से जोख़िम बढ़ता है, इसलिए इसका सेवन ना करें.
- इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि धूम्रपान से ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ती है, ऐसा ख़ासतौर पर मेनोपाॅज़ से पहले की स्थिति में देखा गया है. अतः इससे दूर रहना ही बेहतर है.
- मोटापा या सामान्य से अधिक वज़न से ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है. बड़ों के लिए ज़रूरी है कि वे शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. कम-से-कम दो-ढाई घंटे हल्का एरोबिक या पौने घंटे हेवी एक्सरसाइज़ करें.
- न्यूटीशियस फूड लें.
- ब्रेस्ट फीडिंग कराने से कैंसर को रोका जा सकता है. साथ ही लंबे समय तक शिशु को स्तनपान कराने से भी अधिक फ़ायदा होता है.
- उच्च स्तरीय रेडिएशन और पर्यावरणी प्रदूषण से बचें.
यह भी पढ़ें: समर हेल्थ- गर्मी में होनेवाली बीमारियों से ऐसे बचें (Summer Health: How to Avoid Summer Illnesses)
महिलाएं सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं. नियमित रूप से अपनी जांच करें. अगर कोई भी संदेह हो तो तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें. पुरुषों को भी चाहिए कि वे महिलाओं की नियमित जांच, निदान एवं उपचार में सहयोग दें. हालांकि ब्रेस्ट कैंसर अधिकतर महिलाओं को ही होता है, लेकिन पुरुषों को भी हो सकता है. इसलिए इस बीमारी को गंभीरता से लें और यथासंभव एक-दूसरे को सहयोग भी दें.
- ऊषा गुप्ता
