Close

कहानी- गुलमोहर के लाल फूल (Short Story- Gulmohar Ke Lal Phool)

सुमन बाजपेयी


सुमन बाजपेयी

“सत्यानाश!” अप्पा चीखे. “मैंने तो पहले ही कहा था कि कुंडली मिलाए बिना रिश्ता जोड़ना ग़लत है. नहीं है मैत्रेयी की कुंडली में शादी का योग अब भुगतो.”
बालन ठीक गुलमोहर के पेड़ के तने से सटा अधलेटा सा था. दिल की धड़कनें मैत्रेयी की भी जैसे रुक रही थीं.

रात से ही तेज़ बारिश हो रही थी. सुबह भी काफ़ी देर तक मेह बरसता रहा, फिर बूंदाबांदी होने लगी. मॉनसून आने में समय था, लेकिन मानो बारिश ने समय से पहले आकर यह चेतावनी दे दी थी कि बारिश में क्या-क्या करना है, उसकी प्लानिंग कर लें और हां, उससे बचने की तैयारी में भी जुट जाएं. मैत्रेयी ने अपने पुश्तैनी घर की पहली मंज़िल पर स्थित अपने कमरे की लकड़ी की बड़ी सी खिड़की से बाहर झांका. लाल रंग के फूल उसकी खिड़की से नज़र आ रहे थे. उनका हवा के साथ लहराना किसी मीठी बजती धुन की तरह लग रहा था. यह गुलमोहर का पेड़ उसके साथ-साथ ही बड़ा हुआ है. वह उसे किसी दोस्त से कम नहीं लगता है. छोटी थी, तब उसके तने से लिपट न जाने कितनी बातें करती थी. गुड़िया की शादी उसकी छांह में बैठकर ही की थी. पेड़ से ज़्यादा वह उसे अपना दोस्त लगता था, इसीलिए जब भी कभी वीकेंड पर घर आती, कुछ देर उसके पास जाकर अवश्य बैठती. वह बारिश में पूरी तरह से भीगा गुलमोहर का पेड़ मानो उसे अपनी ओर खींच रहा था. उसने इंटरनेट पर पढ़ा था कि बंगाली में गुलमोहर को कृष्णचूरा यानी की कृष्ण का मुकुट कहते हैं. उसका लालिमा भरा सौंदर्य इस समय मैत्रेयी के भीतर न जाने कितने एहसास पैदा कर रहा था.
मैत्रेयी को शहर की भीड़भाड़ से दूर अपने पुश्तैनी घर में आकर कुछ दिन बिताना बहुत अच्छा लगता था. हालांकि इस बार वह किसी ख़ास वजह से यहां आई थी. लाल फूलों से भरा गुलमोहर जैसे उसकी ख़ुशी को दर्शा रहा था. उसकी लालिमा किसी लपट की तरह उसके दिल में आशा और इच्छा की ज्वाला जगा रही थी. उसका सिंदूरी रंग उसे एक दुल्हन की मांग में चमकते सिंदूर की याद दिला रहा था. इस सोच मात्र से ही वह लजा गई, मानो कोई सपना साकार होने को है. गुलमोहर की रंगत उसके गालों पर भी फैल गई.
वह एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर है और हमेशा व्यस्त रहती है. लेकिन इस बार उसने शनिवार और इतवार की छुट्टियों के साथ तीन दिन की और छुट्टियां ले ली थीं. एक छोटा सा ब्रेक लेना तो बनता ही है, उसने अपने मन को समझाया था. उसके अम्मा-अप्पा कब से उससे शादी करने के लिए कह रहे थे, पर उसे किसी लड़के तक से मिलने का समय नहीं मिल पाता था, पर इस बार अम्मा ने बहुत डांटा था.

“चौंतीस साल की हो गई है. काम से प्यार करना अच्छी बात है, लेकिन किसी साथी की चाहत में ख़ुद को डुबोना भी बुरा ख़्याल नहीं है.”
उसकी अम्मा कविताएं लिखती हैं और इसीलिए उनके शब्दों में भी कविता झलकती हैे. मां-बेटी से ज़्यादा दोस्त हैं वे दोनों, इसलिए अम्मा बेबाक़ी से हर बात उससे कह लेती हैं. उसकी दोस्त और कलीग्स तो इस बात से उससे बहुत ईर्ष्या करते हैं.

यह भी पढ़ें: कैसे मैनेज करें रिश्तों में छोटी छोटी शिकायतें? (How to manage small Complains in the relationship)

“मैत्रेयी, तुम्हारी मां शहर की नहीं हैं, नौकरी भी नहीं करतीं और हमारी मम्मियों की तरह आधुनिक भी नहीं हैं, लेकिन तुम दोनों के बीच जो बॉन्डिंग व दोस्ती का रिश्ता है, वह गज़ब का है. कितने मज़े से तुम उनके साथ हर बात शेयर कर लेती हो.”
“शहर की न सही, नौकरीपेशा न सही, पर मेरी अम्मा कविताएं लिखती हैं, इसलिए एहसास की कद्र करना जानती हैं.” वह गर्व से कहती.
वैसे केवल व्यस्तता ही उसके अब तक शादी न करने का कारण नहीं थी.. दोष उसकी जन्मकुंडली में है, उसके अप्पा का कहना था, जो ज्योतिषी में हद से ज़्यादा यक़ीन करते थे. तो इस बार अप्पा के यह विश्‍वास दिलाने पर कि उसके लिए उन्होंने सही वर का चयन कर
लिया है, वह यहां चली आई थी. उसकी कुंडली में केवल मंगल दोष ही नहीं था कि मंगल दोष वाले पुरुष से शादी करके उसका समाधान ढूंढ़ लिया जाता, बल्कि सभी ज्योतिषियों ने एक स्वर में दावा किया था और भविष्यवाणी की थी कि वह कभी शादी नहीं करेगी और यहां तक कि सगाई भी नहीं करेगी. उनका कहना था उसकी कुंडली के दोषों का न तो कोई समाधान है न ही उपाय. हालांकि अप्पा फिर भी कोई न कोई उपाय करते रहते थे.


वह चाहती तो अपनी मर्ज़ी से किसी को चुन शादी कर लेती, पर अप्पा के विरुद्ध जाकर ऐसा करना उसे ठीक नहीं लगा या शायद उसके मन में भी आशंकाएं थीं. बेशक वह कुंडली, ग्रह और बाकी अंधविश्‍वासों का खंडन करती थी, पर अप्पा की आस्था को ठेस पहुंचाने की बजाय उसने ख़ुद को काम में डुबो दिया था. वैसे भी उसे कोई ऐसा उपयुक्त लड़का नहीं मिला था, जो कुंडली या दोषों में विश्‍वास नहीं करता हो. उनके समाज में कुंडली मिलाने की प्रथा का पालन कट्टरता की हद तक किया जाता था. और गैर जाति के लड़के से शादी करने का तो सवाल ही नहीं उठता था.
अमेरिका में रहनेवाली उसकी मौसी ने ससुराल के किसी परिचित का लड़का उसे सुझाया था, जो इंजीनियर था. वह कैलिफोर्निया में सैटेल होने से पहले शादी करना चाहता था. मज़े की बात तो यह थी कि उन्हीं की तरह तमिल ब्राह्मण होने के बावजूद वह नास्तिक था. अप्पा को यह प्रस्ताव ठीक नहीं लगा था, पर मां ने उन्हें समझाया था, “मैत्रेयी की उम्र बढ़ रही है. अब आपको कुंडली के चक्कर से बाहर निकलना चाहिए. लड़के और उसके परिवार से एक बार मिलने में हर्ज़ ही क्या है.”
उम्र की बात अप्पा के लिए भी चिंता की बात थी इसलिए मान गए थे, बेशक बेमन से ही. और इसीलिए अम्मा के समझाने पर या डांट लगाने पर वह घर आ गई थी. अम्मा बेहद ख़ुुश थीं, हालांकि अप्पा के मन की आशंकाओं को निकालना आसान नहीं था, पर मैत्रेयी को ख़ुश देख, वह ख़ुश बने रहने की पूरी कोशिश कर रहे थे.
मौसी के लड़का सुझाने के बाद, सब बहुत जल्दी-जल्दी हुआ. दोनों परिवारों ने फोन पर संपर्क किया. इंटरनेट के माध्यम से तस्वीरों का आदान-प्रदान, उसके बाद फोन नंबर और मेल दी गईं. लड़का बहुत ही साधारण ढंग से शादी करना चाहता था. वह चेन्नई में रहता था.
लगातार फोन पर बात और वीडियो चैट करते-करते मैत्रेयी और बालन को एक-दूसरे से प्यार हो गया. वह अड़तीस साल का था, पर प्यार कहां उम्र देखता है. मैत्रेयी को वह बहुत सुलझा हुआ इंसान लगा और अप्पा को भी. अप्पा ने उसके बारे में कुछ नकारात्मक नहीं कहा था, तो ज़ाहिर था कि वह सहमत न होते हुए भी असहमत नहीं हैं इस रिश्ते से. अम्मा ने तो जैसे कमर कस ली थी इस बार मैत्रेयी को ब्याहने की.
“मुझे तो कोई कमी नहीं लगी बालन में. मैत्रेयी को भी पसंद आ गया है. अब आपकी कोई बात मैं नहीं सुनूंगी. आप कोई रोड़ा न अटकाएं तो ही बेहतर है.” अम्मा ने अप्पा को जैसे चुनौती दे डाली थी.
कुछ ज़्यादा लोगों को बुलाया नहीं गया था. मैत्रेयी चाहती थी कि उसकी बेस्ट फ्रेंड सुनिधि तो कम से कम उसकी सगाई में आ जाए. वह शहर में नहीं थी. उसने उसे मैसेज किया- “बालन कल हमारे घर पहुंचेगा. शाम को सगाई रखी है. तुझे आना ही होगा.”

यह भी पढ़ें: शादी के लिए 36 गुणों में से कौन से गुण मिलने ज़रूरी? (Which of the 36 qualities are necessary for marriage)

“मैं नहीं आ पाऊंगी. शिखर की तबीयत ठीक नहीं चल रही, उसे लेकर मुंबई जा रही हूं, दूसरे डॉक्टर से सलाह लेने. तेरे ख़ास क्षणों को मैं मिस करूंगी और तुझे सजे भी नहीं देख पाऊंगी, मेरी ब्यूटी. लेकिन मेकअप कर लेना. अपना सादगी में रहने का राग मत अलापने लग जाना. ख़ूूब सारी फोटो मुझे भेजना. मैं तेरी शादी में ज़रूर आऊंगी. बेस्ट ऑफ लक.”
सुनिधि का मैसेज पढ़ वह उदास हो गई थी. लेकिन जानती थी कि काफ़ी समय से वह अपने पति की तबीयत को लेकर परेशान है. सगाई के लिए तैयार होने के लिए उसने ब्यूटीशियन को बुलाया था. वह भी अम्मा की ज़िद पर. खिड़की से बाहर अभी भी गुलमोहर के फूल उसे अपनी ओर खींचते हुए लग रहे थे. वह ज़रूर बालन के साथ उसके नीचे खड़े होकर फोटो खिंचवाएगी, उसने सोचा. उसने ख़ुद को आईने में देखा, उसका रूप खिल रहा था. बालों में लगे गजरे की महक सारे वातावरण को सुवासित कर रही थी. मेकअप बुरा कतई नहीं लग रहा था.


मैरून रंग की कांजीवरम की साड़ी और सोने की चेन में लटकता कुंदन का पेंडेट, हाथों में सोने की दो चूड़ियां. सादगी उसे भी पसंद थी बाला की तरह. कार के हॉर्न की आवाज़ सुन उसका दिल धड़का किसी सोलह साल की लड़की की तरह. शुक्र है कि बारिश रुक चुकी थी.
उसने खिड़की से झांका. बाला, उसके अम्मा-अप्पा और कुछ लोग और थे. उसने बताया था कि साथ में उसके दो दोस्त और तीन क़रीबी रिश्तेदार आएंगे. बाला ने कुर्ता और लुंगी पहनी हुई थी. पारंपरिक पोशाक में भी वह बहुत अच्छा लग रहा था. मैत्रेयी के लिपस्टिक लगे होंठों पर एक शर्मीली मुस्कान फैल गई. प्यार और सपनों के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती!
उसे नीचे बुलाया गया जहां सगाई होनी थी. उनके घर का आंगन इतना बड़ा था कि उसमें आसानी से 50-60 लोग आ सकते थे. अप्पा ने सारा इंतज़ाम वहीं किया था. सबके चेहरों पर मुस्कान थी. बाला और वह एक-दूसरे को देख मुस्कुराए, आंखों ही आंखों में जैसे ढेर सारी बातें कर लीं.
सगाई का समय हो गया था. बाला बेशक नास्तिक था, पर उसके परिवार के बाकी लोग तो सारे नियमों का पालन करना पसंद करते थे. वे भी मैत्रेयी के अप्पा की तरह सारे रीति-रिवाज़ों का पालन करना चाहते थे. वह तो बालन की ज़िद और बढ़ती उम्र की वजह से वे बिना कुंडली मिलाए इस रिश्ते के लिए राज़ी हो गए थे.
बालन के अप्पा के बड़े भाई को विधिवत ढंग से उन दोनों की सगाई की घोषणा करनी थी. उसे वह एक काग़ज़ पर लिखकर लाए थे.  ऐसी ही परंपरा थी उनके परिवार की. अचानक उन्हें याद आया कि वह अपना चश्मा तो कार के डैशबोर्ड में ही भूल आए हैं.
वह किसी से उसे लाने के लिए कहते, उससे पहली ही बालन बोला, “मैं लाता हूं.”

यह भी पढ़ें: 10 उम्मीदें जो रिश्तों में कपल्स को एक- दूसरे से होती हैं, जो उन्हें बनाती हैं परफेक्ट कपल (10 Things Couples Expect In Relationship Which Make Them Perfect Couple)

बालन उनसे चाबी लेकर कार की ओर चला गया. कार गुलमोहर के पेड़ के पास खड़ी थी. उसने चश्मा निकाला, कार को लॉक किया ही था कि तभी ज़ोर से बिजली कड़की. बिजली की चमक आंगन में जगमगाती रोशनी के साथ गड़्ड-मड्ड हो गई. शाम की गहनता में रोशनी के बावजूद अंधेरा भर गया. मैत्रेयी को लगा जैसे उसकी सारी उम्मीदें उस अंधेरे में विलीन हो गईं हैं.
“सत्यानाश!” अप्पा चीखे. “मैंने तो पहले ही कहा था कि कुंडली मिलाए बिना रिश्ता जोड़ना ग़लत है. नहीं है मैत्रेयी की कुंडली में शादी का योग. अब भुगतो.”
बालन ठीक गुलमोहर के पेड़ के तने से सटा अधलेटा सा था. दिल की धड़कनें मैत्रेयी की भी जैसे रुक रही थीं. वह ज़ोर से उसकी ओर भागते हुए चिल्लाई, “बालन, मुझे तुमसे प्यार हो गया है. मैं तुमसे प्यार करती हूं. क्या हुआ है तुम्हें? तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते!” वह पागलों की तरह उसे हिलाने लगी.
“अरे, रुको तो सही. उठ रहा हूं, इतनी ज़ोर से हिलाओगी तो हड्डियां टूट जाएंगी.” वह मैत्रेयी को देख हंसा.
“जब बिजली चमकी थी, तो उसकी चमक ने तुम्हारे सौंदर्य को इतना उज्ज्वल कर दिया था कि मैं गश खाकर गिर पड़ा. इतना सुंदर लगने की क्या ज़रूरत थी तुम्हें? और क्या कह रही थीं तुम? मुझसे प्यार करती हो, फिर से कहो न!” बालन मुस्कुराते हुए उठ गया.
असल में बिजली जब चमकी थी, तो मैत्रेयी को देखने के चक्कर में उसका पैर लड़खड़ा गया था और वह संतुलन न रख पाने के कारण गिर गया था. गिरते-गिरते उसने गुलमोहर के पेड़ का सहारा लिया था, जिससे वह उसके सहारे अधलेटा हो गया और तेज़ गति से गिरने से बच गया था. मानो गुलमोहर ने उसे अपने नीचे शरण दे दी थी.
“और अप्पा, ये कुंडली मिलाना या ज्योतिषी सब मन के डर हैं. आप एकदम निश्‍चित रहें. मैत्रेयी को बहुत खुश रखूंगा.”


मैत्रेयी ने कसकर उसका हाथ थाम लिया. बारिश नहीं हो रही थी, हवा नहीं चल रही थी, फिर भी पेड़ उनके ऊपर लाल फूलों की वर्षा कर रहा था. उनके सिर पर एक मुकुट सा तन गया था. उसे लगा गुलमोहर के फूल और ज़्यादा लाल हो गए हैं, शायद वह दोस्ती का रंग हो.

अधिक कहानियां/शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए यहां क्लिक करें – SHORT STORIES


Share this article