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कहानी- गंदगी (Short Story- Gandagi)

“पर जीजाजी आप तो उसके ससुर हैं फिर आप उसकी हर फोटो ज़ूम करके क्यों देखते हैं? मुझे तो उस तस्वीर में उन दोनों के रिश्ते की सहजता और  प्रेम ही दिखा था. शायद इसीलिए लोग कहते हैं- गंदगी देखने वाले कि नज़र में होती है.”

 

इस बार राखी पर बहुत दिनों बाद हम सभी बहनेंअपने एकलौते छोटे भाई को राखी बांधने मायके में जुटे थे. हंसी-ठहाकों और बातों का सिलसिला ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था. तभी दीदी ने पूछा,”अपर्णा, विवेक भइया की बहू का फोन आता है तुम्हारे पास?”

दीदी के इस अप्रत्याशित प्रश्न पर मुझे समझ ही नहीं आया दीदी पूछना क्या चाह रही हैं.

“किसका दीदी?”

“अरे वो पटना वाले विवेक भइया, तुम्हारे जीजाजी बता रहे थे बहुत बेशर्म है उनकी बहू.”

“आप सुनीति की बात कर रही हैं!”

“वो तो बहुत प्यारी बच्ची है दीदी. उसकी तो आवाज़ सुनकर ही मन ख़ुश हो जाता है. लेकिन जीजाजी! आपने  उसके लिए ऐसा क्यों कहा?”

“देखती नहीं हो फेसबुक पर कैसे-कैसे कपड़े पहनती है. अभी आए चार महीने हुए नहीं और रंग-ढंग देखो उसके!”

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“जीजाजी, आप उसकी फ्रेंड लिस्ट में हैं?”

“हां. मैंने उसे रिक्वेस्ट भेजी थी उसने स्वीकार कर ली थी.”

“अच्छा! तब तो बहुत अच्छी है वो… आजकल तो बच्चे घरवालों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार ही नहीं करते. रही बात कपड़ों की तो मुंबई जैसे शहर में तो ये सब आम है जीजाजी.”

“मुझे नहीं पसंद है लड़कियों का यूं जींस और टी शर्ट पहनना. हमारे घर के ऐसे संस्कार नहीं हैं, पता नहीं विशाल भइया ऐसी बहू को कैसे झेल रहे हैं! और सुमित.. कम से कम  उसे तो देखना चाहिए कि उसकी बीवी क्या पहन रही है.. फेसबुक पर कैसीफोटो डाल रही है.”

मैं अभी कुछ समझ ही नहीं पा रही थी कि जीजाजी बोले,क्ष”तुमने उसकी लाल फ्रॉक वाली फोटो देखी?”

“कौन सी? ‌जिसमे वो और सुमित समुद्र के किनारे खड़े हैं!”

“हां वही.. ज़ूम कर के देखना कितना चुस्त कपड़ा पहना था, देख कर ही मन अजीब हो गया.”

“पर जीजाजी आप तो उसके ससुर हैं फिर आप उसकी हर फोटो ज़ूम करके क्यों देखते हैं?

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मुझे तो उस तस्वीर में उन दोनों के रिश्ते की सहजता और  प्रेम ही दिखा था.

शायद इसीलिए लोग कहते हैं, “गंदगी देखने वाले कि नज़र में होती है.”

– पल्लवी विनोद

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Photo Courtesy: Freepik

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