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कहानी- मुफ़्त हुए बदनाम २: दोस्ती निभाने पर मिली रुसवाई (Short Story- Muft Huye Badnam 2)

कई दिनों की कशमकश के‌ बाद‌ आख़िरकार मैंने निर्णय ले लिया कि मैं नीलम के प्यार के रास्ते में नहीं आऊंगी, अतः मैंने पढ़ाई का बहाना बनाकर शादी के लिए मना करते हुए माफ़ी मांग ली. 

कहते हैं दोस्ती का रिश्ता हर रिश्ते से ऊंचा व पवित्र होता है. लेकिन इसी रिश्ते ने मुझे ज़माने  भर की रुसवाइयां सौगात में दी. बात उन दिनों की है जब मेरे रिश्ते की बात चल रही थी.

एक दिन मुझे देखने के लिए लड़केवाले आ रहे थे. घर में सभी तैयारियां हो चुकी थीं. सभी लोग बहुत ख़ुश थे. मैं अपने घर में इकलौती थी, इसलिए सभी मुझे बहुत प्यार करते थे. सही समय पर लड़केवाले घर पहुंच गए, जब मैंने लड़के (समीर) को देखा, तो बस देखती ही रह गई, सांवला सुंदर मासूम सा चेहरा, मेने उन्हें पहली नज़र में ही पसंद कर लिया और अपनी हामी भर दी.

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समीर व उनके घरवालों ने भी मुझे पसंद करने के साथ ही शगुन भी दे दिया. मैंने अपनी सभी सहेलियों को समीर की फोटो दिखाई, सभी हमारी जोड़ी की प्रशंसा कर रही थीं, लेकिन गैरी सहेली नीलम की आंखों में आंसू थे. मेरे काफ़ी पूछने परउसने जो कुछ बताया वो काफ़ी विस्फोटक था.

दरअसल, नीलम पिछले तीन सालों से समीर से एकतरफ़ा प्यार कर रही थी. उसने मन- ही मन निश्चय कर रखां’ था कि शादी करेगी तो सिर्फ़ समीर से, अन्यथा नहीं. नीलम मुझसे मिन्नतें करने लगी कि में समीर से शादी ना करूं.

कई दिनों की कशमकश के‌ बाद‌ आख़िरकार मैंने निर्णय ले लिया कि मैं नीलम के प्यार के रास्ते में नहीं आऊंगी, अतः मैंने पढ़ाई का बहाना बनाकर शादी के लिए मना करते हुए माफ़ी मांग ली.

हालांकि शादी के लिए मैंने मना कर दिया था, लेकिन समीर के घरवालों ने मुझमें ही नुक्स निकालना शुरू कर दिया.

“ज़रूर लड़की का किसी के साथ चक्कर होगा इसलिए उसने ऐसा कहा…”

“लड़की में कोई ऐब होगा…”

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जैसी अनगिनत अनर्गल बातों से उन लोगों ने मुझे पूरे मोहल्ले में बदनाम कर दिया, और सबसे अधिक दुख मुझे इस बात का हुआ कि जिस नीलम केलिए मैंने यह सब कुछ किया वो भी इन बातों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है. क्या दोस्ती निभाने का यहीं सिला मुझे मिलना था.

– पाठिका

कहानी- मुफ़्त हुए बदनाम

 

 

 

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Photo Courtesy: freepik

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