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कहानी- चाक जिगर के सी लेते हैं (Short Story- Chak Jigar See Lete Hain)

लड़का उसकी धड़कनों की आवाज़ को अपने सीने में महसूस करता था. उसकी उठती गिरती सांसों की आवाज़ से उस पर मदहोशी छाने लगती थी. पर वो जानता था, उसकी बांहों में समाई हुई लड़की इतनी नाज़ुक है कि थोड़े से दबाव से भी चटक जाएगी.

 

उसका मन इतना भारी हो गया था कि शरीर से उसका बोझ उठाया नहीं जा रहा था. दिमाग़ तक ख़बर पहुंच गई. उसने आंखों को निर्देश दिया फाटक खोल दो और नमकीन स्वाद उसके गालों पर फैल गया.

वो चाहता तो उठकर उसे सीने से लगा सकता थापर अपनी जगह से हिला तक नहीं. जाने अनुभवोंने उसे कब इतना परिपक्व बना दिया कि उसे लड़की के विक्षोभ का इस तरह निकलना सही लग रहा था. पहले वो उसके गालों को हथेलियों में भर लिया करता था. उसकी आंखों को चूमता थोड़ा संभल जाने पर कहता, “ओ पुष्पा आई हेट टीयर्स.”

वो कभी मुस्कुराती कभी एकदम शांत हो जाती. फिर धीरे-धीरे ये सिलसिला बंद हो गया.

तब लड़की को उसका ये कहना इतना चीज़ी लगता कि उससे पहले और बाद में की गई सारी क्रियाएं गौण हो जातीं. दिमाग़ के स्क्रीन पर पुराने सारे रील्स चलने लगते. मां का सुबकना, पापा का दूसरे कमरे में सो जाना. शादी के बाद से दीदी का अजीब होते जाना. कभी बिना बात खिलखिलाना, कभी एकदम से उदास हो जाना. पर वो तो उन सबसे बहुत अलग था.

कहता था, “इन आंखों में मेरे सिवा बस काजल की एंट्री हो सकती है. आंसुओं से बोल देना अगर तुम्हारी आंखों के आसपास भी दिखाई दिए तो उनकी टांगें तुड़वा दूंगा.” तब उसकी इन्हीं फिल्मी बातों पर उसे प्यार आता था.

कितना अलग था वो, बीते हुए दिनों की याद में अपना आज ख़राब नहीं करता था. उसे तो ज़िंदगी की हर शय से मुहब्बत थी.

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जब पहली बार असली मुहब्बत का एहसास हुआतो रातों की नींद उड़ गई थी. लफ़्ज़ों की स्याही का रंग गुलाबी हो गया था. आसमान में बादलों की जगह उसे लड़की का दुपट्टा दिखाई देता था. उदास आंखों वाली लड़की को अपने लिए मुस्कुराते देखना ही सबसे उसका बड़ा सुख था. उससे मिलने के बाद उसे ज़िंदगी से कुछ भी नहीं चाहिए था.

उस दिन स्कूटी को पैर से रोकते समय वो थोड़ा डिसबैलेंस हो गई थी. गिरने से ठीक पहले ही लड़के ने अपने हाथ से स्कूटी को रोक दिया था. दुनिया की हर भाषा में बोले जाने वाले सबसे प्रचलित दो शब्दों ‘थैंक यू’ ने उसकी दुनिया बदल थी. लड़के ने थैंक यू के जवाब में कॉफी पीने की पेशकश कर दी थी. ये सिलसिला कुछ दिन और चला फिर लड़के ने कहा, “यार आज चाय पीते हैं अब और कॉफी नहीं झेली जा रही.” लड़की ने आश्चर्य से उसकी तरफ़ देखा. वो कुछ पूछती उससे पहले ही बोल उठा, “तुम पर अच्छा इम्प्रेशन पड़े इस चक्कर में कॉफी पीता था. मुझे तो चाय ही पसंद है.”

लड़की मुस्कुराकर बोली, “मुझे भी.”

पहले कॉफी फिर चाय की मुलाक़ातों के कारण वो लड़के को जानने, समझने लगी थी. उसे पहली बार ये एहसास हुआ कि किसी लड़के के अंदर इतनी ख़ूबियां भी हो सकती हैं. इससे पहले ह्यूमर से भरे लड़कों को उसने फिल्मों में ही देखा था. जब भी मन घबराता उसके रूम में चली जाती. जाने कैसे वो उसकी बेचैनियों को समेट लेता फिर कहता, “तुझे डर नहीं लगता पर मुझे तो लगता है पुष्पा, लोग मेरे बारे में क्या क्या बातें बनाएंगे.” फिर उसके दुपट्टे को अपने मुंह में पकड़ कर बोलता, “मैं कहीं मुंह दिखाने लायक़ नहीं बचूंगा.”

उसकी इन हरकतों से लड़की खिलखिला पड़ती और उसके सीने से लग जाती. बहुत देर तक लड़के की हथेली उसकी पीठ को थपथपाती रहती. फिर उसके बालों को सहलाते हुए कहता, “अंधेराहोने वाला है चलो तुम्हें छोड़कर आता हूं.”

लड़का उसकी धड़कनों की आवाज़ को अपने सीने में महसूस करता था. उसकी उठती गिरती सांसों की आवाज़ से उस पर मदहोशी छाने लगती थी. पर वो जानता था, उसकी बांहों में समाई हुई लड़की इतनी नाज़ुक है कि थोड़े से दबाव से भी चटक जाएगी.

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धरती के एक छोटे से कोने में दो लोग एक हो रहे थे.

हर डर को परे रख लड़की लड़के की आंखों में झिलमिलाता अपना अक्स देख रही थी. उसकी हथेलियों को चूमते हुए कहा, “दुनिया में इससे कोमल और इससे मज़बूत कुछ भी नहीं है मुझे यूं हीथामे रहना.”

आज वो हथेलियां उसके कंधे पर नहीं थीं. जबकि लड़का वहीं था. आसमान में सूरज डूब रहा था. उस पर फैले हल्के और गहरे केसरिया रंग में लड़के को लड़की का दुपट्टा नहीं दिखा जबकि लड़की ठीक उसी रंग का कुर्ता पहने हुई थी. लड़का वहां से उठा और चाय बनाने लगा. लड़की अपने आंसू पोंछ कर लैपटॉप  पर अपना पेंडिंग काम पूरा करने लगी. लड़के ने उसे चाय देते हुए कहा, “आज डिनर करने बाहर चलते हैं.”

“हम्म कहां?”

“वहीं चलें…”

“नहीं, इस बार किसी नई जगह चलते हैं.”

लड़की को डर लगता था कि उसकी पसंद वाली जगह की एकरसता लड़के को उबा ना दे. जबकि उसे वो जगह इतनी पसंद थी कि जीवनभर वहीं जाना चाहती थी.

लड़का सोच रहा था, अच्छा है लड़की उस जगह नहीं जाना चाहती. वहां के माहौल का गांभीर्य उसके मन को और डुबा देता है.

रात बिस्तर के दोनों कोने पर जलते लैंप की रोशनी में वो दोनों अपनी अपनी किताबें लिए पढ़ रहे थे. पर जो पढ़ रहे थे वो उनके भीतर नहीं पहुंच पा रहा था. लड़की कामन किया किताब को साइड टेबल पर रख लड़के के सीने से लग जाए. ये सोचते ही उसके सीने में कुछ उमड़ने लगा.

लड़का इस वक़्त रूमी को पढ़ रहा था. बार-बार एक ही कोट को पढ़ रहा था.

उसने लड़की की तरफ़ देखा वो एक हथेली भर की ही दूरी पर ही थी. उसकी पीठ में रह-रह कर हरकत हो रही थी.

‘क्या ये फिर रो रही है? अब क्या कर दिया मैंने? सब तो ठीक था.’ एक तरफ़ लड़का ये सोच कर झुंझुला रहा था. दूसरी तरफ़ लड़की के मन में भावनाओं का सैलाब उमड़ रहा था.

“क्या ऐसी ज़िंदगी के सपने देखे थे मैंने! एक बार भी नहीं पूछ रहा कि मैं क्यों परेशान हूं? ये तो औरों से अलग था! नहीं कोई अलग नहीं होता सब एक जैसे होते हैं.

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थोड़ी देर में लड़की शांत हो गई.

आंसू रुक चुके थे पर मन में विचारों की इतनी भीड़ थी कि नींद को आंखों तक आने का रास्ता नहींमिल रहा था.

नींद तो उसकी आंखों में भी नहीं थी.

पुराने दिनों की रील्स उसके मन में चल रही थी. लड़की के आने से पहले उसके जीवन में सहेजने लायक़ कुछ भी नहीं था. जब से लड़की आई वो उसे खोने के एहसास से भी डरने लगा था. कभी-कभी उसे लगता था कि लड़की को ज़्यादा संभालने से ही वो ज़्यादा नाज़ुक होती जा रही है.

रात की सुइयां अब उसकी आंखों में चुभने लगी थीं. कमरे की खिड़की बंद थी पर बाहर का सन्नाटा जाने कैसे कमरे के अंदर तक आ गया था. उस नीरवता में लड़की के करवट बदलने की आवाज़ उसे बता रही थी कि नींद वहां भी नहीं है. पलट कर देखा तो लड़की उसकी तरफ़ ही देख रही थी. उसने भी करवट उसकी तरफ़ कर लिया. लड़की ने कुछ देर उसकी तरफ़ देखा फिर आंखें बंद कर लीं.

लड़के ने अपनी हथेलियों को उसकी तरफ़ बढ़ा दिया. धीरे-धीरे उसके सिर को थपथपाने लगा. लड़की ने आंखें खोलीं उसकी आंखें फिर से सैलाब बन रही थीं. तभी लड़के ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया.

रात की सुइयों की आवाज़ अब चिड़ियों की आवाज़ में दब गई थीं. कमरे के सन्नाटे ने जाते वक़्त पलटकर देखा, अबोध शिशु की तरह चेहरे वाली लड़की का चेहरा लड़के के सीने से लगा हुआ था और लड़के की उंगलियां रह रह कर लड़की के सिर को थपथपा रही थीं. सन्नाटे को अपनी ऐसी विदाई बहुत पसंद थी.

पल्लवी विनोद

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