“हम समझदार हो गए हैं. अब हम तुम्हारे झांसे में नहीं आएंगे.” वे बोले. “अरे मैं तो सीधे से मांग रही थी. नहीं देना तो मत दो.” कहकर कैटी अपनी सादी ब्रेड ले आई और मज़े से खाने लगी. 'अएं, अब इसे मूर्ख और ख़ुद को अक्लमंद साबित कैसे करें?..' वो दोनो सोचने लगे.

जंगल के स्कूल में क्लास तीन में पढ़ाई जाती थी बंदर और बिल्ली की कहानी. वही कहानी जिसमें दो बंदरों को एक रोटी मिली थी. दोनो "मुझे पहले मिली" कहकर झगड़ने लगे. तब एक बिल्ली ने यह देखकर उन्हें फुसलाया, "मैं तुम्हारी रोटी को दो बिल्कुल बराबर भागों में बांट दूंगी. रोटी मुझे दे दो."
भोले बंदरों ने उसे रोटी दे दी. तब बिल्ली रोटी तोड़ती गई और ऐसा कहकर, "एक भाग थोड़ा बड़ा कट गया है, उसे बराबर करने के लिए थोड़ा सा हिस्सा मैं खा लेती हूं..." थोड़ा करके पूरी रोटी खा गई.
क्लास में ये कहानी क्या पढ़ाई गई, सारे बच्चे बंदरों को मूर्ख कहकर चिढ़ाने लगे और बिल्ली को चालाक कहकर.
रॉकी और जैकी दो बंदर भाई थे. जो कुछ ज़्यादा ही चिढ़ते थे. उन्होंने तय कर लिया कि ख़ुद को अक्लमंद और कैटी को बेवकूफ़ साबित करके रहेंगे रॉकी-जैकी को सोचते-सोचते एक खुराफ़ाती आइडिया आया. उन्होंने तय कर लिया कि दूसरे दिन टिफिन में बढ़िया वाली ब्रेड लाएंगे और कैटी के सामने उसे दिखाकर लालच दिलाकर खाएंगे.
दूसरे दिन वे ब्रेड लाए. कैटी को दिखाकर खा रहे थे. कैटी को लालच आया भी उसने ब्रेड मांगी भी.
“हम समझदार हो गए हैं. अब हम तुम्हारे झांसे में नहीं आएंगे.” वे बोले.
“अरे मैं तो सीधे से मांग रही थी. नहीं देना तो मत दो.” कहकर कैटी अपनी सादी ब्रेड ले आई और मज़े से खाने लगी.
'अएं, अब इसे मूर्ख और ख़ुद को अक्लमंद साबित कैसे करें?..'
वो दोनो सोचने लगे.

तभी वहां पांडा आया. बोला, “अरे, ये बासी और ख़राब हो चुकी ब्रेड तुम में से कौन लाया?”
“जैकी!” रॉकी ने कहा.
यह भी पढ़ें: कहानी- बंदर के बारे में मत सोचना… (Short Story- Bandar Ke Bare Mein Mat Sochna)
“वो तो है ही मूर्ख.” पांडा रॉकी से बोला.
"लेकिन तुम तो बुद्धिमान हो. उसे सही-ग़लत का फ़र्क़ समझाकर भेजना था.”
“वो बासी ब्रेड उठा लाया है.” कहते हुए पांडा ने उनके हाथ से लेकर ब्रेड को सूंघा और बुरा सा मुंह बनाकर उसके हाथ पर पटक दिया.
बस फिर क्या था तारीफ़ सुनकर फूले रॉकी ने जैकी से झगड़ना शुरू कर दिया.
“तुम इतने समझदार हो तो तुम्हीं क्यों नहीं सामान ख़रीदने जाते?” जैकी भी ग़ुस्सा गया. रॉकी ने वो ब्रेड उठाकर फेंक दी.

थोड़ी देर बाद दोनो का ध्यान पांडा की ओर गया तो उसे मजे से वही ब्रेड खाते देख हैरान रह गए.
तब पांडा मस्ती में बोला, “अरे बुद्धुओं मॉरल ऑफ द स्टोरी बिल्ली को चालाक या बंदर को बुद्धू साबित करना नहीं था. मॉरल ऑफ द स्टोरी तो ये था कि दो लोगों के झगड़े में तीसरा लाभ उठाता है.
जानवर कोई भी हो जब तक ख़ुद पर विश्वास करना नहीं सीखेगा, अपने विवेक का इस्तेमाल करना नहीं सीखेगा, आपसी लड़ाई नहीं छोड़ेगा, तब तक कोई न कोई उसका फ़ायदा उठाता ही रहेगा. ज़रूरत बिल्ली से नहीं अपनी नासमझी से बचने की है.” पांडा ब्रेड खाकर अपने हाथ झाड़ता हुआ बोला.
यह भी पढ़ें: पेट ग्रूमिंग (Career In Pet Grooming)
“तुमने इतनी टेस्टी ब्रेड खिलाई. बदले में तुम्हें ये क़ीमती ज्ञान दे रहा हूं सम्हालकर रखना.”

भावना प्रकाश

अधिक कहानियां/शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए यहां क्लिक करें – SHORT STORIES
Photo Courtesy: Freepik
