Close

उम्र के साथ बदलें अपना रूटीन और डायट (Adjust your routine and diet as you age)

अगर ख़ानपान की बात करें, तो हर उम्र की अपनी अलग-अलग ज़रूरतें होती हैं, लेकिन हम क्या करते हैं, जो 20 की उम्र में खा रहे हैं, वही 30-40-50 और यहां तक कि 60-70 तक वही खाते रहते हैं. बिना यह सोचे-समझे कि जो हम खा रहे हैं, वो हमारे लिए सही भी है या नहीं या फिर इससे हमें पोषण भी मिल रहा है या नहीं? आज हम इसी विषय को आगे बढ़ाएंगे कि कैसे उम्र के साथ अपनी डायट और रूटीन को बदलना चाहिए.

routine and diet tips

* बचपन में बॉडी और ब्रेन डेवलपमेंट पर फोकस करना ज़रूरी होता है और वो हर पैरेंट्स करते ही हैं.

* इसी तरह से यंग एज में हम काफ़ी एनर्जेटिक फील करते हैं, लेकिन यहां अगर हमसे चूक हो गई, तो आगे चलकर भारी पड़ सकती है. यंग एज में हम एक्सपेरिमेंट करते हैं और हेल्थ की बजाय फन और एंजॉयमेंट पर फोकस रहता है, इसलिए पार्टी करना, अन्हेल्दी खाना, जंक फूड आदि हमारी सेहत बिगाड़ सकते हैं.

* एक बार जब हम 30 की उम्र में आते हैं, तो धीरे-धीरे एनर्जी लेवल कम होने लगता है, लेकिन अर्ली थर्टीज़ में हमको इसका अंदाज़ा नहीं होता. यहां हमें अपनी हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए. मसल्स की स्ट्रेंथ बनी रहे, नर्व्स हेल्दी रहें, वज़न न बढ़े- इन सबका ध्यान रखना चाहिए.

* 30-40 के बीच प्रोटीन इंटेक बढ़ाना चाहिए, जैसे- अंडे, दालें, पनीर, दही, दूध, बादाम, अखरोट, चिया सीड्स, फलियां, मछली, टोफू, सोयाबीन आदि. इस उम्र में फाइबर भी उतना ही ज़रूरी होता है. साबूत अनाज अपने डायट में शामिल करें. दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी सब खाएं, लेकिन घर का बना हुआ खाना खाएं.

* इसी तरह रूटीन में एक्सरसाइज़ शामिल करें. रोज़ आधा घंटे व्यायाम को दें, जिसमें आप ब्रिस्क वॉक, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ या योगा-मेडिटेशन आदि कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: आपका मॉर्निंग रिचुअल तय करता है कैसा गुज़रेगा पूरा दिन (Your morning ritual determines how your entire day will go)

* 40-50 की उम्र आते-आते थकान महसूस होने लगती है, हमारा मेटाबोलिज़्म स्लो होने लगता है, हड्डियां कमज़ोर होने लगती हैं, हार्मोनल बदलाव शुरू होने लगते हैं, ख़ासकर महिलाओं में, वज़न बढ़ने लगता है, इसलिए इस उम्र में स्वाद की बजाय पोषण पर ध्यान देना ज़रूरी है. अधिक पोषण और लो कैलोरी फूड अपने डायट में शामिल करें. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, मौसमी फल ज़रूर खाएं और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करें, रोज़ नहीं, हफ़्ते में 2-3 बार काफ़ी है. शुगरी और रिफाइंड फूड कम कर दें. हड्डियों की मज़बूती के लिए विटामिन डी लें. सुबह की गुनगुनी धूप में घूमें.

* इसी उम्र में लाइफस्टाइल डिसीज़ होने का ख़तरा भी होता है, इसलिए हल्का सुपाच्य भोजन लें, तेल और घी का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल न करें.

* 50-60 की उम्र में पोषण और ज़रूरी हो जाता है. उसी तरह से मेंटल हेल्थ मेंटेन रखने के लिए ब्रेन फूड भी ज़रूरी होता है. हाइड्रेटेड रहें, क्योंकि अक्सर इस उम्र तक आते-आते हम हाइड्रेशन पर इतना ध्यान नहीं देते. पानी संतुलित मात्रा में पीएं. नमक का सेवन बहुत ज़्यादा न करें. फाइबर युक्त आहार लें. लो फैट मिल्क, ब्रोकली, दही आदि को डायट में शामिल करें.

* इस उम्र में जॉइंट पेन भी उभरने लगता है, उसके लिए लाइट एक्सरसाइज़ करें. वॉक पर जाएं, स्विमिंग भी बेहतरीन ऑप्शन है.

* 60-70 तक आते-आते शरीर कमज़ोर होने लगता है, भूख कम लगने लगती है और शरीर में पोषण को अवशोषित करने की क्षमता भी कम होने लगती है, इसलिए इस उम्र में एनर्जी सेव करना ज़रूरी है. हाई प्रोटीन डायट लें, छोटे-छोटे मील्स लें. तीन की बजाय पांच बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. दही, पालक, अंडा, लो फैट मिल्क लें. दही की जगह आप छाछ भी ले सकते हैं. हड्डियों की मज़बूती के लिए अगर ज़रूरी लगे, तो कैल्शियम सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं. इस उम्र में पाचन भी कमज़ोर होने लगता है, इसलिए अपनी गट हेल्थ पर भी ध्यान दें. दही नेचुरल प्रोबायोटिक है, जिससे हेल्दी बैक्टीरिया बढ़ते हैं.

* इस उम्र में संतुलन बिगड़ने और गिरने का ख़तरा भी बना रहता है, इसीलिए मोबिलिटी से जुड़े व्यायाम करें.

* उम्र के अलावा जेंडर का भी ध्यान रखना ज़रूरी है, क्योंकि पुरुष और महिलाओं की शारीरिक संरचना अलग-अलग होती है, इसलिए उनकी ज़रूरतें भी अलग होती हैं. महिलाओं में हार्मोनल बदलाव बहुत ज़्यादा होता है. पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और फिर मेनोपॉज़. ऐसे में महिलाएं अक्सर बढ़ती उम्र के साथ एनीमिक और कुपोषित हो जाती हैं. महिलाओं को आयरन और कैल्शियम से जुड़ी डायट ज़्यादा लेनी चाहिए. वो नट्स, पनीर, दही, दूध आदि का सेवन करें, क्योंकि अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को लेकर लापरवाह होती हैं. उन्हें पालक व अन्य हरी सब्ज़ियां, फल, साबूत अनाज, सीड्स आदि ज़रूर खाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: डायट टिप्सः क्या खाएं, क्या न खाएं? (Diet Tips: What to eat and what not to eat?)

* इसके अलावा पॉज़िटिव रहें, हेल्दी खाएं, लेकिन अपनी क्रेविंग्स के लिए भी एक-दो दिन रखें.

* मेडिटेशन करें. मेंटल हेल्थ को इग्नोर न करें, अगर कोई समस्या है, तो एक्सपर्ट की सलाह लें.

* नींद पूरी लें, रेग्युलर हेल्थ चेकअप कराएं.

* अगर कोई लाइफस्टाइल डिसीज़ है, तो उसे इग्नोर न करें, डॉक्टर की सलाह से उसे कंट्रोल करें और अपना डायट प्लान भी उसी के अनुसार बनाएं.

* स्ट्रेस कम लें. अपनी हॉबीज़ को जीवित रखें. ख़ुश रहें, क्योंकि हंसी-ख़ुशी हर मर्ज़ की दवा है, बल्कि वो तो एक तरह से प्रिवेंट करती हैं बीमारियों से.
- गीता शर्मा

routine and diet tips

Source: Shutterstock

Share this article