ग़ज़ल- तेरी पाकीज़गी में हमदम ...

ग़ज़ल- तेरी पाकीज़गी में हमदम (Gazal- Teri Pakeezgi Mein Humdam)

By Admin June 21, 2019 in Digital PR

Gazal

मेरी आंख से बता क्यों ख़्वाब झांकता है
एहसास का समंदर तेरी आंख में छुपा है

दिल मेरा स़िर्फ लफ़्ज़ों का आईना ठहरा
रूमानियत का परचम तेरे अश्क में छुपा है

तू आस पास हो तो तस्वीर खींच लूं
मेरे दिल में जो बसा है वो रूह-सा छुपा है05

तुझे ढूढ़ने को निकले तो उस तक पहुंच गए
तेरी पाकीजगी में हमदम अभी और क्या छुपा है…

 

Murli Manohar Shrivastav

मुरली मनोहर श्रीवास्तव

 

मेरी सहेली वेबसाइट पर मुरली मनोहर श्रीवास्तव की भेजी गई कविता को हमने अपने वेबसाइट में शामिल किया है. आप भी अपनी कविता, शायरी, गीत, ग़ज़ल, लेख, कहानियों को भेजकर अपनी लेखनी को नई पहचान दे सकते हैं…

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ग़ज़ल- तेरी पाकीज़गी में हमदम (Gazal- Teri Pakeezgi Mein Humdam)
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ग़ज़ल- तेरी पाकीज़गी में हमदम (Gazal- Teri Pakeezgi Mein Humdam)
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मेरी सहेली वेबसाइट पर मुरली मनोहर श्रीवास्तव की भेजी गई कविता को हमने अपने वेबसाइट में शामिल किया है. आप भी अपनी कविता, शायरी, गीत, ग़ज़ल, लेख, कहानियों को भेजकर अपनी लेखनी को नई पहचान दे सकते हैं… मेरी आंख से बता क्यों ख़्वाब झांकता है एहसास का समंदर तेरी आंख में छुपा है दिल मेरा स़िर्फ लफ़्ज़ों का आईना ठहरा रूमानियत का परचम तेरे अश्क में छुपा है
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