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हास्य कविताएं- करोना कहर (Hasay Kavitayen- Corona Qahar…)

झूठ-मूठ खांसा क्या बहू ने बन गए झटपट काम
पलंग छोड़ सासू भागी, उनका जीना हुआ हराम
जीना हुआ हराम सोचें, 'क्यूं बाई की छुट्टी कर दी'
मन मसोस के बोलीं, 'बहू तुमने तो हद ही कर दी'
जा कर करो आराम कमरे के बाहर मत आना
ख़बरदार जो आ पास मेरे अब पांव-हाथ दबाना
धो-धोकर हाथ थक गई, सासूजी कर कर काम
लाख समझाया फिर भी दूर से उसे किया सलाम…

लेटे लेटे देख रहा था टीवी, त्राहि त्राहि करोना करोना
थमा दिया बीवी ने झाड़ू प्रियतम कुछ तुम भी करो ना प्यारी वोडका से ऐसे डिस्पेंन्सर भर डाले, कुछ पूछो ना
छिला कलेजा उससे हाथों को सबका रह रह के धोना…

कोई कुछ करने नहीं देता कहता
घर में रहो ना
फिर भी ये शब्द हर ज़ुबां पे गूंजा
करोना… करोना…

कोरोना- एक अलग पहलू यह भी…

क्यों है कोरोना को रोना
कोरोना कोरोना, क्या रोना,
सब जो ठाने वो ही होना,
बस 3 एहतियात बरतना,
बाहर ज़रूरी तो ही जाना.
वरना घर का पकड़ो कोना

सबसे 3 फ़ीट दूर रहो ना,
इसी दूरी से बात करो ना.
हर 20 मिनट,20 सेकेंड,
तुम अपने हाथों को धोना.

शेष हुई प्रकृति की मर्ज़ी
उससे खिलवाड़ करो ना
अब धर्मों का छोड़ो रोना
तुम केवल इंसान बनो ना…

 
Corona Qahar
Dr. Neerja Srivastava 'Neeru'
डॉ. नीरजा श्रीवास्तव 'नीरू'

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