पीरियड्स- गर्व से कहिए ये दाग़ अच्छे हैं (Periods- say proudly that you are in these days)

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आज तो पार्टी में सब मुझे ही देखेंगे, डीजे फ्लोर पर डांस करके मैं सबको आउट कर दूंगी, मेरी ऑफ व्हाइट फ्लोरलेंथ ड्रेस मुझे अट्रैक्शन ऑफ पार्टी बना देगी… न जाने ऐसी कितनी बातें आप भी सोचती होंगी और इस सोच से ख़ुद को सातवें आसमान पर पाती होंगी, लेकिन बिना बताए डेट से पहले आकर पीरियड आपकी सारी ख़ुशियों और सपनों पर पानी फेर देता है. एक पल में ऐसा लगता है कि आप तो कहीं की नहीं रहीं. बस अब सारा प्लान फुस हो गया. आख़िर ऐसा क्यों?

दुश्मन नहीं दोस्त समझें
अगर सीरियस होना ही है, तो इस बात को लेकर होइए कि यह एक चीज़ है, जो हर माह आपके साथ होती है. तो ऐसे में इसे दुश्मन मानने की बजाय अगर दोस्त बना लें, तो कैसा रहेगा? गुड आइडिया न. यस बोर, उदास और आगे के जीवन में ख़ुशियों के पल बिखेरनेवाले पीरियड्स को अपना दुश्मन नहीं बेस्ट फ्रेंड समझें.

ये दाग़ सच में अच्छे हैं
चॉकलेट खाते हुए जब मेल्टेड चॉकलेट आपकी ड्रेस पर गिर जाती है, तब तो आप उसे बड़ी नज़ाकत से अपनी उंगली से धीरे से पोंछती हैं. कितनी लड़कियां, तो चॉकलेट का एक टुकड़ा या एक बूंद भी ज़ाया नहीं करना चाहतीं. हद तो तब हो जाती है, जब अपनी सहेलियों को ब्रैंडेट आइस्क्रीम, चॉकलेट के दाग़ दिखाकर ख़ुद का रेपो रेट बढ़ाने से पीछे नहीं हटतीं. ऐसे में अगर पीरियड्स के दाग़ लग जाते हैं, तो उन्हें छपाने या किसी के पूछने पर इतना क्या शर्माना या ख़ुद को गिल्ट फील करवाना, जैसे कि कोई पाप कर दिया हो! अपनी इस मेंटैलिटी को बदलिए. ये आप भी जानती हैं कि पीरियड्स आपकी आगे की लाइफ के लिए कितना ज़रूरी है. ऐसे में अगर दाग़ कभी लग भी जाए, तो गर्व से कहिए- यस आई एम इन पीरियड्स.

छुपाएं नहीं, बिंदास कहें
नो यार आई कान्ट कम, कहा न मैं नहीं आ सकती, मैं पूजा में नहीं बैठ सकती, जैसी आदि बातें बनाने की कोई ज़रूरत नहीं. यह आपकी लाइफ का एक अहम् हिस्सा है. इसे खुलकर एंजॉय करें. किसी तरह का बहाना बनाने की बजाय, बिंदास कहें कि मंथ का बेस्ट फेज़ चल रहा है, क्योंकि आपका पीरियड्स आ गया है.

बेफिक्र होकर हर पल को करें एंजॉय
पार्टी, फंक्शन, गेट-टु-गेदर, फैमिली गैदरिंग, जैसे आदि मौक़ों को गंवाने की बजाय खुलकर जिएं. इस पीरियड्स को हौवा न बनाएं. इस किसी तरह का इशू न बनाएं. बेफिक्र होकर अपने हर मोमेंट को जिएं.

सिंगल नहीं मिंगल रहें
क्या आप भी उन लड़कियों में से हैं, जो पीरियड्स के दौरान दूसरों से ख़ुद को अलग कर लेती हैं, घर में किसी कमरे में पड़ी रहना ज़्यादा ज़रूरी समझती हैं, तो अब ट्रेंड है बदलने का मैडम. अब तो लड़कियां पीरियड्स की फोटोज़ को सोशल साइट्स पर भी पोस्ट करने से नहीं कतरातीं. और आप हैं कि दूसरों से दूरी बना रही हैं. इट्स बैड डियर.

ख़ुद को दें स्पेशल ट्रीटमेंट
इसे महीने के वीक डेज़ कहने की बजाय स्पेशल डेज़ कहें. इन दिनों ख़ुद को जितना हो सके स्पेशल फील कराएं. जो पसंद हो, वो खाएं, पहनें, घूमने जाएं. बिना रोक-टोक के लाइफ के इन दिनों को एंजॉय करें.

तो क्या समझीं मिस ब्यटीफुल? अब से हर माह अपने उन दिनों को स्पेशल बनाकर अपनी सोच के साथ दूसरों की सोच भी बदलें. ये तो आप भी मानती होंगी कि भगवान की बनाई हर चीज़ बेहद ख़ूबसूरत होती है. ऐसे में आपने ये कैसे सोच लिया कि आपका ये नेचुरल प्रॉसेस आपको सबसे अलग-थलग रहने, ख़ुद को डाउन फील करवाने, जैसी बातों पर ज़ोर देता है. जिन महिलाओं को पीरियड्स नहीं होते, वो मां बनने के सुख से वंचित रह जाती हैं. तो फिर आप अपने इस हसीन और ख़ूबसूरत से तोह़फे की अवहेलना क्यों करती हैं.

– श्वेता सिंह